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कोरोना नहीं शिक्षकों की हड़ताल को कमजोर करने के लिए सीएम ने कराया स्कूलों को बंद : शिक्षक संघ
शुक्रवार को राज्य सरकार द्वारा कोरोना वायरस के संभावित खतरें को देखते हुए 31 मार्च तक स्कूल काॅलेजों को बंद करने की घोषणा को नियोजित शिक्षकों ने उनके हड़ताल को कमजोर करने की साजिश बताया है। नियोजित शिक्षकों ने कहा कि सरकार शिक्षकों की चट्टानी एकता से भयभीत हो चुकी है। चारो ओर से मिल रहे दबाव व शिक्षकों के हड़ताल पर डटे रहने से सरकार ने घबड़ाकर यह कदम उठाया है। शिक्षक नेता उपेंद्र पाठक ने कहा कि इसके पहले जब 2015 में नियोजित शिक्षकों ने हड़ताल किया था तब राज्य सरकार हिट वेव का बहाना बना समय से पहले गर्मी की छुट्टी कर दी थी। इस बार सरकार ने कोरोना वायरस को हथियार बनाया है। उपेंद्र ने कहा कि सिर्फ स्कूलों में ही अधिक भीड़ इकट्ठा नहीं होती है। बल्कि रेलवे स्टेशन, मंदिर सहित सभी सार्वजनिक स्थलों पर हर दिन हजारों की भीड़ इकट्ठा रहती है। वही शिक्षक नेता पूर्णानंद मिश्र ने कहा कि शिक्षकों के हड़ताल से पिछले 25 दिनों से राज्य के अधिकांश स्कूलों में छात्र आ ही नहीं रहे है तो फिर स्कूलों को बंद करने का निर्देश देना सरकार के नियति पर सवाल खड़ा कर रहा है। शिक्षकों ने कहा कि शनिवार को पटना में संघर्ष समिति के नेताओं की बैठक में आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
शिक्षकों को मिला कांग्रेस नेता का समर्थन
शुक्रवार को हड़ताल पर डटे शिक्षकों को वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रो बलिराज ठाकुर का समर्थन मिला। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आश्चर्य है कि राज्य के करोड़ों बच्चों की वार्षिक परीक्षा सिर पर है उनके पाठ्यक्रम अभी तक पूरे नही हुए है फिर भी सरकार द्वारा अभी तक हड़ताल समाप्त कराने की दिशा में कोई पहल नही की गई है। इससे यह साबित होता है कि इस सरकार का दलितों पिछड़ों एवं गरीबो के बच्चों पर कोई ध्यान नही है। उन्होंने कहा कि मैं शिक्षकों के मांगो के समर्थन में राज्य सरकार से मांग करता हूूं कि शिक्षक संगठनों से वार्ता करके मांग पूरा करें।
छब्बीसवें दिन भी जारी रहा हड़ताल
नियोजित शिक्षकों का हड़ताल छब्बीसवें दिन भी जारी रहा। सभा की अध्यक्षता संजय सिंह व संचालन पूर्णानंद मिश्र तथा कमलेश पाठक ने किया। वक्ताओं ने समान काम का समान वेतन देने, सेवा शर्त लागू करने समेत अन्य मांगों की पूर्ति तक हड़ताल जारी रखने का संकल्प दोहराया एवं कहा कि कार्यरत अवधि का वेतन भुगतान नही होने को सरकार की तानाशाही रवैया करार देते हुए कहा कि इससे शिक्षकों का हौसला कम होनेवाला नही है।
धरना पर बैठे नियोजित शिक्षक।