नि:शुल्क मधुमेह जांच शिविर 200 से अधिक मरीजों की हुई जांच

Chhapra News - विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर रविवार को श्यामचक स्थित संजीवनी नर्सिंग होम एवं मेटरनिटी सेंटर में सात दिवसीय...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:06 AM IST
Chhapra News - free diabetes screening camp more than 200 patients examined
विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर रविवार को श्यामचक स्थित संजीवनी नर्सिंग होम एवं मेटरनिटी सेंटर में सात दिवसीय नि:शुल्क मधुमेह जांच शिविर एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शिविर में मधुमेह के मरीजों की जांच की गई। जिसमें 200 मरीजों के बीपी, ब्लड सुगर की निःशुल्क जांच की गई। जांच का शुभारंभ डॉ. अनिल कुमार ने करते हुए कहा कि इस तरह के निशुल्क जांच शिविर लगाए जाने चाहिए, जिससे गरीब मरीजों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सकेगा। मधुमेह से बचाव के लिए सजग रहने की जरूरत है। खान-पान के साथ जीवन शैली में बदलाव लाया जाना आवश्यक माना गया है। व्यस्तता के कारण ससमय नाश्ता-भोजन की उपेक्षा, धूम्रपान, उचित खान-पान के साथ नियमित रूप से व्यायाम की उपेक्षा से बचते हुए समय-समय पर मधुमेह संबंधी जांच कराया जाना जरूरी होगा। मौके पर डाॅ. संजू प्रसाद, चार्टर्ड एकाउंटेंट तरूण कुमार, अधिवक्ता अभय कुमार यादव, स्वास्थ्यकर्मी मुन्नी देवी, श्वेता सिंह, रिता देवी, गुड्डी कुमारी, अमृता कुमारी, चिंटू कुमार, उमेश कुमार राय, शैलेश कुमार, लक्ष्मण यादव, जुही कुमारी, माया देवी, शिव कुमारी, संजय कुमार, पप्पू शेखर, अजीत कुमार आदि ने भाग लिया ।

मधुमेह से होने वाले नुकसान व बचाव के उपायों पर चर्चा

संजीवनी नर्सिंग होम एवं मेटरनिटी सेंटर में तत्वाधान में आयोजित संगोष्ठी में मधुमेह से होने वाले नुकसान व बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मधुमेह रोग एक ऐसी बीमारी है जो एक बार जिसे हो गई तो वह कभी जड़ से खत्म नहीं होती। इसे सिर्फ दवाओं, योग व दिनचर्या में परिवर्तन कर नियंत्रित किया जा सकता है। शुगर होने के बाद इंसुलिन की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है। इस पर नियंत्रण न करने पर तमाम तरह की परेशानी होती है। इससे बचने के लिए भोर में चार बजे से आठ बजे के बीच 20 से 30 मिनट टहलने की आदत हम सभी को डालनी होगी। टहलने से शुगर के साथ ही बीपी भी नियंत्रित रहता है। इसके अलावा अपनी दिनचर्या व खान पान में भी बदलाव लाना जरूरी है। आज हम मेहनत का काम काफी कर करते है। दिन भर कुर्सी पर बैठे रहते है। जिसके चलते ही यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। कुर्सी पर बैठ कर काम करने वालों को हर आधे घंटे पर एक-दो मिनट के लिए ही सही उठ कर टहल जरूर लेना चाहिए। शुगर होने पर आदमी चिड़चिड़ा हो जाता है और अवसाद से ग्रस्त हो जाता है। पूर्वांचल विकास आंदोलन के प्रवीण सिंह ने कहा कि हमारी जीवन शैली ही इस रोग को बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है। इसलिए हमें अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाना होगा। डाॅ. संजू प्रसाद ने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि मिठाई देख कर ही डर लगने लगा है। सबसे बड़ी विडंबना तो, यह है कि यदि कोई व्यक्ति डायबिटीज नहीं है तो, लोग अचरज में पड़ जाते हैं। बच्चों में शुगर का कारण फिजिकल एक्टीविटीज का स्कूलों में न कराया जाना है। पढ़ाई के साथ ही खेलकूद अत्यंत जरूरी है।

नि:शुल्क मधुमेह जांच शिविर में मौजूद लोग।

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