पेट भरना पाेषण नहीं, संतुलित अाहार है जरूरी
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में पोषण जागरुकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर डीपीओ रश्मि सिन्हा ने कहा कि महिला विकास समाज और देश दोनों के विकास का सूचक है। आज लड़का व लड़की में कोई अंतर नहीं है। जिसमें क्षमता होगी वह अच्छा प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि यदि मां सुपोषित नहीं होगी तो बच्चा कमजोर होगा। उसके बाद का बच्चा और कमजोर होगा। उन्होंने बताया कि 21 मार्च को केंद्र में राज्य स्तरीय पोषण मेला लगेगा। जिसमें पूरे राज्य से महिलाएं जुटेंगी।
राजनीति में महिलाओं की बढ़ी है भागीदारी
बीडीओ रवि कुमार ने कहा कि देश की आजादी व उसके बाद महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ी है। पर, सामाजिक व आर्थिक भागीदारी में अभी बहुत कुछ करना बाकी है। सही पोषण, देश रौशन व अपनी क्यारी, अपनी थाली का नारा देते हुये महिलाओं को कहा कि जरुरत है यह नारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। पहले कृषि का उद्देश्य कितना उपजाना था। पर, अब कैसे उपजाना है हो गया है।
मोटे अनाज संतुलित आहार का मुख्य स्रोत
सीओ अखिलेश चौधरी ने कहा कि सिर्फ पेट भरना पोषण नहीं है। बल्कि, संतुलित आहार जरूरी है। इसके लिये ग्रामीण स्तर पर जागरुकता जरूरी है। सीडीपीओ जया मिश्रा ने माता व नवजात के पहले हजार दिन पर फोकस किया। कहा कि मोटे अनाज ही संतुलित आहार का मुख्य स्रोत है। उन्होंने डायरिया से बचाव को संतुलित आहार की जरूरत बताई। उन्होंने मशरुम के नियमित आहार में शामिल करने की सलाह दी। बताया कि इसके लिये बाल विकास परियोजना व कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से चुने गये आंगनबाड़ी केंद्रों में मशरूम उत्पादन कर पोषण अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र प्रभारी डा. ब्रजेंदु कुमार ने कहा कि वर्तमान में भोजन बनाने की लंबी प्रक्रिया से अधिकांश पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं । गोष्ठी का संचालन गृह वैज्ञानिक डा. ज्योति सिन्हा और धन्यवाद ज्ञापन डा. उमेश नारायण उमेश ने किया।