नूरसराय के नत्थाचक गांव में सूख रही धान की फसल से किसान परेशान, सही जानकारी देने में विशेषज्ञ असमर्थ

Bihar Sharif News - सिटी रिपोर्टर | बिहारशरीफ़/नूरसराय कहते हैं जब किसानों की फसलें लहलहाती हैं तब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं होता है...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 08:40 AM IST
Nursray News - farmers upset due to drying of paddy crop in nattarachak village of nursarai expert unable to give correct information
सिटी रिपोर्टर | बिहारशरीफ़/नूरसराय

कहते हैं जब किसानों की फसलें लहलहाती हैं तब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं होता है परंतु वही लहलहाती फसल जब किसी कारणवश सूखने लगती है या बर्बाद हो जाती है तब यह किसी शोक से कम नहीं होती है। वर्तमान में इसी परिस्थिति से जूझ रहे हैं किसान। लाख पानी पटवन के बाद भी किसानों के चेहरे पर उदासी बढ़ती चली जा रही है। नूरसराय प्रखंड के नत्थाचक गांव के किसान के 20 एकड़ में लगी धान का फसल सूख रही है। लेकिन अब तक कृषि विशेषज्ञों ने किसानों की परेशानी को दूर नहीं कर पाए। किसान अपने स्तर से धान बचाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे है। अब तक धान की फसल में चार से पांच वार सिंचाई कर चुके हैं। बावजूद फसल दिन व दिन सूखता जा रहा है। जिससे किसानों को अब चिंता सताने लगी है। किसान चुन्नु सिंह, संजय सिंह, दिनेश सिंह, महेश सिंह सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि विभाग के दावे आज पूरी तरह खोखले साबित हो रहे है। धान बचाने के लिए पौधा लेकर कृषि विभाग से जुड़े सभी विशेषज्ञों से मुलाकात की लेकिन किसी ने इसका निदान नहीं बताए। यहां तक की कृषि मंत्री से भी बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनके पीए से बात हुई तो पटना पहुंचकर आवेदन देने की सलाह दी। लेकिन अभी तक किसी भी पदाधिकारी को किसानों की इस समस्या पर तरस नहीं आया। और आज स्थिति यह हो गई है कि 20 एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो रहा है।

कई लोगों ने दिए कई सलाह

किसानों ने बताया कि जब फसल सुखने लगा तो सबसे पहले कृषि समन्वयक को इसकी सूचना दी। इनके द्वारा बीएलबी रोग बताते हुए दवा बताया गया। दवा देने के बाद फसल में काफी सुधार आया लेकिन कुछ दिन के बाद पुन: पौधा सुखने लगा। इसके बाद कृषि कार्यालय, हॉटीकल्चर कॉलेज से लेकर केबीके हरनौत तक पौधा लेकर गए लेकिन सभी जगहों पर कृषि विशेषज्ञों ने अलग-अलग कमी बताया और सुझाव दिए। लेकिन अभी तक किसी विशेषज्ञों ने इसका सही उपचार नहीं बताया।

खेत में सूख रहा धान का पौधा।

खुल गई विशेषज्ञों की पोल

कृषि से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में जब सुझाव देने की बात आती है ताे विशेषज्ञों द्वारा कई जानकारियां दी जाती है और वैज्ञानिकों के दिए गए सुझाव पर खेती करने की सलाह दी जाती है। लेकिन जब किसानों को फसल से संबंधित समस्या सामने आई तो सभी विशेषज्ञों की पोल खुल गई। किसान और कॉडिनेटर मुकेश कुमार समस्या के निदान के लिए दर-दर भटकते रहे लेकिन इसका निदान नहीं हो पाया। किसी ने कोई रोग तो कहीं जिंक की कमी बताई गई। लेकिन किसी ने रोग की जानकारी नहीं दी।

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