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होली पर नहीं हुआ हुड़दंग, रंग-गुलाल और अबीर के साथ लोगों ने मनाई होली, गीतों पर झूमे युवा

एक वर्ष पहले
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जिले में मंगलवार को “रंगों का त्योहार’’ होली बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर शहर, नुक्कड़ और गली में ‘’बुरा न मानो होली है’’ की गूंज सुनाई देती रही। सभी लोग टोलियां बनाकर सड़कों पर रंग लेकर एक दूसरे को रंगते नजर आते हैं। इसके साथ ही ढोल की धुनों और तेज संगीत पर नाचते लोग अपने तरीके से ही होली का जश्न मनाते नजर आए। होली पर क्या बच्चे और जवान सभी एक ही रंग में नजर आ रहे थे। भारतीय संस्कृति की विरासत में त्योहारों और उत्सवों का हमेशा से ही काफी महत्व रहा है। भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खासियत है कि जिले में मनाया जाने वाला हर त्योहार समाज में मानवीय और सद्गुणों को स्थापित कर लोगों में प्रेम, एकता और सद्भावना को बढ़ाता है।

145 स्थानों पर तैनात रहे मजिस्ट्रेट व पुलिस जवान


बक्सर| शांतिपूर्ण व सौहार्द के साथ होली मनाने को लेकर जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतेजाम किए थे। इसके लिए जिला मुख्यालय में नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। जहां 18 अधिकारियों को तैनात किया गया। वहीं जिले के चिह्नित स्थानों पर 145 दंडाधिकारी व पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया है। डॉक्टर, फायर ब्रिगेड व दंगा रोधक दस्ते को तैनात रखा गया था। ताकि किसी भी विकट परिस्थिति से तुरंत निपट जा सके। सभी प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया था कि यदि कहीं पर विवाद होता है, तब दोनों समुदाय के लोगों को बीच सहमति कराते हुए विवाद का निपटारा किया जाये। जिला मुख्यालय में बने नियंत्रण कक्ष में तीन शिफ्ट के लिए 18 मजिस्ट्रेट नियुक्त थे। वहीं बक्सर थाना क्षेत्र में 16, औद्योगिक में 09, मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में 10, इटाढ़ी में 17, धनसोई में 07, राजपुर में 18, डुमरांव में 12, नया भोजपुर में 07, कोरान सराय में 03, नावानगर में 06, ब्रह्मपुर में 07 सहित अन्य थानाें में दंडाधिकारी नियुक्त किये गये थे।


होलिका के राख से एक-दूसरे को लगाया तिलक


होली की पूर्व संख्या को शहर समेत अन्य प्रखंडों में होलिका जलाने की परंपरा है। लोग होलिका दहन के समय लकड़ियों से बनाई गई होलिका के आस पास इकट्ठा हुए। देरशाम होलिका की आग में गेहूं व चने की बालें भूनकर खाया। ग्रामीण इलाकों में युवक अपने-अपने गांव की सीमा के बाहर मशाल जलाकर रास्ता रोशन किया। मान्यता है कि ऐसा करने से वे अपने गांव से दुर्भाग्य और संकटों को दूर भगाते हैं। होलिका के जलते ही ग्रामीण इलाकों में लोक-पारंपरिक गीतों के साथ गांव बुजुर्गों ने ताल ठोकी। एक से बढ़कर एक भोजपुरी के लोकधुनों के साथ होली के गीत गाए गए। उसके बाद होलिका की राख से एक-दूसरे को तिलक लगाया और होली की बधाई दी।

कहीं खुशी, तो कहीं गम का रहा माहौल

होली खुशी व उमंग का पर्व है। लेकिन, होली के दिन कहीं खुशी, तो कहीं गम का माहौल रहा। जिले में कई स्थानों पर दुर्घटनाओं, झगड़ों व फसादों की सूचनाएं आती रहीं। इसके कारण उक्त क्षेत्रों में होली का रंग फीका रहा। वहीं, सड़क दुर्घटनाओं की भी संख्या अधिक रही। होली की खुमारी में पिछले दो दिनों में लगभग दर्जनभर सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा पिछले एक माह के अंदर जिले में कई लोगों की हत्याएं भी हुईं।

रामरेखा घाट के समीप कुर्ता फाड़ होली खेलते युवक।

आदर्श गोशाला के पास होलिका दहन करते लोग।
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