बैंक भी छोटे किसानों को ऋण देने में करते हैं आनाकानी

Buxar News - खेती की लागत में लगातार बढ़ोत्तरी से छोटे किसान काफी परेशानी है। मानसून ने इस बार भी धोखा दिया है। जिससे खेती की...

Oct 13, 2019, 07:25 AM IST
खेती की लागत में लगातार बढ़ोत्तरी से छोटे किसान काफी परेशानी है। मानसून ने इस बार भी धोखा दिया है। जिससे खेती की लागत कई गुना बढ़ गयी है। लागत में कटौती और अच्छी फसल की आशा में बहुत सारे किसान साहूकारों से कर्ज न लेकर बैंकों से ऋण लेकर रबी, खरीफ, दलहनी व तेलहनी फसल सहित सब्जी की खेती के अलावा अन्य प्रकार की नगदी खेती करना चाहते है। लेकिन इन छोटे किसानों के सामने नियम कानून बाधा बनकर खड़ी हो जाती है। बैंक अधिकारियों का मानना है कि बहुत किसान परिवारों ने पूर्वजों की खेती का बंटवारा उनके पुत्रों एवं संबंधियों में बटवारा होने से ऋण स्वीकृत करने में भूमि प्रावधान आड़े आता है। बैंक भी नियम कायदे में जकड़े हुए है। बीएओ कृष्ण मोहन चौधरी का कहना है कि प्रखंड मुख्यालय में हर साल भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक आॅफ बड़ौदा सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों का शिविर का आयोजित कर किसानों को ऋण उपलब्ध कराने का भरपूर प्रयास करते हैं। परन्तु इन शिविरों में छोटे किसान पात्रता व मापदंड पर खारा न उतरने के कारण मायूस हो जाते है। छोटे किसान चिंतित है कि उनके खेतों से प्रयाप्त आय नहीं होती है। जिन किसानों के पास अधिक जमीन है। उनका उत्पादन लागत कम पड़ता है एवं बैंक भी उन्हें ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में रूचि लेती है। किसान सच्चिदानंद सिंह, मार्कंडेय यादव, अरबिंद सिंह का कहना है कि एक तो समय पर नहर में पानी नहीं आने से किसानों को डीजल के सहारे रोपे गये धान को बचाने के लिए काफी मकसद करनी पड़ती है। इस साल गनीमत रहा कि हथिया नक्षत्र ने धान की खेती को संभाल लिया। खेती के लागत बढ़ने से छोटे किसान अब खेती करने से मुंह फेरने लगे है। बीडीओ प्रमोद कुमार ने बताया कि बैंक ऑटोनोमस बाॅडी है। ये कृषि विभाग के नियंत्रण में नहीं है। कृषि के नाम पर खेती करने वाले किसानों को बैक के न्यूनतम आवश्यकता को हर हाल में पूरा करना जरूरी है।

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