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मिट्टी काटे बिना उमरपुर में किया था गंगा कटाव रोधी कार्य, बह गए बोरे
विभागीय अधिकारी ग्रामीणों की शिकायत पर नहीं ले रहे नोटिस, डीएम से कार्रवाई की मांग
बक्सर प्रखंड के मझरियां व उमरपुर के बीच गरिमा कंस्ट्रक्शन के द्वारा कराए जा गए गंगा कटाव निरोधक कार्य में मार्च लूट की छूट का नतीजा सामने आ गया है। इस योजना में सरकारी पैसे की बर्बादी खुलेआम देखी जा सकती है। दो वर्ष पूर्व करीब छह करोड़ की लागत से हुए कटाव रोधी कार्य में अनियमितता का आलम यह है कि सभी बोरे ध्वस्त होकर गंगा में समाहित हो गए हैं। कार्य की गुणवत्ता में कमी की शिकायतों के बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं होती है। विभाग के सहायक अभियंता ने बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल से कार्य की गुणवत्ता में हीलाहवाली की शिकायतें की थी। लेकिन, ठेकेदारों की मनमानी पर कार्रवाई नहीं की गई। जिसका नतीजा हुआ कि अब फिर से कटाव का खतरा बढ़ने लगा है। उमरपुर वार्ड नम्बर एक पश्चिमी छोर गंगा कटाव निरोधक मुख्य एंकर एक पश्चिमी भाग और पूर्वी एंकर टू के क्षतिग्रस्त होने को लेकर जय प्रकाश यादव समेत ग्रामवासियों ने डीएम से लिखित गुहार लगायी है। उन्होंने यहां की समस्याओं को रखते हुये कटाव निरोधक एंकर का मरम्मत कराने की मांग की है। ताकि आने वाले दिनों में बाढ़ की संकट से बचा जा सके।
बोरों के बीच गैप रहने की मिली थी जानकारी, नहीं हुई कार्रवाई
सहायक अभियंता उपेंद्र नाथ राय ने बताया कि उन्होंने कटावरोधी कार्यों का लगातार निरीक्षण किया था। निरीक्षण के क्रम में बोरे में कम बालू भरने व दो बोरों के बीच गैप रहने की जानकारी मिली थी। जिसकी लिखित शिकायत उन्होंने प्रमंडल के अधिकारियों से की थी। इसके बावजूद ठेकेदार की मनमानी जारी रही। सहायक अभियंता ने भी स्वीकार किया कि स्लोपिंग के कार्य में गड़बड़ी हुई थी। प्रावधान के मुताबिक 40 किलो से अधिक वजन का सफेद बालू से भरा बोरा प्रत्येक कैरेट में 40 बोरे से कटाव निरोधक का काम किया जाना था परंतु विरले ही ऐसी कोई बोल्डर होगी जिसका वजन 20 किलो से अधिक का होगा।
मिट्टी काटे बगैर ही बोल्डर बिछाने का हुआ कार्य
अभियंताओं की मानें तो अधिक वजन का बोल्डर रहने से जमीन को मजबूती से पकड़ता है और कटाव होने की संभावना काफी कम हो जाती है। लेकिन, मार्च क्लोजिंग के कारण आनन-फानन में कराए जा रहे कार्य की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया गया। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके अलावे गंगा के तट पर मिट्टी काटे बगैर ही बोल्डर बिछाने का काम किया गया है। नियमानुसार, गंगा तट पर चार फीट तथा 100 फीट की दूरी तक मिट्टी काटकर बोल्डर स्लोपिंग का काम करना था। लेकिन, मात्र 8-10 फीट ही मिट्टी काटकर बोल्डर का काम किया गया।
पूर्व में भी इसी जगह हुआ था कटाव रोधी कार्य : ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जिस स्थान पर कटाव निरोधक का काम चल रहा है वहां पर पूर्व में भी कटाव निरोधक का काम हो चुका है जिसका बोल्डर काफी मात्रा में गंगा तट पर गिरा पड़ा है और काफी संख्या में इन्हीं बोल्डरों का उपयोग वर्तमान के कटाव निरोधक कार्य में किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि गुणवत्ता से भटके ऐसे कटाव निरोधक काम से कटाव रूक सकेगी। यह असंभव है। इसलिए ग्रामीणों ने गुणवत्ता पूर्ण कार्य कराने की मांग की है। इस संबंध में सहायक अभियंता नीलांबर ठाकुर का कहना है कि यह सच है कि प्राक्कलन के अनुसार गंगा तट से 100 फीट तक मिट्टी काटकर ही बोल्डर पीचिंग का काम करना था पर स्थानीय लोगों द्वारा अपनी जमीन नहीं देने के कारण ऐसे ही काम कराया गया था।
उमरपुर में हुए कटाव का फाइल फोटो।
गंगा में ध्वस्त हुआ कटाव रोधी कार्य।