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जिले में 21 महीने में ही मिले लावारिस 16 नवजात

एक वर्ष पहले
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जिले में नवजात शिशु को लावारिस रूप से फेंकने की घटना बढ़ती जा रही है। पिछले 21 महीनों में ही 16 नवजात को फेंका गया है। सबसे दुखद बात है कि इन बच्चों को झाड़ियों में फेंका गया है। ठंड सहित अन्य कारणों से इनमें से तीन की मौत हो गई है। वहीं अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद शेल्टर होम भेजा गया है। दूसरी तरफ 72 वैसे बच्चें जो किसी कारण से घर छोड़कर या किसी कारणवश अपने परिजनों से बिछड़ गये थे, जिले में बरामद हुये है। उन्हें उनके घर पहुंचाया गया है। जिले के 56 बच्चें जो घर छोड़कर भागे थे। उन्हें वापस लाया गया है। इसमें चाइल्ड लाइन पे अहम भूमिका अदा की है। इस आशय की जानकारी चाइल्ड लाइन के सचिव हरी सिंह ने दी।

इलाज के बाद आरा शेल्टर होम भेजे जाते हैं नवजात


उन्होंने बताया कि सबसे अधिक दु:ख तब होता है जब कोई मां अपने कलेजे के टुकड़े को वीरान जगह या झाड़ियों के बीच रात में उन्हें उनके हाल पर छोड़कर निकल लेती है। एक या दो घंटा रोने के बाद जब कोई उनकी आवाज सुनता है। तब इसकी जानकारी पुलिस को देता है। पुलिस चाइल्ड लाइन की मदद से नवजात को इलाज के लिए ले जाती है। नवजातों को सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू में करीब एक सप्ताह तक इलाज के लिए रखा जाता है। कई बार जब डाॅक्टर बाहर की दवार्इयां लिखते है। तब यह दवा भी उपलब्ध कराया जाता है। ताकि इलाज बेहतर तरीके से हो सके। इसके बाद उन्हें आरा स्थित शेल्टर होम भेजा जाता है। जहां उनकी परवरिश होती है।


14 अभिभावकों ने मांगी मदद

चाइल्ड लाइन की काउंसलर डिम्पल कुमारी ने बताया कि कई भटके हुए ऐसे बच्चे होते है। जो पहले अपने परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं देते है। परंतु बाद में वह घर का पता बताते है। तब उन्हें परिजनों से मिलाया जाता है। पिछले 21 महीनों ने 14 अभिभावक है। जिन्होंने चाइल्ड लाइन से अपने बच्चों को खोजने में मदद मांगी है। इस तरह के बच्चों की जानकारी पूरे भारत में चले रहे चाइल्ड लाइन के पोर्टल पर अपलोड कर दी जाती है। ताकि सूचना मिलते ही तत्काल उसके बाद में जानकारी मिल जाये। बच्चों को बरामद कर लिया जाये।

कृष्णाब्रह्म में मिली नवजात की फाइल फोटो
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