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सर्व सफाई का नहीं हुआ टेंडर, एक ही एजेंसी के भरोसे चल रही है शहर की सफाई व्यवस्था

एक वर्ष पहले
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नगर परिषद कागजों में स्वच्छ बक्सर, सूंदर बक्सर में तब्दील हो गया। लेकिन, होली जैसे पर्व में भी यहां की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। नगर की मुख्य सड़कों पर दिन में देर तक कचरे का अंबार लगा रहता है। सड़कों पर सरेआम फेंके कुंड़े से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। सफाई व्यवस्था बिल्कुल यहां नगण्य की स्थिति में है। विदित हो कि शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा दो एनजीओ के हवाले था। जाे कि नगर परिषद के अंतर्गत डोर टू डोर कचरे उठाव के अलग व सर्व सफाई के लिए अलग व्यवस्था। समय से सफाई में लापरवाही बरतने के कारण बीते साल के छठ बाद डीएम के आदेश पर सभी सफाई का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। इसकी जिम्मेवारी भी डोर टू डोर कचरे की उठाव करने वाली एजेंसी को दे दी गयी। तीन माह के करीब से शहर की सफाई व्यवस्था एक एजेंसी के हाथ में जाने से दोनों ही तरह के कचरे का उठाव काफी प्रभावित हुआ है।

मुहल्लों में संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा


शहर को बेशक स्मार्ट बनाने की कवायद चल रही है। लेकिन, नगर परिषद की लचर व्यवस्था के कारण शहर की गलियां कूड़ों से व खाली पड़े प्लाॅट नाली के गंदे पानी बजबजा रहा है। कई जगहों पर वर्षों से पानी जमा पड़ा है। वहां गर्मी में भी पानी सुखता नहीं है। इसका ताजा उदाहरण नगर का शिवपुरी, वनसप्ती नगर, नयाबाजार के पीछे बसे मलीन बस्तियां इसके ताजा उदाहरण हैं। नियमित साफ-सफाई नहीं होने के कारण मोहल्लों के लोग संक्रामक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद नगर प्रशासन अपनी व्यवस्था में सुधार नहीं ला रहा है। वहीं इधर गर्मी के दस्तक के साथ ही नगर में मच्छरों का प्रकोप भी चरम पर है। ना ही कहीं ब्लीचिंग पाउडर का छीड़काव किया जा रहा और न ही फॉगिंग कार्य।


फायदा पहुंचाने के लिए अटका रहे रोड़ा


शहर के आम लोगों की राय मानें तो यह सब खेल है। केवल व्यक्तिगत रूप से एक एजेंसी को फायदा पहुंचाने की उद्देश्य से टैंडर कैंसिल कराया गया। ऐसा नहीं है तो फिर नये टेंडर कराने में कौन रोड़ा अटका रहा है। यह भी अपने आप में एक सवाल है। कार्य का भार ज्यादा होने से सड़कों की स्थिति नारकीय बनी हुई है। सफाई के लिए तीन माह की समयावधि एक एनजीओ के हाथ में देना ही सवाल खड़ा करता है।


इस माह हो जायेगा टेंडर : इधर नगर कार्यपालक सुजित कुमार की मानें तो कहना है कि तीन माह के करीब सर्व सफाई का टेंडर कैंसिल हुए हो गया। टेंडर प्रक्रियाधीन है। इस माह में टेंडर करा दिया जायेगा।

गाद से भर चुकी हैं नालियां, नहीं हो रही उड़ाही

आनंद चिकित्सालय मार्ग पर जल-जमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। बड़े नालों का समूचित सफाई नहीं होने के कारण उसमें उपर तक गाद भर गया है। इससे छोटे नालों का पानी नहीं निकलना स्वाभाविक है। वहीं सड़कों के इर्द गिर्द दिन में देर तक कूड़े के ढेर लगा रहता है। शहर की अधिकांश नालियां गाद से पटी हुई हैं।

शहर की गलियां कूड़ों से व खाली पड़े प्लाॅट नाली के गंदे पानी से बजबजा रहा पर देखने वाला कोई नहीं

शहर में पड़ा कचरा।

दिन में करीब 9 बजे शहर में कचरा के उठाव करते मजदूर।
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