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भारत दर्शन के लिए मदुरै से ब्रह्मपुर पहुंचे रामभक्तों ने बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर में किया जलाभिषेक
रामायण सर्किट ट्रेन से भारत दर्शन यात्रा के 400 दक्षिण भारतीय श्रद्धालु शुक्रवार को रघुनाथपुर पहुंचे। बक्सर के दार्शनिक स्थलों का दौरा करने के बाद दर्शनार्थियों का जत्था रेल मार्ग से शाम 7 बजे के करीब रघुनाथपुर पहुंचा। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर केंद्रीय स्वास्थ्य कल्याण राज्यमंत्री व स्थानीय सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने दर्शनार्थियों का स्वागत किया। इस दौरान रेलवे स्टेशन पर भाजपा नेता सतेंद्र कुंवर, संतोष रंजन राय, अजय उपाध्याय, मनीष भारद्वाज, सोनू दुबे, सोनू चतुर्वेदी, बबलू ओझा, संतोष मिश्रा, दुधेश्वर ओझा एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर एवं माला पहनाकर स्वागत किया। प्रशासनिक स्तर पर एसडीएम हरेंद्र राम एवं एसडीपीओ केके सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल एवं प्रशासन के लोग विधि व्यवस्था में लगे रहे। श्रद्धालुओं के स्वागत में स्टेशन पर यह कार्यक्रम 45 मिनट तक चला। तत्पश्चात श्रद्धालुओं के जत्था को प्रशासन के द्वारा दर्शन को बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए 15 बसों का इंतजाम किया गया था। जिससे दर्शनार्थी रेलवे स्टेशन से मंदिर परिसर पहुंचे।
बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर का ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व बताया; ब्रह्मा ने अपने हाथों से की थी स्थापना
ब्रह्मपुर | बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर प्रबंधन के अध्यक्ष शिव गोपाल पाण्डेय व उपाध्यक्ष डमरू पाण्डेय ने श्रद्धालुओं को बताया कि शिवलिंग आपरूपी माना गया है। जिसकी व्याख्या शास्त्रों व इतिहास में दर्ज है। मान्यता के अनुसार ब्रह्माजी ने स्वंय यहां पर भगवान भोले नाथ की पूजा अर्चना की थी जिससे भोले नाथ प्रसन्न हो प्रगट हुए थे। उसके बाद ब्रह्माजी ने गांव का निर्माण किया इसलिए इसका नाम ब्रह्मपुर है। मुगलकाल के मध्य में जब मंदिर तोड़ी जा रही थी। उसी दौरान जौनपुर का सुबेदार कासिम अली खां बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर पहुंचा। परन्तु बाबा के प्रभाव के बारे में मंदिर के पुजारियों ने बताया कि तो कासिम ने 24 घंटे का समय दिया कि अगर मंदिर का दरवाजा पुरब से पश्चिम हो जायेगा तो छोड़ देंगे। उसने मंदिर के चारों तरफ सेना का कड़ा पहरा भी लगा दिया था। लेकिन सुबह में उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि रातों-रात मंदिर का गेट पश्चिम दिशा में हो गया था। इसके बाद कासिम इसे बाबा का चमत्कार मान छोड़ कर चला गया। वास्तुशास्त्र के अनुसार मंदिर का मुख्य गेट पश्चिम की तरफ नहीं होता है। परन्तु ब्रह्मपुर शिवमंदिर का मुख्य दरवाजा आज भी पश्चिम दिशा में ही है। बाबा ब्रहमेश्वरनाथ मंदिर में यूपी-बिहार के विभिन्न हिस्सों से जलाभिषेक करने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं। आधी रात से मंदिर के प्रवेश द्वार दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाते है। श्रद्धालु ब्रह्म सरोवर में स्नान कर बाबा को जल चढ़ाते हैं।
पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया : मन्दिर पूजा समिति के अध्यक्ष मोहन लाल पांडेय,गंगा समग्र के बिहार प्रान्त सह संयोजक शम्भूनाथ पांडेय, उमलेश पांडेय, अक्षय गोपाल पांडेय, पप्पू पांडेय, विनोद पांडेय, शिवगोपाल पांडेय, डमरू पांडेय सहित शंभू पांडेय के स्कूल की छात्राओं द्वारा स्वागत गीत एवं पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।स्वागत से अभिभूत श्रद्धालुओं ने ब्रह्मपुर वासियाें की भूरी भूरी प्रशंसा की। ब्रह्मेश्वर नाथ के दर्शन के बाद सभी तीर्थयात्री बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ की भव्य आरती में शामिल हुए। मौसम खराब रहने के बावजूद भी हजारों लोग भव्य आरती में शामिल हुए। आरती में गंगा आरती ट्रस्ट बक्सर के पुजारी व ब्रह्मपुर के पुजारियों द्वारा आरती कराई गयी।
मंदिर में दर्शन करते दक्षिण भारतीय श्रद्धालु।
इस पहल से मिलेगी पर्यटन के रूप में पहचान
एसडीएम हरेंद्र राम ने बताया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई समस्या न हो इसके लिए सभी तैयारियां की गयी थीं। एसडीएम ने बताया कि पांच मार्च को दक्षिण भारत के मदुरै (तामिलनाडु) से रवाना हुई थी जो 13 मार्च को बक्सर स्टेशन सुबह पहुंची। पुरे दिन शहर के कई प्रभु राम से जुड़े स्थानों का दर्शन किये। तत्पश्चात, श्रद्धालु यहां से रघुनाथपुर पहुंचे। फिर हाजीपुर मुजफ्फरपुर होते हुए सीतामढ़ी ट्रेन पहुंचेगी जहां श्रद्धालु प्रभु श्रीराम से जुड़ी स्मृतियों का अवलोकन करेंगे। एसडीएम ने बताया कि इस पहल से पर्यटन स्थल के रूप में एक अलग अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। पर्यटकों की दिलचस्पी भी इन दोनों स्थानों पर तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
मन्दिर में पूजा करते स्वास्थ्य राज्य मंत्री अस्विनी चौबे।
आरती करते पुजारी।