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जिले में ‌62 लाख खर्च कर लगाए जाएंगे सौ नए हैंडपंप

एक वर्ष पहले
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जिले में बढ़ रही पेयजल समस्या से निपटने को लेकर पीएचईडी ने कमर कस लिया है। इसे लेकर सूबे की सरकार काफी गंभीर है। तभी तो बीते 2 मार्च को पीएचईडी विभाग के अभियंता प्रमुख दया शंकर मिश्र ने जिले में सौ हैंडपंपों के लिए 62 लाख छह हजार रुपये जारी किया है। इस रुपये से चापाकल दुरुस्त करने के कार्य भी किये जायेंगे। कर्मचारी भी इस कार्य योजना को सफलीभूत करने में जुट गए हैं। विदित हो बीते कुछ वर्षों में ये देखने को मिला है कि पेयजल की समस्या मई व जून माह में विकराल रूप धरण कर लेती है। इसका निदान निकालने की पूरी योजना सरकार द्वारा बना ली गई है। योजना के फिलवक्त दस सदस्यीय गैंग मैन का एक दल बनाया गया है। जिसके जिम्मे खराब पड़े चापानलों को दुरूस्त करना है। साथ ही प्रखंडों व पंचायतों से पानी की स्थिति का आकलन मंगवाया जा रहा है। ताकि क्रम विधि से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र से कम प्रभावित क्षेत्रों के क्रम में कार्य प्रारंभ किया जा सके।

डीएम के समक्ष उठायी थी हैंडपंप खराबी की समस्या


योजनाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में तत्कालीन डीएम से डुमरांव प्रखंड प्रमुख द्वारा सवाल उठाया गया कि प्रखंड के 80 फीसदी हैंडपंप खराब पड़े है। जिसके बाद डीएम ने वही पीएचईडी के एग्जीक्यूटिव को फटकार लगाते हुए तुंरत चालू करने को कहा गया था।

जलस्तर नीचे जा रहा, सूख रहे हैंडपंप


पिछले साल कम बारिश होने से व भीषण गर्मी के कारण क्षेत्र में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इसकी वजह से प्राकृतिक जल स्रोत कुआं, तालाब भी सूख गए हैं। जिले में करीब 3500 हैंडपंप लगाए गए हैं। इसमें आधे से ज्यादा हैंडपंपों में पानी नीचे चला गया है या पूरी तरह से बंद हो गए है। जिन हैंडपंपों में पानी निकल रहा है उसमें भी धार पतला होने लगा है। जलस्तर नीचे जाने से यात्रियों को खूब परेशानियां हो रही हैं। विभाग का कहना है कि जिले में सरकारी हैंडपंपों में आयी खराबी को समय-समय पर दुरुस्त कराया जाता है। फिलहाल विभागीय स्तर से हैंडपंपों की गड़बड़ी दुरुस्त करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आवंटन के अभाव में कुछ विलम्ब हुआ है। मिल रही शिकायतों का समाधान किया जा रहा है।


6 माह में पूरी करनी है कार्य योजना

जिले में इस राशि का उपयोग वैसे चापाकलों के लिए करना है, जो विभाग स्तर पर पर ऐसे हैं जो या तो बहुत पुराने हैं या खराब हो चुका है। छह माह के भीतर ऐसे चापानलों की जगह दूसरे चापाकल बनाये जाने हैं। वहीं आवश्यकता के अनुसार अन्य जगहों पर इस योजना का उपयोग किया जाना है। फिलहाल विभाग द्वारा मात्र सौ कार्य योजना को अमल में लाने के लिए राशि जारी किया है। राज्य में भूजल स्तर में गिरावट के कारण बंद हो रहे साधारण चापानलों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है।

सरकारी हैंडपंप।
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