महादलितों के संघर्ष पर आधारित ‘कोट’ फिल्म की तुंगी में चल रही शूटिंग / महादलितों के संघर्ष पर आधारित ‘कोट’ फिल्म की तुंगी में चल रही शूटिंग

Bihar Sharif News - महादलितों के संघर्ष पर आधारित फिल्म कोट की तुंगी गांव में शूटिंग चल रही है। फिल्म के निर्माता कुमार अभिषेक ने कहा...

Nov 19, 2018, 02:40 AM IST
महादलितों के संघर्ष पर आधारित फिल्म कोट की तुंगी गांव में शूटिंग चल रही है। फिल्म के निर्माता कुमार अभिषेक ने कहा कि फिल्म के माध्यम से दलित- महादलित और कमजोर तबकों को संघर्ष करने की प्रेरणा दी जायेगी। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद महादलितों के जीवन में सुधार नहीं हो पा रहा। इसका मुख्य कारण संघर्ष की कमी है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह महादलित समाज का एक युवक एक कोट की चाहत में किस तरह संघर्ष पर परिवार और समाज का संघर्ष झेलते हुए बड़ा आदमी बन जाता है। उन्होंने कहा कि फिल्म में रियलिटी दिखाने के लिए कलाकार के साथ-साथ ड्रेस डिजाइनर तक ने दलित परिवार के बीच समय बिताया है। उन्होंने कहा कि कोई कुछ भी कहें, लेकिन आज भी धार्मिक स्थल पर दलित समाज से भेद भाव होता है। इसे सुनते थे, लेकिन यहां आकर महसूस किया।

चुनावी माहौल में हो सकता है बखेड़ा : निर्माता ने कहा कि चुनावी मौसम में दलित महादलित पर आधारित फिल्म बखेड़ा खड़ा कर सकती है, लेकिन फिल्म को राजनीति से दूर रखा गया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय होने के नाते दलित परिवार को काफी नजदीक से देखा है।

महादलितों पर आधारित कोट फिल्म के निर्देशक ने बयां की हकीकत

शूटिंग करते कलाकार।

40 प्रतिशत फिल्में बिहार पर आधारित लेकिन शूटिंग बाहर

फिल्म के मुख्य नायक के पिता की भूमिका निभा रहे मशहूर फिल्म व रंग मंच के अधिकार संजय मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में करीब 40 प्रतिशत फिल्में बिहारी जीवनशैली पर बनती है, लेकिन बिहार में इसकी शूटिंग नहीं होती। इसके लिए मानसिकता बदलनी होगी। हम बिहार में हुई घटनाओं और यहां की जीवनशैली पर फिल्म जरूर बनाते हैं, लेकिन दिल्ली और मुम्बई में ही झुग्गी झोपड़ी में बिहार का लोकेशन बना देते हैं। अगर रियल में बिहार में शूटिंग हो तो फिल्म में वास्तविकता दिखेगी। उन्होंने कहा कि फिल्म में कई बिहारी कलाकार शामिल हैं और प्रतिभा में मुम्बई के कलाकारों से किसी मायने में पीछे रहे।

कलाकारों को भा रहा लोकेशन : फिल्म के मुख्य कलाकार विवान शाह, पूजा पांडेय, दीपक सिंह, नवीन प्रकाश, रागिनी कश्यप, गगन गुप्ता आदि ने कहा कि रियल लोकेशन पर काम करना अच्छा लग रहा। नालंदा में शूटिंग के लिए बेहतर लोकेशन है।

दलित परिवार के साथ बिताया समय

ड्रेस डिजाइनर अंशु जायसवाल ने बताया कि दलित परिवार के साथ एक माह तक समय बीता कर उन्होंने कलाकारों के लिए ड्रेस तैयार किया है। इस दौरान उन्होंने जाना की दलित परिवार के लिए फैशन का महत्व नहीं, बल्कि शरीर को ढंकने की प्राथमिकता है। जीवन मे पैसे कम और जरूरत को ज्यादा महत्व देते हैं।

जुट रही भीड़ : शूटिंग देखने के लिए दिन भर लोगों के भीड़ जूट रहे, जिसके कारण परेशानी भी हो रही। लाख समझाने के बाद भी भीड़ नहीं हट रही थी। टेक के दौरान कोई न कोई कैमरे के फ्रेम से गुजर रहा था, जिसके कारण ओके होने वाला शॉट भी कट हो रहा था। निदेशक अक्षय सिंह ने बताया कि बिहार में भीड़ नियंत्रण की समस्या है। इसके अलावा बिहार सरकार द्वारा कोई अनुदान नहीं दिये जाने के कारण भी अच्छा लोकेशन होने के बाद भी फिल्म मेकर यहां नहीं आते।

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