30 साल बाद बन रहा है महालक्ष्मी योग

Bihar Sharif News - शरद पूर्णिमा पर रविवार को विशेष संयोग बन रहा है। करीब 30 साल बाद ऐसा संयोग बना है। वैसे तो शरद पूर्णिमा की रात को...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 06:56 AM IST
Bihar Sharif News - mahalakshmi yoga is becoming after 30 years
शरद पूर्णिमा पर रविवार को विशेष संयोग बन रहा है। करीब 30 साल बाद ऐसा संयोग बना है। वैसे तो शरद पूर्णिमा की रात को आसमान से धरती पर चांदनी रात में अमृत बरसने की मान्यता चली आ रही है जो स्वत: ही सुखदायक है लेकिन इस बार बनने वाला महा संयोग जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य लाने वाला है। यह दुर्लभ योग है। 30 साल बाद चन्द्रमा और मंगल का आपस में दृष्टि संबंध स्थापित होने से यह योग बन रहा है।

महालक्ष्मी योग से मिलेगा लाभ : चन्द्रमा और मंगल के महालक्ष्मी योग से लाभ मिलेगा। शरद पूर्णिमा पर मीन राशि में चन्द्रमा। जबकि कन्या राशि में मंगल विराजमान रहेगा। मंगल हस्त नक्षत्र में होगा। यह चन्द्रमा के स्वामित्व वाला नक्षत्र है। यही नहीं चन्द्रमा पर वृहस्पति की दृष्टि पड़ रही है। जिससे एक और शुभ योग गजकेसरी बन रहा है। पंडित मोहन कुमार दत्त मिश्र ने बताया कि ऐसा संयोग वर्षों बाद बना है। इस दिन चन्द्रमा की छटा 16 कलाओं के साथ अद्भुत होती है। शरद पूर्णिमा का प्रारंभ 13 अक्टूबर की रात 12.36 और समापन 14 अक्टूबर की रात 2.38 पर होगा। रविवार को 5 बजकर 26 मिनट पर चन्द्रउदय होगा।

चांद की रोशनी में रखी खीर का करें सेवन : रात्रि 12 बजे के बाद चांद की रोशनी रखी खीर का पूरे परिवार के साथ सेवन करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि चांदनी रात में अमृत बरसता है। यह खीर खाने से काया निरोगी होता है और आयु बढ़ती है। श्री मिश्र ने बताया कि चांद की किरण में अमृत और आरोग्यता होती है।

इस तरह करें पूजा : धनेश्वर घाट मंदिर के शैलेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। घर में देवी-देवताओं के सामने गाय के घी का दीपक जलाने और देवी देवताओं को पूरे धूमधाम से पूजा करनी चाहिए। इन्द्र और देवी लक्ष्मी का विशेष रूप से पूजा का दिन है। अबीर गुलाल, हल्दी, मेंहदी, कुमकुम, पुष्प, वस्त्र, फल, मिष्टान, मेवा आदि से भगवान की पूजा करनी चाहिए। शाम के समय देवी लक्ष्मी के पूजन का बेहतर समय है। लक्ष्मी के साथ-साथ कुवेर की भी पूजा करें।

कुबेर का मंत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये

धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय दापय स्वाहा।।

चंद्रमा को अर्घ्‍य देने का मंत्र

ॐ चं चंद्रमस्यै नम:, ॐ श्रां श्रीं

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम।

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम।

नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं।।

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