सोनपुर मेले में आर्टिस्ट अशोक ने जल-वन के संरक्षण पर बनाया सैंड आर्ट

Chhapra News - सारण का एकलौता सैंड आर्टिस्ट अशोक ने एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम दर्ज कराया है। अशोक ने विश्व...

Nov 11, 2019, 07:06 AM IST
सारण का एकलौता सैंड आर्टिस्ट अशोक ने एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम दर्ज कराया है। अशोक ने विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला में जिला प्रशासन के आदेश पर जल व वन के संरक्षण पर एक खूबसूरत सैंड आर्ट तैयार की है। जिसकी सभी लोग सराहना कर रहे है। देश व विदेशों से जुट रहे लोगों ने भी सराहना की है। वहां देखने के लिए मेलार्थियों की भीड़ जुटने लगी है। यहां बता दें कि सोनपुर मेला में पहली बार सैंड आर्ट बनाया गया है। इसमें पहला सेलेक्शन सारण से अशोक का किया गया है। मेला में बनाया गया आर्ट हरियाली को दर्शा रहा है। जिसमें भगवान गणेश की आकृति को बहुत ही खूबसूरती उकेरा गया है। पहाड़ से निकलता जल,कटे हुए पेड़ में एक छोटा सा पेड़ घड़ियाल को बहुत ही सुन्दर आकृति दे रही है। कलाकार अशोक कुमार के साथ पवन कुमार ,प्रकाश कुमार ,रवि कुमार, संजीत कुमार शामिल है।

छठ घाट पर प्लास्टिक न फेंकने को लेकर बनाया था सैंड आर्ट

अशोक ने इस बार छठ में सीढ़ी घाट पर एक सैंड आर्ट बनाया था। जिसमें मां गंगा को मैली होने से बचाने की अपील की थी। उसमें दिखाया गया था कि किस तरह एक मछली गंगा किनारे आने वाले लोगों द्वारा फेंके गए प्लास्टिक की बोतल को खाकर बीमार पड़ गई है। और वह धीरे-धीरे मर रही है। इसी तरह कछुआ भी तड़प रहा है जबकि गंगा मां बेबस और लाचार होकर अपने जलीय जीव जंतुओं को मरते हुए देख रही है।

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सोनपुर मेले में बनाई गई सैंड आर्ट, मेले से संबंधित अन्य खबरें पेज 15 पर देखें।

मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं सराहना

इसके पूर्व भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय को लेकर अशोक का सैंड आर्ट काफी फेमस हुआ था। जिसकी मुख्यमंत्री ने भी सराहना की थी। इस बार अशोक ने सीढ़ी घाट और सुनार पट्टी घाट पर अपना सैंड आर्ट बनाया है । जिसके जरिए पर गंगा को साफ और स्वच्छ बनाने की अपील कर रहे हैं। लोग अशोक के इस प्रयास काफी सराहना कर रहे हैं।

अब तक 300 लोगों को तैराकी से बचा चुके हैं जान

अशोक एक न केवल कलाकार है बल्कि सारण में एकमात्र मास्टर ट्रेनर तैराक भी है। जिसने अब तक करीब 300 डूबते लोगों की जान बचाई है। वह बचपन से ही तैराकी सीखा है। उसके बाद से नदी किनारे डूब रहे लोगों को बचाने का काम शुरु कर दिया। अब तक करीब 150 लोगों को तैराकी मुफ्त में सिखाई और 300 से अधिक लोगों की जान भी बचाई है।

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