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बक्सर में राम आगमन का मुख्य उद्देश्य ताड़का का वध व माता अहिल्या को श्राप मुक्त करना

Buxar News - डुमरांव बिहारी जी के मंदिर में अायाेजित संगीतमय रामकथा के तीसरे दिन भक्तों रामधुन में गोता लगाया। वहीं डुमरांव...

Oct 13, 2019, 07:25 AM IST
डुमरांव बिहारी जी के मंदिर में अायाेजित संगीतमय रामकथा के तीसरे दिन भक्तों रामधुन में गोता लगाया। वहीं डुमरांव की धरती को भक्तिमय बना दिया है। सात दिवसीय रामकथा के शनिवार को रामचरित मानस के बालकाण्ड में वर्णित प्रभु श्री राम के नामाकरण एवं उनके जन्म उद्देश्य की चर्चा मानस के विद्वान परमपूज्य आचार्य श्री नरहरि दास जी महाराज के द्वारा की गई। असूराें के आंतक को समाप्त करना और धर्म की ध्वजा को समृद्ध करना और सदाचार की सीख ही श्रीरामचंद्र जी के जीवन का सार था। जगत पिता परमेश्वर ने श्रीराम रूप में अवतार ग्रहण करते जगत के प्राणीयाें का कल्याण किया। विश्वामित्र ऋषी की तपोस्थली बक्सर की चर्चा करते हुए आचार्य ने कहा कि इस धरती पर प्रभु श्रीराम पधारने का ही मुख्य उद्देश्य था, प्रथम राक्षसी तड़का का वध और दूसरा माता अहिल्या को शापमुक्त करना। मानस चर्चा के क्रम में आचार्य नरहरि दास ने कहा कि कर्म और कृपा में खास अंतर है। कर्म की सीमा है, लेकिन कृपा असीमित है। जिस पर प्रभु की कृपा हो जाती है वह धन्य हो जाता है।

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