नि:स्वार्थ भाव से भक्ति करने वालों का भगवान हमेशा कल्याण करते हैं : साध्वी पंछी देवी

Chhapra News - परिस्थिति वस जो संत बने हैं वह दूसरों का कल्याण नहीं कर सकते, बल्कि समर्पण के भाव से जो संत बने है वही दूसरों का...

Oct 22, 2019, 07:06 AM IST
परिस्थिति वस जो संत बने हैं वह दूसरों का कल्याण नहीं कर सकते, बल्कि समर्पण के भाव से जो संत बने है वही दूसरों का कल्याण करते हैं। यह बातें रिविलगंज के इनई स्थित श्री मनोकामना सिद्धि पूर्ण हनुमान मंदिर प्रांगण में सोमवार को साध्वी व प्रख्यात वक्ता प्रज्ञा भारती गिरि उर्फ सुश्री पंछी देवी ने अपने प्रवचन के दरम्यान कही। उन्होंने कहा की परिस्थिति चाहे कोई भी हो मनुष्य को भगवान की भक्ति को नहीं छोड़नी चाहिए। भगवान के प्रति भाव पूर्ण भक्ति करने वालों की सदा कल्याण होता है। सुश्री पंक्षी देवी ने हनुमंत लला की भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हनुमान जी की भाव पूर्ण भक्ति से भगवान प्रसन्न थे। उन्‍होंने कहा की चारों युगों में विराजमान रहने वाले मंगलमूर्ति रामभक्त हनुमान जी कि भक्ति करने वाले मनुष्य को युग- युगांतर के भी पापों का नाश हो जाता है। उन्‍होंने सनातन धर्म पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए उपस्थित श्रोताओं को सत्य मार्ग पर चलने की संदेश दिया। साध्वी व प्रख्यात प्रवचनकर्ता सुश्री पंक्षी देवी के धारा प्रवाह अमृतमयी वाणी सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध थे।

कार्यक्रम में मौजूद पंछी देवी व अन्य अतिथि।

लोग थे कार्यक्रम में

मौके पर जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिकेष सिंह, मंटू बाबा, राजीव रंजन चौहान, कन्हैया सिंह, सुकेश सिंह चौहान, अखिलेश सिंह,शशी शेखर सिंह, राम चन्द सिंह, जग नारायण सिंह, विजय कुमार तिवारी, प्रो सुभाष चन्द्र सिंह आदि के अलावा सैकड़ों महिला-पुरुष श्रोता उपस्थित थे।

जयप्रकाश विश्विद्यालय के कुलपति हरिकेष ने साध्वी पंक्षी देवी को मानस मर्मज्ञा सम्मान से किया सम्मानित

जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के कुलपति प्रो हरिकेष सिंह एवं स्थानीय लोगों द्वारा सुश्री पंक्षी देवी को “ मानस मर्मज्ञा “ सम्मान से सम्मानित किया गया। हनुमंत लला की ननिहाल गौतम स्थान रिविलगंज की पवित्र धरती पर यहां के लोगों से भावयुक्त सम्मान पा कर साध्वी सुश्री पंक्षी देवी हर्षित मुद्रा में थी। कहा जाता है की साध्वी सुश्री पंक्षी देवी जी हनुमान जी को भ्राता मानती है। इसलिए हनुमान लला की ननिहाल गौतम नगरी रिविलगंज से पंक्षी देवी जी का आत्मीय लगाव शुरु से रहा है। सुश्री पंक्षी देवी जी को मानस मर्मज्ञा अलंकार से अलंकृत कर इनई ग्रामवासी अपने आप को सौभाग्यशाली समझ रहे हैं। इस अवसर पर जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि साध्वी सुश्री पंक्षी देवी जी के पदार्पण एवं अमृतमयवाणी हम सभी के लिए काफी सुखद अहसास है। उनके विचारों को जीवन में ला कर जीवन को सफल बनाया जा सकता है। उन्‍होंने कहा की सतसंग के बिना ज्ञान नहीं होता। संतों की वाणी हमे मोह-माया की जाल से निकलने में सहायक होती है।

हनुमज्जयंति समारोह

संतों का समागम भी तीर्थराज प्रयाग में डुबकी लगाने जैसा

छपरा| शहर के मारूति मानस मंदिर परिसर में चल रहे हनुमज्जयन्ति समारोह के 52 वें अधिवेशन में दिवा सत्र में प्रवचन करते हुए आमी अम्बिका स्थान के मानस मर्मज्ञ प्रवाचक संत शिववचन जी महाराज ने कहा कि संतो का समागम तीर्थराज प्रयाग सा फलदाई व मंगलमय है ।गोस्वामीजी कहते है।

“मुद मंगलमय संत समाजू,जे जग जंगम तीरथ राजू”| उन्होंने कहा कि प्रयाग में तीन नदियों का संगम है ,तो संत समागम में राम भक्ति की गंगा , ब्रम्ह विचार की सरस्वती तथा कर्मकथा की यमुना बहती है। उन्होंने कहा कि अपने धर्म मे विश्वास अक्षयवट के समान है । तीर्थ राज तो केवल प्रयाग में है लेकिन संतो का समागम चाहे देश में हो या विदेश में तीर्थराज प्रयाग को जाना पड़ता है । इसीलिए इसे संगम कहते है। शिवबचन जी महाराज ने कहा कि मारुति मानस मंदिर परिसर अभी प्रयाग बन गया है ।यहां आने मात्र से तन-मन पवित्र हो जाता है । जिससे परिवार समाज व राष्ट्र का कल्याण होता है ।

लोग अपने चरित्र में सुधार लाये: वैराग्यानंद जी | वहीं संध्या सत्र में संत श्री वैराग्यानंद ने प्रवचन सुनने की सार्थकता की चर्चा करते हुए कहा कि लोग अपने आचरण और चरित्र में सुधार लाये। उन्होंने कहा कि आप मनुष्य नहीं हो आप उस योनि में जन्म लिये हो। मनुष्य के गुण आप अपने अंदर उतारो। वैराग्यानंद जी ने कहा कि अगर आपके सामने गलत और सही दोनों तरह के चीज परोसे जाते है तो आपके अंदर यह तय करने की क्षमता होनी चाहिए कि क्या गलत है और क्या सही?

शिववचन जी महाराज।

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