जैन धर्म के इतिहास और 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की पूजा-अर्चना के लिए आएं कुंडलपुर

Bihar Sharif News - जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती पर बुधवार से कुंडलपुर में दो दिवसीय कुंडलपुर महोत्सव शुरू हो रहा...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 09:10 AM IST
Silaw News - kundalpur for the worship of jainism and worship of lord mahavir for the 24th tirthankar
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती पर बुधवार से कुंडलपुर में दो दिवसीय कुंडलपुर महोत्सव शुरू हो रहा है। महोत्सव में आने वाले लोगों के स्वागत के लिए कुंडलपुर सज-धजकर तैयार है। महोत्सव में भाग लेने के लिए जैन श्रद्धालु भी आ चुके हैं। महोत्सव को लेकर कुंडलपुर नंद्यावर्त को भव्य तरीके से सजाया गया है। बुधवार की सुबह हाथी घोड़े और गाजे-बाजे के साथ भगवान महावीर की प्रतिमा को रथ पर स्थापित कर शोभा यात्रा निकाली जायेगी। भगवान महावीर जन्मभूमि कुंडलपुर के मंत्री विजय जैन ने बताया कि तीर्थ और जिला प्रशासन द्वारा सारी तैयारी पूरी कर ली गयी है। डीएम योगेन्द्र सिंह ने बताया कि महोत्सव स्थल पर मतदाताओं को जागरूक भी किया जायेगा। महोत्सव का उद्घाटन प्रमंडलीय आयुक्त करेंगे।

आयोजित होंगे कई कार्यक्रम

भगवान महावीर के जन्मोत्सव के मौके पर पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जिसके लिये कार्यक्रम स्थल एवं आसपास व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। 17 अप्रैल को स्कूली बच्चों के बीच प्रतियोगिता आयोजित की गई है। जिसमें रंगोली, पेंटिंग, मेंहदी प्रतियोगिता आयोजित किया जाएगा।

भगवान की प्रतिमा के साथ सुबह हाथी-घोड़ा और गाजे-बाजे के साथ निकाली जाएगी भव्य रथयात्रा

सज-धजकर तैयार महोत्सव स्थल।

क्या है कुंडलपुर की खासियत

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म आज से 2618 वर्ष पूर्व नालंदा के निकट कुंडलपुर ग्राम में राजा सिद्यार्थ के रानी माता त्रिशला के कुच्छी से होने की बात जैन श्रद्धालु कहते हैं। इनके अनुसार आज भी कुंडलपुर में प्राचीन जैन मंदिर में जन्म स्थान गर्भ गृह मंदिर के रूप में विश्व विख्यात है, जहां पर महावीर स्वामी का चरण स्थापित है। मंदिर के प्रबंधक जगदीश जैन ने बताया कि प्राचीन काल से ही इस मंदिर का अस्तित्व है। जिसका जीर्णोद्धार 1903 में जैन श्रद्धालुओं के द्वारा किया गया था। कहा जाता है भगवान महावीर की जन्म जिस महल में हुआ था उसका नाम नंद्यावर्त महल था। उस महल का पुनः अस्तित्व में लाने के उद्देश्य से ज्ञानमती माता जी ने 2003 में प्राचीन जैन मंदिर के बगल में नंद्यावर्त महल का निर्माण कराया।

शाम छह बजे से शुरू होगा सांस्कृति क कार्यक्रम

संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसमें पहले दिन शाम छह बजे से सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत होगी। इस अवसर पर भगवान महावीर के जीवन पर आधारित लघु नृत्य नाटिका, लोक गीत, लोक नृत्य की प्रस्तुति होगी। वहीं दूसरे दिन भोजपुरी के मशहूर गायिका देवी के स्वरलहरी का आनंद लोग ले सकेंगे।

यह सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे

17 अप्रैल- समीर एंड टीम द्वारा भगवान महावीर के जीवन पर आधारित लघु नृत्य नाटिका, आलोक चौबे एंड ग्रुप की प्रस्तुति, स्वरा आर्ट एंड कल्चर के तहत डा. सारिका का लोक गीत, नालंदा संगीत कला संस्थान द्वारा लोक नृत्य की प्रस्तुति।

18 अप्रैल- लोक गायक मनोरंजन ओझा, रूपम रम्या, देवी का गायन, ग्रेसी की प्रस्तुति।

कुंडलपुर महोत्सव में दिखेगी सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र की कला

कुंडलपुर महोत्सव के दौरान नंद्यावर्त महल परिसर के मुख्य द्वार के ठीक सामने मैदान में विश्वविख्यात सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र द्वारा बनायी गयी रेत की कलाकृतियां देखने को मिलेगी। एनडीसी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के स्वीप आईकॉन सह घोड़ासहन निवासी सुप्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र के सैंड आर्ट प्रदर्शनी के लिए रंग-बिरंगे अबीर की व्यवस्था की है।

जैन मंदिर।

महावीर जयंती पर आज से मजबूरों के लिए शुरू होगी एक शाम के भोजन की व्यवस्था

गिरियक| भगवान महावीर के निर्वाण भूमि पावापुरी में भी भगवान महावीर स्वामी का मंगलवार को 2618वां जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जायेगा। इसके लिए सारी तैयारी पूरी कर ली गयी है। जैन साधु और साध्वी पधार चुके हैं। इस बार महावीर जयंती खासकर पावापुरी क्षेत्र के विधवा, असहाय, दिव्यांग, सामाजिक उपेक्षित व गरीब लोगों के लिए खास है। भगवान महावीर सेवा केन्द्र द्वारा ऐसे लोगों के लिए प्रतिदिन एक शाम का भोजन की व्यवस्था की जा रही है। सालों भर यह सेवा मिलेगी। जैन श्वेतांबर भंडार तीर्थ के संयुक्त सचिव शांति लाल बोथरा ने बताया कि महावीर जयंती के अवसर पर गांव मंदिर से जल मंदिर तक प्रभातफेरी होगी। इसके अलावा मंदिर में ध्वजारोहण एवं पंचकल्याणक पूजा होगी।

महावीर स्वामी के सिद्धांत को करें आत्मसात

साध्वी डा. चन्द्रप्रभा श्री जी ने बताया कि अहिंसा परमो धर्म: और प्राणी मात्र के प्रति करूणा की धारा प्रवाहित करने वाले भगवान महावीर स्वामी का सिद्धांत सभी को आत्मसात करना चाहिए। यह मानव को मोझ देने वाला होगा। उन्होंने कहा कि पांच सिद्धांत मृसावाद, अस्ते अदतादान, ब्रह्मचारी, अपरिग्रह और प्रणाति पाथ महावीर स्वामी का मूल मंत्र है।

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