मसूर-सरसों पर फिरा पानी, गेहूं व चना काे भी क्षति
गुरुवार की सुबह बेमौसम बारिश ने रबी फसलों पर जबर्दस्त कहर बरपाया है। खासकर मसूर व सरसों की खेती करने वाले किसानों में कोहराम की स्थिति है। टाल क्षेत्र में किसानों की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर गया है। प्रखंड के 17 पंचायतों में सिरसी, वनगच्छा, शेरपुर, सागरपर, गरभूचक, रामपुर, नर्चवार, अलीनगर, पतसिया, मोबारकपुर, सादिकपुर, भथियार आदि गांवों को देहाती भाषा में दाल व गेहूं का कटोरा कहा जाता है। यहां के लोगों का मुख्य पेशा खेती और मजदूरी ही है। रबी की अच्छी फसल मिल जाये तो साल भर घर का चूल्हा जलाने में कोई परेशानी नहीं होती है। मौसमी आफत ने 60 से 70 और कहीं-कहीं 100 प्रतिशत फसल बर्बाद कर दिया है।
भरण पोषण का संकट
किसान चंदेश्वर प्रसाद, विन्देश्वर पासवान, कैला राम, गोरेलाल, राधेश्याम प्रसाद, सोबतिया देवी, अतरु मांझी आदि ने बताया कि जिनकी अपने खेत की फसल गई वह अगली दफा कुछ हद तक नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में आज भी पेशगी पर अधिकांश खेती की जाती है। क्योंकि बड़े-बड़े प्लॉटों के मालिक बाहर रहते हैं और खेती दूसरों को लगा देते हैं। ऐसे किसानों के समक्ष परिवार के भरण-पोषण का संकट हो जाता है। जमीनदाता की पेशगी चुकाने में बचा-खुचा भी स्वाहा हो जाता है।
60-70 प्रतिशत नुकसान
कृषि वैज्ञानिक डा. उमेश नारायण ने बताया कि मौसम के तेवर बिल्कुल उलट है। जलवायु परिवर्तन इसकी मुख्य वजह है। अगात की फसल लगभग पक चुकी है। इस स्थिति में पिछले कुछ समय से अचानक बूंदाबांदी से पकी फसल भींगकर भारी हो रही है। धूप होने पर फसल सूखती और फली फटकर अनाज मिट्टी में मिल जाते हैं। इससे खेत में किसानों को फसल की डंठल ही मिल पाती है। मसूर व सरसों में जिलाभर में नुकसान का प्रतिशत 60 से 70 है। जबकि अगात गेहूं की फसल भी गिर रही है। फसल में पानी सोखने से वह काली हो रही है। दाने भी खराब हुये हैं। गेहूं की फसल में 20 से 25 फीसदी का नुकसान है। चने की फसल जो फूल की स्थिति में है। बारिश से उसके अंकुर धूलने से फली लगने की संभावना कम होगी। इससे रबी फसलों में बेमौसम बारिश से हानि ही हानि है। भले पिछेती गेहूं को ज्यादा नुकसान नहीं है।
बेमौसम बारिश के बाद रबी फसल।