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सात दिनों में 10% ही कॉपी जांच, अफसरों का टेंशन बढ़ा

एक वर्ष पहले
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इंटर की कॉपी की जांच कराने में सफल हुए जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग का टेंशन मैट्रिक कॉपी जांच ने बढ़ा दी है। इसका सबसे बड़ा कारण है परीक्षकों का योगदान नहीं करना। अभी तक महज 24 फीसदी परीक्षकों ने ही योगदान किया है। इस वजह से मात्र 10% कॉपी ही जांच हो पायी है। इस तरह अभी तक 37425 कॉपी की जांच हो पायी है। शिक्षा विभाग के अधिकारी परीक्षकों को योगदान कराने के लिए लगभग सभी तरकीब अपना चुके हैं, पर शिक्षक हैं जो कि डिगने को तैयार नहीं हैं।

चार लाख कॉपी जांच का लक्ष्य: मैट्रिक मूल्यांकन के लिए आठ मूल्यांकन केन्द्र बनाए गए हैं। इन मूल्यांकन केन्द्रों को कुल 400098 कॉपी जांच करने के लिए दिया गया है। यानि इसी लक्ष्य को प्राप्त करना है। पर अभी तक सात दिनों में मात्र दस फीसदी के आस-पास ही कॉपी जांच हो पायी है। यदि प्रतिदिन की औसत कॉपी जांच पर नजर डाले तो प्रतिदिन आठों केन्द्रों पर पांच हजार की कॉपी जांच हो पा रही है। केन्द्रवार औसत पर ध्यान दें तो 1000 से भी कम कॉपी की जांच एक केन्द्र कर पा रहा है।अभी 362544 कॉपियों की जांच की जानी है।

रिजल्ट में होगी देरी: यदि कॉपी जांच की यही स्थिति रही तो मैट्रिक परीक्षार्थियों के रिजल्ट में काफी देरी होगी। जब रिजल्ट में देरी होगी तो इनका नामांकन भी सही समय पर नहीं हो पाएगा। सीबीएसई का रिजल्ट पहले आ जाएगा तो अच्छे कॉलेजों में इंटर के सीट भी भर जाएंगे। यानि परीक्षार्थियों को कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी। कॉपी जांच में 503 एमपीपी की जरूरत है।

परेशानी नहीं होगी, इंटर वाले परीक्षक लगाए जाएंगे

मैट्रिक कॉपी जांच में कोई परेशानी नहीं होगी। इंटरमीडिएट से परीक्षक रिलीव होते ही मैट्रिक मूल्यांकन केन्द्रों पर योगदान करेंगे। फिर सब सामान्य हो जाएगा।
अजय कुमार सिंह, डीईओ, सारण
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