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मशरूम और शहद के उत्पादन पर दिया जोर

एक वर्ष पहले
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कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वैज्ञानिकों व प्रगतिशील किसानों के साथ गोष्ठी आयोजित की गयी। प्रभारी डा. ब्रजेन्दु कुमार ने बताया कि केंद्र के माध्यम से कृषि से जुड़ी समस्याओं का समाधान की कोशिश की जाती है। साथ ही किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्षण कराया जाता है। उन्होंने बताया कि विभिन्न अनुसंधान केंद्रों में विकसित फसल के प्रभेदों के बीज का प्रत्यक्षण भी किया जाता है। कई बार इच्छुक किसानों को भी बीज दिये जाते हैं। अगर परिणाम बेहतर रहे तो उसकी खेती को बढ़ावा दिया जाता है। इसके अलावा कृषि विकास से संबंधित मशरुम, शहद, जैविक उत्पादन आदि को बढ़ावा के लिये किसानों को ट्रेनिंग भी दी जाती है। डा. ज्योति सिन्हा ने मित्र और शत्रु कीट पर चर्चा की। मिट्टी में मित्र के साथ शत्रु कीट भी होते हैं। वह फसल को नुकसान तब पहुंचाते हैं, जब उनकी संख्या एक वर्ग मीटर क्षेत्र में तीन से अधिक होती है। अन्यथा ये फसल को परागण में मदद ही करते हैं। कीट मित्र हों या शत्रु वे लार्वा और प्युपा की स्थिति में पौधे से चिपककर उनका रस चूसते हैं। इस लिहाज से खासकर दलहन व तेलहन फसलों में स्टीकर का उपयोग करेंे।

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