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गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच जरूरी

एक वर्ष पहले
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पोषण का सन्देश घर घर तक पहुंचाने के लिए जिले में पोषण पखवाड़ा अभियान के तहत सभी प्रखंडों के आंगनबाड़ी सेविकाओं व आशाओं के द्वारा गृह भ्रमण किया जा रहा है। इस दौरान जिले के सभी 11 प्रखंड के टोला-मुहल्ले का भ्रमण कर गर्भवती महिलाओं को एएनसी जांच, स्तनपान,पूरक आहार की जानकारी दी जा रही है। गृह भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं को बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान चार प्रसव पूर्व जांच एवं टिटनेस का टीका सुरक्षित प्रसव के लिए जरूरी होता है। समय पर प्रसव पूर्व जांच नहीं होने एवं बेहतर पोषण के आभाव के कारण गर्भवती महिलाओं में खून की कमी आ जाती है। गर्भावस्था के दौरान पोषण की कमी से महिला की शारीरिक स्थिति कमजोर हो जाती है। इसके कारण पैदा होने वाला बच्चा कमजोर होता है तथा कुपोषण का शिकार हो सकता है। ऐसी स्थिति न पैदा हो इसके लिए गर्भवती महिला को बेहतर देखभाल की जानकारी दी गयी तथा पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी गयी।

180 गोलियां जरूर लेनी चाहिए : सिविल सर्जन डॉ. उषा किरण वर्मा ने बताया गर्भावस्था के तीसरे महीने के बाद महिला को आयरन की गोली का सेवन करना चाहिए। इसके लिए उन्हें निशुल्क 180 आयरन की टेबलेट दी जाती है। प्रसव के बाद ही नवजात को बेहतर देखभाल की जरूरत होती है। जिसमें बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत एवं छह माह तक केवल स्तनपान बेहद जरूरी माना जाता है। कंगारू मदर केयर एवं निमोनिया प्रबंधन मुख्य रूप से नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है।


पोषण पखवाड़ा में आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं आशाओं के नियमित गृह भ्रमण पर ज़ोर दिया जा रहा है। गृह भ्रमण के दौरान शिशुओं के बेहतर पोषण के साथ गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाले खतरे, संस्थागत प्रसव व परिवार नियोजन के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही शिशुओं के बेहतर पोषण के लिए शिशु जन्म के शुरुआती एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत एवं छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना है। - शशिकांत पासवान, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, आईसीडीसीएस, बक्सर

आखिरी दिनों में पोषण का रखें ख्याल: भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी सेविका द्वारा गर्भवती महिलाओं को बताया गया कि आखिरी महीने में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इस दौरान आहार में प्रोटीन विटामिन कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ वसा की भी मात्रा होना जरूरी होता है। इसके लिए समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को साप्ताहिक पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है। इसके साथ महिलाएं अपने घर में आसानी से उपलब्ध भोज्य पदार्थों के सेवन से भी अपने पोषण का ख्याल आसानी से रख सकती है।
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