बक्सर में पत्रकारिता का रहा है स्वर्णिम इतिहास

4 वर्ष पहले
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बक्सर | आजादी के पूर्व या बाद बक्सर जिले में जो भी आंदोलन हुए इन सभी का मुखर आवाज पत्रकारिता बना। पत्रकारिता के माध्यम से कई आंदोलन सफल परिणाम तक पहुंचा। जिले के पत्रकारों ने कड़े तेवर के माध्यम से कई भ्रष्टचार को उजागर किया। सरकार व प्रशासन की नींद उड़ाई। बक्सर की ही पत्रकारिता का परिणाम रहा कि बिहार को अपना राजनीतिक अस्तित्व मिल पाया। इसकी शुरुआत डुमरांव अनुमंडल के अंतर्गत मुरार गांव निवासी विद्वान विधिवेत्ता डा सच्चिदानंद सिन्हा ने शुरू की। पटना से प्रकाशित दैनिक सर्चलाइट के माध्यम से बिहार के अस्तित्व की मांग रखी। आंदोलन को आगे बढ़ाया। जिसकी परिणति हुई कि 22 मार्च 1912 को कलकत्ता और उड़ीसा से अलग करते हुए बिहार राज्य गठित हुआ। सर्च लाईट के माध्यम से ही डा सच्चिदानंद सिन्हा ने बक्सर में न्यायालय के गठन की मांग उठाई थी। 17 मई 1912 को बक्सर में कोर्ट स्थापित हो पाया। जिले के इटाढ़ी प्रखंड क्षेत्र स्थित उनवांस गांव निवासी आचार्य शिवपूजन सहाय ने उत्साहवर्धक पत्रकारिता की। आजादी के पूर्व सरकार ने समाचार पत्रों पर सेंसर लगा दिया। परंतु यहां के पत्रकारों ने प्रतिरोधाें के बावजूद विद्रोही स्वर को दबने नहीं दिया। वर्ष 1913-14 में मास्टर जयप्रकाश लाल ने बगसर समाचार पत्र प्रकाशित कर आमलोगों तक अंग्रेजी दमन की बात को पहुंचाया। आजादी के बाद पंडित नंद किशोर तिवारी, नर्वदेश्वर सहाय, प्राचार्य विश्वनाथ सिंह, पंडित मंगलाचरण उपाध्याय, डा सिद्धनाथ कुमार, रजनीकांत शास्त्री, फागू राय विशारद, डा कमला प्रसाद मिश्रा, अखौरी रामानुग्रह नारायण सिन्हा, बद्री सिंह बागी, रामेश्वर प्रसाद वर्मा, अखौरी सुरेश प्रसाद, प्रो विजयानंद तिवारी, शिवजी पाठक ने पत्रकारिता को एक नई ऊंचाई प्रदान की। फागू राय विशारद ने कृषक (सप्ताहिक), बद्री सिंह बागी ने बागी (सप्ताहिक) रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने निष्पक्ष (पाक्षिक), शिवजी पाठक ने बाबा टाईस, प्रो विजयानंद तिवारी ने जगरम का प्रकाशन किया। प्रस्तुति : रामेश्वर प्रसाद वर्मा, वरीय अधिवक्ता

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