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जुलूस-ए-मोहम्मदी में शामिल बच्चे, बूढ़े व नौजवानों ने दिया शांति व अमन का पैगाम, धूमधाम से मनायी ईद मिलादुन्नबी

Buxar News - इस्लामधर्म के संस्थापक पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब की जयंती पर रविवार को जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। शहर में...

Nov 11, 2019, 07:00 AM IST
इस्लामधर्म के संस्थापक पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब की जयंती पर रविवार को जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। शहर में मस्जिदों, मजारों और मुस्लिम घरों, मोहल्लों को रंगबिरंगी फुलझड़ियों, सतरंगी रोशनी से सजाया गया है। घरों में इस्लामिक परचम लहरा रहे हैं। जिले में शनिवार की शाम से चारों ओर चहल-पहल रही। मुस्लिम समाज के लोग पूरी रात यादें रसूल में गुजारी। इसके बाद फजर की नमाज (भोर के वक्त की नमाज) पढ़कर फातिहा वगैरह किया जाता है। क्योंकि दोनों जहान के आका हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल सुबह सादिक के समय ही पैदा हुए थे। इसलिये सुबह रैली का आयोजन किया जाता है। जुलूस में बाजा-गाजा और झंडा-पताका के साथ सरकार की आमद मरहब्बा, नारे तदबीर आदि नारा लगाते सैकड़ों मुस्लिम धर्मावलंबी शामिल हुए। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता ने कहा कि इस्लाम धर्म, त्याग और प्रेम का संगम है। जुलूस नई बाजार, कोईरपुरवा, खलासी मोहल्ला, नालबंद टोली, दर्जी मोहल्ले आदि स्थानों से शुरू होकर किला मैदान स्थित दरिया शहीद बाबा के मजार पर पहुंची। जहां फातेहा ख्वानी के बाद जुलूस समाप्त हुआ। जुलूस को लेकर जिला अनुमंडल समेत सभी प्रखंडों में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किया गया था। चौक-चौराहों पर मजिस्ट्रेट, पुलिस व होमगार्ड जवानों को तैनात किया गया था।

आकर्षण का केंद्र रही बच्चों की प्रभातफेरी व झांकी

एक ओर जहां युवा जुलूस के माध्यम से अमन व शांति का पैगाम दिया। वहीं, इस दिन जुलूस में आकर्षण का केंद्र सजाई गईं झांकियां व बच्चों की प्रभातफेरी रही। दर्जी मोहल्ले के युवाओं के द्वारा बनाई झांकी खुबसुरत रही। युवाओं ने चार पहिया वाहन पर वारिस पाक, रुवीजा गरीब नवाज, मरुद्म अशरफ, साबिर पिया, निजामुद्दीन औलिया व आला हजरत के मजार के गुंबद बनाया गया था। इसके अलावा विभिन्न मदरसा कमेटियों के द्वारा झांकी निकाली गई। वहीं, खलासी मुहल्ले के मदिना मस्जिद के बैनर तले छोटे-छोटे बच्चों ने प्रभातफेरी निकाली। जिसमें बच्चों के गालों पर तिरंगा बनाया गया था और उन्होंने अपने हांथों में देश का झंडा लिया था। जो भारत की एकता व अखंडता के प्रतिक को प्रदर्शित कर रहा था। वहीं, मस्जिद के इमाम हाफिज अताउर्रहमान ने कहा है कि इस मौके पर सभी इज्जताें एहतराम से शामिल हों और नबी के सुन्नतों का पालन करें। लब पर दुरूद और नबी के नात गुनगुनाते चलें। साल की तरह इस साल भी ईद मिलादुन्नबी बहुत ही अकीदत और जोश खरोश के साथ मनाई जा रही है।

ईद मिलादुन्नबी पर याद किए गए पैगंबर साहब, कड़ी सुरक्षा के बीच नारों से गूंजा डुमरांव

सिटी रिपोर्टर | डुमरांव

हजरत मोहम्मद साहब के जन्म दिवस पर अनुमंडल मुख्यालय समेत विभिन्न प्रखंडों व ग्रामीण क्षेत्र में मिलात-उन-नवी के मौके पर जुलूस-ए-मुहम्मदी का आयोजन किया गया। इस दौरान गाजे-बाजे के साथ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने झड़ा लहराते हुए मुहम्मद पैगम्बर साहब के नारे भी लगा रहे थे। मस्जिदों व विभिन्न मार्गों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था तथा सड़कों की सफाई भी की गयी थी। विधि-व्यवस्था को बनाये रखने के लिए पुलिस प्रशासन सक्रिय था। पैगम्बर एक सलाम हजरत मुहम्मद साहब के जन्म दिन ईद मिलादुन्नबी डुमरांव समेत विभिन्न प्रखंडों में मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान जुलूस-ए-मुहम्मदी निकाल कर मुहम्मद साहब के वसूलों पर चलने, मानवता की सेवा में जीवन व्यतीत करने, सच्चाई के पथ से कभी विचलित नहीं होने, खुदा के हुक्म पर चलने व इबादत में जीवन गुजारने का संकल्प लिया गया।

जुलूस में शामिल मौलाना व अन्य।

ठठेरी बाजार मोड | जुलूस में शामिल लोग

डुमरांव | लोगों तक अल्लाह का संदेश पहुंचाने के लिए धरती पर आए थे पैगंबर मोहम्मद साहब

शाही जामा मस्जिद तकिया मोहल्ला के मौलाना फरमान अली व टाटा नगर जमशेदपुर से मुख्य अतिथि पर पहुंचे मौलाना मुश्ताख अहमद ने जुलूस के बाद कहा कि हजरत मोहम्मद साहब का जन्म मक्का (सऊदी अरब) में हुआ था। उनके वालिद साहब का नाम अबदुल्ला बिन अब्दुल मुतलिब था और वालेदा का नाम आमेना था। उनके पिता का स्वर्गवास उनके जन्म के दो माह बाद हो गया था। उनका लालन-पालन उनके चाचा अबू तालिब ने किया। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब को अल्लाह ने एक अवतार के रूप में पृथ्वी पर भेजा था, क्योंकि उस समय अरब के लोगों के हालात बहुत खराब हो गए थे। ऐसे माहौल में मोहम्मद साहब ने जन्म लेकर लोगों को अल्लाह का संदेश दिया। वे बचपन से ही अल्लाह की इबादत में लीन रहते थे। वे कई-कई दिनों तक मक्का की एक पहाड़ी पर, जिसे अबलुन नूर कहते हैं, इबादत किया करते थे। चालीस वर्ष की अवस्था में उन्हें अल्लाह की ओर से संदेश प्राप्त हुआ। अल्लाह ने फरमाया- ये सब संसार सूर्य, चांद, सितारे मैंने पैदा किए हैं। मुझे हमेशा याद करो। मैं केवल एक हूं। मेरा कोई मानी-सानी नहीं है। लोगों को समझाओ। हजरत मोहम्मद साहब ने ऐसा करने का अल्लाह को वचन दिया।

या अली या हुसैन के नारों से गुंजा चौगाई पंचायत

चौगाई| पैगम्बर मुहम्मद साहब का जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन भोला मिया ने किया तथा अध्यक्षता मोहम्मद रजा ने किया। अपने संबोधन मे मुहम्मद मुख्तार ने कहा कि आज बारहवां रबी-उल-शरीफ है, आज ही के दिन हमारे पैगम्बर का जन्म हुआ था। इनका 571 ईस्वी पूर्व हुआ था। इन्हें अल्लाह ने लोगो तक पैगाम पहुंचाने के लिए भेजा था। अल्लाह ने अपने पैगाम को पहुंचाने के लिए मुहम्मद साहब को भेजा। इसके बाद विधिवत यहां के लोगो द्वारा एक दूल्हे की तरह मारुति गाड़ी को सजाया गया। इसके बाद इस गाड़ी के ऊपर मुहम्मद साहब का प्रतीक चिन्ह के रूप में गाड़ी के ऊपर लगाया गया था। इन लोगो का जुलूस चौगाई गांव से होते हुए विठ्ठल बाबा, हलवाई टोला होते हुए पूरे गांव का भ्रमण करवाया गया। इस जुलूस के कार्यक्रम मे दर्जनों बच्चो ने भी भाग लिया। बीच बीच में एक ठेला पर इनके द्वारा मुहम्मद साहब के जन्मदिन पर मिठाई का वितरण सभी को किया जा रहा था। हर धर्म के लोगो पैगम्बर साहब के जन्मदिन का प्रसाद खिलाया जा रहा था। इस मौके पर भोला मिया, आजाद मिया, शौकत अली, मुहम्मद मुख्तार, कमालुद्दीन सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

रैली में शामिल मुखिया, प्रमुख तथा जन प्रतिनिधि ।

पैगम्बर मोहम्मद साहब के जयंती के अवसर पर बन्नी में निकाला गया जुलूस

बन्नी में जुलूस में शामिल लोग।

सिटी रिपोर्टर|धनसोई

पैगम्बर मोहम्मद साहब के जन्मदिन के अवसर पर बन्नी में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा जुलूस निकाली गयी। इस दौरान बन्नी स्थित मस्जिद से बन्नी बाजार होते हुए पुनः मस्जिद पर ही जुलूस समाप्त हुआ। इस दौरान मो. ताज ने बताया कि जुलूस की तैयारी दो दिनों पूर्व से ही की जा रही थी। मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ अन्य समुदाय के द्वारा भी इस जुलूस में भरपुर सहयोग दिया गया। सैकड़ों की संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सौहार्दपूर्ण तरीके से भाईचारे के साथ मनाया गया। सभी मुस्लिम समुदाय के द्वारा भी बारावफात का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। जिसमें लोगों द्वारा मीठी चावल बनाया गया। जबकि शाम को मिलाद का कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। दूसरी ओर धनसोई बाजार जलालपुर में छोटी मस्जिद तथा बडी मस्जिद में नमाज अदा की गयी। काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज अदा की गयी। वहीं एक दूसरे से गले भी मिले। लोगों ने भाईचारे के साथ त्योहार मनाया।

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