वाणी सत्य करने के लिए श्रीराम को लेना पड़ा जन्म

Bihar Sharif News - शहर के मोगलकुंआ में आयोजित 9 दिवसीय श्री राम कथा के पांचवे दिन प्रभु श्री राम के मानव अवतार पर चर्चा हुई। प्रवचन के...

Nov 11, 2019, 06:55 AM IST
शहर के मोगलकुंआ में आयोजित 9 दिवसीय श्री राम कथा के पांचवे दिन प्रभु श्री राम के मानव अवतार पर चर्चा हुई। प्रवचन के दौरान बाल व्यास राजनंदनी जी ने कहा कि पृथ्वी पर जब-जब धर्म की हानी हुई है, संतो का अपमान हुआ है और गौर रक्षक जब भक्षक बना है तब-तब किसी न किसी रूप में भगवान धरा-धाम पर अवतरित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मन और शत्रुता की वाणी को सत्य करने के लिए प्रभु श्री राम ने भी अयोध्या में राजा दशरथ के घर अपने अंशो सहित मानव के रूप में जन्म लेकर राक्षसों का विनास करते हुए संतो और यज्ञों की रक्षा की थी। जब तक लोगों में प्रेम नहीं होगा भगवान उनका सहयोग नहीं करेंगे। बाल व्यास ने कहा कि हर युग में संकट को दूर करने के लिए भगवान किसी न किस रूप में अवतार लिए हैं। बाल व्यास राजनंदनी ने प्रवचन के दौरान कही कि भक्त के भाव से ही भगवान मिलते हैं। मगर भाव निस्वार्थ होना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति के प्रेम में स्वार्थ है तो लाख पूजा-अर्चना किजिए, भगवना सहायता नहीं करेंगे। इसलिए संतों के प्रवचन को अपने जीवन में उतार कर उसे सकारात्मक रूप में उपयोग करें, तभी मानव जीवन का कल्याण होगा।

लोगों में दिखा धर्म के प्रति आस्था| उन्होंने राम जन्म भूमि पर कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर बोली कि देश के नागरिकों में धर्म के प्रति आस्था दिखी है। कहीं से भी किसी धर्म के लोगों ने कोर्ट के इस फैसले का विरोध नहीं किया और देश में शांतिपूर्ण माहौल कायम रहा। अगर इसी प्रकार सभी धर्म और आस्था को समझने लगे तो समाज में शांति आएगी।

मोगलकुआं में आयोजजित श्रीराम कथा सुनतीं महिलाएं।

सिटी रिपोर्टर | बिहारशरीफ

शहर के मोगलकुंआ में आयोजित 9 दिवसीय श्री राम कथा के पांचवे दिन प्रभु श्री राम के मानव अवतार पर चर्चा हुई। प्रवचन के दौरान बाल व्यास राजनंदनी जी ने कहा कि पृथ्वी पर जब-जब धर्म की हानी हुई है, संतो का अपमान हुआ है और गौर रक्षक जब भक्षक बना है तब-तब किसी न किसी रूप में भगवान धरा-धाम पर अवतरित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मन और शत्रुता की वाणी को सत्य करने के लिए प्रभु श्री राम ने भी अयोध्या में राजा दशरथ के घर अपने अंशो सहित मानव के रूप में जन्म लेकर राक्षसों का विनास करते हुए संतो और यज्ञों की रक्षा की थी। जब तक लोगों में प्रेम नहीं होगा भगवान उनका सहयोग नहीं करेंगे। बाल व्यास ने कहा कि हर युग में संकट को दूर करने के लिए भगवान किसी न किस रूप में अवतार लिए हैं। बाल व्यास राजनंदनी ने प्रवचन के दौरान कही कि भक्त के भाव से ही भगवान मिलते हैं। मगर भाव निस्वार्थ होना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति के प्रेम में स्वार्थ है तो लाख पूजा-अर्चना किजिए, भगवना सहायता नहीं करेंगे। इसलिए संतों के प्रवचन को अपने जीवन में उतार कर उसे सकारात्मक रूप में उपयोग करें, तभी मानव जीवन का कल्याण होगा।

लोगों में दिखा धर्म के प्रति आस्था| उन्होंने राम जन्म भूमि पर कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर बोली कि देश के नागरिकों में धर्म के प्रति आस्था दिखी है। कहीं से भी किसी धर्म के लोगों ने कोर्ट के इस फैसले का विरोध नहीं किया और देश में शांतिपूर्ण माहौल कायम रहा। अगर इसी प्रकार सभी धर्म और आस्था को समझने लगे तो समाज में शांति आएगी।

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