बिहार में अब महागठबंधन काे बनाए रखना राजद के लिए बड़ी चुनौती

Bihar Sharif News - बिहार में महागठबंधन को बनाए रखना राजद के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। हम सेक्युलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:56 AM IST
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बिहार में महागठबंधन को बनाए रखना राजद के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। हम सेक्युलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी के बाद महागठबंधन के घटक दल वीआईपी के नेता मुकेश सहनी ने भी अल्टीमेटम दिया है कि महागठबंधन में को-ऑर्डिनेशन कमेटी नहीं बनायी गई तो वह गठबंधन से बाहर हो जाएंगे।

बदलते ताजा राजनीतिक घटनाक्रम में रविवार को उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से मुलाकात की और मांझी की मांग को जायज ठहराते हुए को-आॅर्डिनेशन कमेटी जल्द बनाने की मांग की। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि जीतनराम मांझी अभी महागठबंधन में ही हैं। वीआईपी को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाने की मांग के मामले में जीतनराम मांझी के साथ हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा- को-ऑर्डिनेशन कमेटी नहीं बनने के कारण ही लोकसभा चुनाव में सीट तय करने में ही सारा समय निकल गया और महागठबंधन जीरो पर आउट हो गया।

मांझी बोले- हम चींटी के समान, पर चींटी हाथी को काट भी सकती है

जीतनराम मांझी ने रविवार काे कहा- महागठबंधन को महागठबंधन के रूप में रखना है, तो को-ऑर्डिनेशन कमेटी का गठन करना ही होगा। माना कि हम चींटी के समान हैं, लेकिन चींटी हाथी को काट भी सकती है। इसे समझने की आवश्यकता है। मांझी ने स्पष्ट कहा- को-आर्डिनेशन कमेटी में राजद, कांग्रेस, हम सेक्युलर, वीआईपी के साथ और पार्टियों के भी एक-एक सदस्य हों। फिर आपस में बैठकर हर बिंदुओं पर निर्णय हो। मुकेश साहनी और कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह से भी बात हो रही है। महागठबंधन में एक की बात अब नहीं चलेगी। यह भी कहा कि महागठबंधन की ओर से को-ऑर्डिनेशन कमेटी पर सहमति बनेगी तो पार्टी 13 नवंबर को होने वाली महागठबंधन के महाधरना में शामिल होगी।

रविवार को जीतनराम मांझी से मिलने पहुंचे वीआईपी के मुकेश सहनी।

जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी के साथ ही रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा और कांग्रेस नेता भी कई मौकों पर को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बात कर चुके हैं। बीते हफ्ते रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा ने राजद को किनारे कर वामदलों, कांग्रेस और वीआईपी के साथ संयुक्त प्रेस काॅन्फ्रेस कर 13 नवंबर को सभी जिलों में प्रदर्शन करने की घोषणा की। इससे पहले भी वह कई माैकाें पर कांग्रेस से अपनी नजदीकी का संकेत दे चुके हैं। उधर एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने यह कह महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी है कि हमारी पार्टी चीफ भी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को लेकर पॉजिटिव हैं। जीतनराम मांझी ने किशनगंज सीट पर उनकी पार्टी की जीत का स्वागत कर सकारात्मक संदेश दिया है।

तेजस्वी यादव को महागठबंधन को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। पर, इन सबसे इतर तीन हफ्ते बाद महज कुछ घंटों के लिए शनिवार को तेजस्वी जन्मदिन मनाने के लिए बिहार आए। उन्हाेंने यह कहकर मामले को और गरमा दिया कि महागठबंधन से मांझी जी का जाना उनका फैसला है। महागठबंधन में मांझी रहेंगे या नहीं, यह वही बता सकते हैं। महागठबंधन तोड़ने का फैसला उनका है। इस पर हम विशेष टिपण्णी नहीं करना चाहते हैं। हालांकि, बार-बार कुरेदने पर तेजस्वी ने मांझी को अपना गार्जियन भी बताया।

रालोसपा की कांग्रेस से बढ़ी नजदीकी

तेजस्वी को करनी होगी कड़ी मेहनत

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