पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बायो-फोर्टिफिकेशन से दूर हो जाएगा कुपोषण

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

सामान्य भोजन करने से अक्सर लोगों में सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे विटामिन व खनिज-लवण की कमी हो जाती है। इससे खासकर बच्चों में बेहतर शारीरिक व मानसिक विकास नहीं हो पाता है। जब आवश्यकता के अनुसार भोजन में पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं तो इसे छिपी भूख कहा जाता है। इसी के लिये बायो-फोर्टिफिकेशन (जैव सुदृढ़ीकरण) की वैज्ञानिक पद्धति से विभिन्न फसलों के बीज विकसित किये जा रहे हैं। इससे सामान्य आहार से भी जिंक, आयरन, कैल्सियम, विटामिन आदि की आवश्यकता पूरी की जा सकती है। वर्तमान में केंद्र परिसर में जिंक फोर्टिफाइड गेहूं की खेती की जा रही है। यह जानकारी केंद्र प्रभारी डॉ ब्रजेंदु कुमार ने दी।

भोजन में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी की वैकल्पिक व्यवस्था


मिट्टी वैज्ञानिक डा. उमेश नारायण उमेश ने बताया कि अभी तक हम चावल से कार्बोहाइड्रेट व दाल से प्रोटीन जैसे पोषक तत्व मिलने की बात जानते थे। पर, आने वाले दिनों में इसमें जिंक, आयरन, विटामिन जैसे पोषक तत्व भी मिले तो आश्चर्य नहीं होगा। भोजन में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को देखते हुये यह एक वैकल्पिक दृष्टिकोण है। इसमें फसल को उगाते समय ही सूक्ष्म पोषक तत्वों को पौधे से जोड़ दिया जाता है। इससे पौधों में मिट्टी से अधिक मात्रा में पोषक तत्वों के ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। इसे पारंपरिक या जेनेटिक इंजीनियरिंग भी कहते हैं। गृह वैज्ञानिक डॉ ज्योति सिन्हा ने कहा कि अभी तक आयोडाइज्ड नमक, कैल्शियम, जिंक, आयरन आदि युक्त विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ मार्केट में उपलब्ध है। वह भी बायो-फोर्टिफिकेशन का ही उदाहरण है।


ग्रामीण क्षेत्र में पोषक तत्वों की जानकारी का अभाव : बागवानी विशेषज्ञ डॉ विभा रानी ने कहा कि आज भी खासकर ग्रामीण परिवेश में पोषक तत्वों की जानकारी का अभाव है। इस वजह से खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों का सही पोषण नहीं हो पाता है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ संजीव रंजन बताते हैं कि यही वजह है कि पशुओं से प्राप्त खाद्य पदार्थ में भी उपयुक्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते। क्योंकि वे पशु को ही नहीं मिल पाते। इस वजह से पशु भी कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।
खबरें और भी हैं...