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शरद पूर्णिमा आज, लक्ष्मी की पूजा करने से मनुष्य के जीवन में आती है सुख-शांति

Buxar News - शारदीय नवरात्र के साथ हिन्दू धर्म में त्यौहारों का दौर शुरू हो जाता है। नवरात्रि के कुछ दिन बाद ही शरद पूर्णिमा...

Oct 13, 2019, 07:05 AM IST
शारदीय नवरात्र के साथ हिन्दू धर्म में त्यौहारों का दौर शुरू हो जाता है। नवरात्रि के कुछ दिन बाद ही शरद पूर्णिमा आता है। इस पर्व का विशेष महत्व है। कहते हैं कि इस दिन आकाश से अमृत की वर्षा होती है। जिस कारण खीर बनाकर उसे रात में खुले में रखने को कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों के जानकार पंडित प्रभंजन भारद्वाज ने कहा कि इस दिन मां लक्ष्मी भी इस रात में जागने वालों को विशेष फल देती हैं। यही वो दिन है जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर धरती पर अमृत की वर्षा करता है। श्री हरि विष्णु के अवतार भगवान श्रीकृष्‍ण ने 16 कलाओं के साथ जन्‍म लिया था। भगवान राम के पास 12 कलाएं थीं। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा का विधान है। साथ ही रात को खुले में रखे खीर 12 बजे के बाद उसका प्रसाद ग्रहण किया जाता है। ऐसी मान्‍यता है कि इस खीर में अमृत होता है और यह कई रोगों को दूर करने की शक्ति रखती है। उन्होंने बताया कि इस बार शरद पूर्णिमा की वेला 13 अक्टूबर की रात 12 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 14 अक्टूबर की दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक है।

शरद पूर्णिमा पर इन चार देव व एक देवी की होती है पूजा

शहर के प्रकांड विद्वान पंडित मुक्तेश्वर नाथ शास्त्री ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी, चंद्र देव, भगवान शिव, कुबेर और कृष्ण की आराधना करने का शुभ पर्व है। चंद्र की शुभ किरणें जब रात में रखे खीर पर पड़ती है तो वह अमृत हो जाता है और दिव्य लक्ष्मी के साथ सारे देवताओं का शुभ आशीर्वाद मिलेगा। इस तिथी को रात में की गई चंद्र पूजन और आराधना से साल भर के लिए लक्ष्मी और कुबेर की कृपा प्राप्ति होती है। इसके अलावा मनोबल में वृद्धि, स्मरण शक्ति में बढ़ोतरी, अस्थमा से छुटकारा, ग्रह बाधा से निवारण, घर से दरिद्रता भगाने जैसी समस्याओं का समाधान होता है।

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