निगम ठोस कचरा निष्पादन के लिए जमीन देने में फर्जीवाड़ा, भू-माफिया ने डाला टेंडर

Chhapra News - छपरा नगर निगम को ठोस कचरा अपशिष्ट प्रणाली के लिए जमीन देने के नाम पर फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है। गनीमत यह है कि अब...

Bhaskar News Network

Sep 16, 2019, 07:15 AM IST
Chhapra News - corporation fraud in giving land for solid waste execution land mafia tenders
छपरा नगर निगम को ठोस कचरा अपशिष्ट प्रणाली के लिए जमीन देने के नाम पर फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ है। गनीमत यह है कि अब तक नगर निगम ने उस जमीन को खरीदा नहीं है। खरीदे जाने वाली जमीन की रकम करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक है। इस फर्जीवाड़ा में किसी भू-माफिया गिरोह के होने की अंदेशा है। हालांकि इसके बारे में अभी न तो अंचलाधिकारी पता लगा सके है न ही निगम के अधिकारी। यह मामला जमीन के भौतिक सत्यापन के क्रम उजागर हुआ है। इसके बाद अंचल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार छपरा नगर निगम ने ठोस कचरा अपशिष्ट प्रणाली को विकसित करने के लिए छपरा शहर से 15 किमी के अंदर लगभग 10 एकड़ जमीन क्रय करने के लिए एक निविदा पिछले जनवरी माह में निकाली थी। इसी निविदा में जलालपुर अंचल के मंगोलापुर गांव के एक व्यक्ति ने अपनी जमीन दिखाते हुए निविदा भी डाल दिया। टेंडर डालने के समय जमीन के कागजात, अद्दतन राजस्व रसीद, भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र सहित अन्य आवश्यक कागजात भी लगाए गए थे। छपरा नगर निगम को जमीन की भी आवश्यकता थी। नगर निगम ने जमीन के एमवीआर के आधार पर जमीन क्रय करने से पहले जलालपुर अंचल प्रशासन को जमीन का भौतिक सत्यापन करने के लिए पूरा कागजात अंचल कार्यालय जलालपुर को सौंप दिया। सीओ ने जब जांच शुरू की तो जमीन मालिक को बुलाया गया। जमीन मालिक कागजात देखने के बाद भौचक्क रह गया। जमीन तो मेरा है। मैंने कहीं भी जमीन बेचने का टेंडर नहीं डाला है। इसके बाद सीओ धनंजय कुमार ने जमीन मालिक से कागजात के साथ शपथ पत्र दाखिल करने को कहा। जमीन मालिक ने शनिवार को शपथ पत्र भी सीओ कार्यालय को जमा कर दिया है।

जमीन मालिक ने कहा- हमने न कभी टेंडर डाला और न ही जमीन बेचने की इच्छा

नगर निगम के अधिकारी

फर्जीवाड़ा ऐसे हुआ उजागर

जिस जमीन के लिए टेंडर डाला गया था। वह जमीन मंगोलापुर गांव के पशुपतिनाथ तिवारी की बताई गई है। यह जमीन कोपा रोड में खोरोडीह गांव के थोड़ा पहले ही ठीक सड़क के किनारे स्थित हैं। जमीन का टेंडर इन्हीं के नाम पर किसी जालसाज ने डाल दिया था। जमीन के भौतिक सत्यापन के क्रम में सीओ ने राजस्व कर्मचारी सत्येंद्र राय से जब रिपोर्ट मांगी तो स्थिति बिल्कुल उलट थी। आनन-फानन में जमीन मालिक को अंचल कार्यालय बुलाया गया। सीओ ने उनसे सारी बातें शपथ पत्र के माध्यम से देने को कही। जमीन मालिक ने भी शपथ पत्र दायर कर दिया कि मैंने किसी प्रकार की जमीन बिक्री के लिए टेंडर नहीं डाला है।

ठोस कचरा अपशिष्ट प्रणाली के लिए जमीन खरीदी जानी थी

छपरा नगर निगम पूरे शहर के कचरे को डंपिंग करने तथा ठोस कचरा अपशिष्ट प्रणाली प्रतिस्थापन करने के लिए जनवरी 2019 में जमीन खरीदने के लिए टेंडर निकाला था। जमीन शहर से 15 किमी के रेडियेशन में 10 एकड़ चाहिए थी। इसी के लिए जमीन का चयन भी कर लिया गया था।

सीओ पर अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का बन था दबाव

इस मामले में उस जमीन का अनापत्ति प्रमाण पत्र जल्द देने का दबाव एक जालसाज मोबाइल पर बना रहा था। सीओ ने उस जालसाज को बताया कि राजस्व कर्मचारी से रिपोर्ट मांगी गई है।उसके बाद ही अनुशंसा भेजी जाएगी।

नगर निगम

जांच से करोड़ों का बन-बनाया खेल बिगड़ा | अंचल कार्यालय के जांच के बाद जालसाजों के बने-बनाए खेल पर पानी फिर गया। सवाल उठता है कि अगर भुगतान हो जाता तो उसके बाद क्या होता। एमवीआर दर पर जमीन की कीमत करोड़ों में हो जा रही हैं।



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