होली के रंगों में डूबे लोग ... जोगीरा पर लगाए ठुमके
कोरोना वायरस के चलते एक दूसरे को छूने से संक्रमण फैलने की अफवाहों के अलावा सर्दी को बुलाकर शहर से लेकर जिला के लोग होली के रंगों में डूब गए। स्कूल और कॉलेजों में सोमवार को जहां दोपहर में रंग गुलाल लगाकर एक दूसरे के गले मिलने का सिलसिला चला। वहीं शाम में बाजारों में व्यापारिक होलिका दहन के बाद एक दूसरे के गले मिलकर बधाई दी। इसके पूर्व बाजारों में लोगों की भीड़ उमड़ी रही। बाद में लोगों ने गले मिलकर एक दूसरे को होली की शुभकामना दी। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पुलिस की सुरक्षा इंतजाम की गई थी। अस्पतालों में बेड रिजर्व किए गए थे। पानी और बिजली सप्लाई बाधित न हो इसके लिए बिजली कंपनी ने पुख्ता इंतजाम किया था। सोमवार व मंगलवार की सुबह बाजारों में रंग और मिठाई की दुकानों पर अच्छी खरीदारी हुई लोगों ने रंग गुलाल पिचकारी और टोपी मुखोटे मिठाई और नमकीन की खरीदारी की। शहर के नगरपालिका चौक मार्केट साहिबगंज हथुआ मार्केट तमाम बाजारों में काफी चहल-पहल रही। लोगों ने सस्ते रंग के बजाय गुलाल हर्बल रंग को अधिक तरजीह दी। दुकानदारों होली के लिए फलों की खुशबू वाले फ्रूट कलर भी मंगाए थे। इधर पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम में लगातार बदलाव आ रहा है। 1 सप्ताह बाद रात का पारा फिर से नीचे खिसक आया। सोमवार व मंगलवार को पारा 13 डिग्री पर दर्ज किया गया। रात के तापमान में करीब 1 डिग्री सेल्सियस गिरावट दर्ज की गई।
रसीदपुर| भाईचारे व प्रेम के साथ मनाया गया पर्व
तरैया| थाना क्षेत्र के रसीदपुर के ग्रामीणों ने भाईचारे और प्रेम का अद्भुत मिसाल पेश किया है। हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों ने एक साथ मिलकर मंगलवार को होली के दिन होली मिलन समारोह का आयोजन किया। दोनों समुदाय के लोगों ने एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और एक साथ बैठकर पुआ-पकवान खाया और दूसरों को भी खिलाया। रसीदपुर गांव के लोगो ने होली के अवसर पर यह दिखा दिया कि वास्तव में भारत एकता में विभिन्नता का देश है। और ग्रामीण क्षेत्र में आज भी हिन्दू-मुश्लिम एवं अन्य संप्रदायों में एकता और भाईचारे का मिसाल कायम है। मढ़ौरा एसडीपीओ इंद्रजीत बैठा और तरैया थानाध्यक्ष राजेश कुमार भी समारोह में उपस्थित होकर ग्रामीणों को इस बेहतर कार्य के लिए बधाई दी है।
यह आयोजन रसीदपुर शान्ति एकता समिति के सदस्यों द्वारा किया गया। उक्त मौके पर पूर्व प्रमुख अनिल सिंह,पूर्व जिला पार्षद डॉ. अब्दुला खान, जयकिशोर सिंह, हबिबूल्लाह खान,सुरेन्द्र सिंह, सकिल खान,लालबाबू सिंह,अक्खतर खान, मोहन सिंह, कैसर अली, सूकदेव सिंह, मुन्ना मिया, कमला शाह, हफिज मिया, वीरेंद्र माझी,महम्द शाह, रामकुमार राम, विश्वनाथ प्रसाद, रेयाजूदिन अंसारी, नितेश कुमार व अन्य मौजूद थे।
दिघवारा| झाल मंजीरे व होली गीतों पर झूमे युवा-बुजुर्ग
दिघवारा थाना में होलिका दहन के दिन होली मिलन समारोह हुआ। इस अवसर पर आम दिनों से अलग एक तस्वीर देखने को मिली जब थाना के कर्मी प्रखंड के जनप्रतिनिधि प्रखंड के अधिकारी झाल मंजीरे के धुन पर व्यासों के द्वारा गाये जा रहे होली गीतों पर झूमते नजर आए ।थानाध्यक्ष मिहिर कुमार ने थाना के शांति समिति के साथ ही जनप्रतिनिधी सामाजिक कार्यकर्ताओं विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों को होली मिलन हेतु आमन्त्रित किये थे।इस होली मिलन कार्यक्रम में मीठे पकवानों के साथ ही झाल मंजीरे ढोलक हार्मोनियम जैसे वाद्ययंत्रों के सहारे क्षत्र कर व्यास आधुनिक एवं पारम्परिक होली गीत जोगीरा गाते नजर आए। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभ कामना दिए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से थानाध्यक्ष मिहिर कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी शशि प्रिय वर्मा, अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिन्हा, एस आई फूल हशन एस आई विजय शंकर सिंह एस आई उपेंद्र प्रसाद एस आई सी बी तिवारी, प्रमुख प्रतिनिधि राकेश सिह, पूर्व प्रमुख जनार्दन सिह, राजद अध्यक्ष विन्देसवरि पासवान, मो मंसूर आलम, मो अब्दुलाह ,महेस स्वर्णकार, डॉ अरविंद, अश्वनी पांडेय ,ब्रजेश सिह, संजय सिंह , रणविजय सिंह ,मुखिया प्रतिनिधि कोशल सिह, मुखिया सुधीर सिह आदि शामिल थे। वहीं होली गायन में पारस प्रीतम के अलावा कई व्यास व कलाकार उपस्थित थे।
मकेर में हर्षोल्लास से होली मनी, धूल-मिट्टी से भी खेली
मकेर| आपसी भाईचारा एवं प्रेम का त्योहार हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। बाजार सहित भटोली गांव के युवाओं एवं बच्चों ने दोपहर में धूल मिट्टी के साथ कुर्ताफार होली खेली। इस दौरान ढोल व झाल के साथ होली गीत एवं जोगीरा भी गया। जहां सुबह से ही बच्चों एवं युवाओं में होली को ले उत्साह था। जहां बच्चों ने हुरदंग मचाया। वहीं बड़े बुजुर्ग ने एक दूसरे की अबीर गुलाल लगाकर एक दूसरे को होली की बधाई दी।
दो बच्चों में 3 साल के अंतराल के लाभ
{महिला बच्चे की देखभाल अच्छे से कर पाएगी
{दोनों बच्चे को पूरा दूध पिलाने का समय मिलेगा
{ मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे
{ परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा
परिवार नियोजन पर चर्चा करने से बदलेगी तस्वीर
हर व्यक्ति अपने परिवार की खुशहाली चाहता है, इसके लिए तो कुछ लोगों को अपने घर से दूर भी जाना पड़ता है। परिवार के लिए जरूरी संसाधन जुटाने के लिए उन्हें परिवार, प|ी व बच्चों से दूर जाना पड़ता है। लेकिन इस भाग-दौड़ में वे कुछ बुनियादी बातों पर चर्चा करना भूल जाते हैं। परिवार नियोजन उन्हीं बुनियादी बातों की कड़ी में शामिल है। परिवार नियोजन सिर्फ साधनों के इस्तेमाल की बात नहीं है, बल्कि परिवार के सम्पूर्ण खुशहाली का संकेत भी है। दंपतियों के बीच परिवार नियोजन पर चर्चा से ही असली उद्देश्य को उजागर किया जा सकता है।
समझें परिवार नियोजन की जरूरत
स्टेट रिसोर्स यूनिट (एसआरयू) के परिवार नियोजन की टीम लीड कर रही पद्मा बुगिनेनी ने बताया कि मां व बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्रदान कराना मुख्य रूप से शामिल है। बच्चे के जन्म के बाद बेहतर परवरिश होनी भी जरूरी है। इसके लिए दो बच्चों में 3 साल का अंतराल जरूरी हो जाता है। महिलाओं का शरीर 20 साल के पहले बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार नहीं हो पाता है, यदि 20 साल के पहले कोई महिला मां बनती है तब मां के साथ उनके बच्चे का स्वास्थ्य भी असुरक्षित हो जाता है।
दो बच्चों में 3 साल का अंतराल जरूरी, परवरिश होगी बेहतर
सिटी रिपोर्टर|छपरा
होली में घर आने से पहले तैयारी कर लेना। मुन्ना अभी एक साल का ही है। आशा दीदी की बात तो याद है ना, पहला बच्चा 20 की उम्र के बाद और दो बच्चों में 3 साल का अंतराल जरूरी है। इससे हमारा बच्चा और मैं खुद भी स्वस्थ रहूंगी’। कुछ ऐसी ही बातें महिलाओं को बाहर से घर लौटने वाले पति को समझाने की जरूरत है। परिवार नियोजन सिर्फ जनसंख्या स्थिरीकरण की बात नहीं है। यह एक स्वस्थ एवं खुशहाल परिवार निर्मित करने की पहल भी है। एक ऐसा परिवार जो आर्थिक रूप से सक्षम एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ हो, इसके लिए पहला बच्चा 20 की उम्र के बाद एवं दो बच्चों में कम से कम 3 साल का अंतराल जरूरी है। होली पर प्रवासी घर लौट रहे हैं, ऐसे में वे अपने परिवार को स्वस्थ व खुशहाल रखने में मदद कर सकते हैं।
गांव की होली का उत्साह ही कुछ अलग: आईएएस राजकुमार
छपरा| रिविलगंज के शिवहर के पूर्व डीएम व वर्तमान में सामाजिक सुरक्षा के निदेशक आईएएस राजकुमार ने तमाम व्यस्तता के बाद भी गांव पर होली मनाना नहीं भूलते हैं। होली पर गांव आये राजकुमार का मानना है कि गांव की होली का कुछ अलग ही उत्साह है। हो भी क्यों न, आखिर अपनी माटी से सबको प्यार होता है। मेरा गांव, मेरा देश सबको प्यारा लगता है। कहते हैं होली पूर्णिमा की रात को जब होली जलती है तो अद्भुत दृश्य लगता है। होली में जो आनंद गांव में मिलता है वह शहरों में कभी नहीं मिल पाता। आज भी गांव की होली का क्रेज बरकरार है।दोस्तों, परिजनों,बुजुर्गो, बच्चों के साथ होली खेलने का महत्व ही कुछ दूसरा है।सारे मतभेद-मनभेद भुलाकर हम एक दूसरे को रंग-अबीर -गुलाल लगाते हैं। बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं तो देवर-भाभी का अपनत्व भी होली में देखने को मिलता है। वहीं पिता रंजीत कुमार व माता उमा देवी का कहना था कि बेटा जब शिवहर में कलक्टर थे तब भी गांव पर ही होली मनाने के लिए जोर देते थे।
देश ही नहीं विदेशों में रही होली की धूम
होली की धूम देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी रही। विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने रंगोत्सव का लुत्फ उठाया। नगर पंचायत निवासी जय प्रकाश ने दुबई के आबू धाबी में भारतीय मित्रों के साथ होली त्योहार में शरीक हुए। इस दौरान सभी भारतीय ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर होली मनाई। भारतीय व्यजनों के साथ होली गीतों का भी लुत्फ उठाया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से दिघवारा के जय प्रकाश मोतिहारी के मुन्ना कुमार व रवि भूषण, सुबोध कुमार, बसंत के अभिषेक शर्मा, बेतिया के मनोज शर्मा के अलावा पड़ोसी देश नेपाल निवासी अभिषेक यादव शामिल थे।
देर शाम तक अबीर खेलने का सिलसिला
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में रंग-पर्व होली आपसी प्रेम एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाई गई। लोगों ने एक-दूसरे को रंगों से सराबोर कर दिया। एक दूसरे को रंगों से सराबोर कर लोगों ने पारम्परिक तरीके से होली का आनंद लिया। दिन में टोलियों में युवा, महिलाएं, बुजुर्ग एवं बच्चे घूम-घूम कर लोगों को रंग लगाते दिखे जबकि शाम से घरों को जाकर मिलने व अबीर लगाने का सिलसिला शुरू हो गया जो देर रात तक चलता रहा। लोगों ने तरह-तरह के पकवान का आनंद लिया। उधर छिटपुट मारपीट की घटनाओं को छोड़कर पूरे इलाके में शांति व्यवस्था बनी रही।
मस्ती के रंग
मढ़ौरा में होली खेलते युवक और युवतियां।
लगातार बच्चे होने से पड़ने वाले प्रभाव
{महिला अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाएगी
{बच्चों के देखभाल नहीं होने पर होंगे कुपोषित
{बच्चे या मां अस्वस्थ्य होंगे तो इलाज पर खर्च बढ़ेगा और आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
विदेश में होली खेलते दिघवारा के लोग।
अबूधाबी में भोजपुरी गीतों पर थिरके युवक-युवतियां
होली पर सैंड आर्टिस्ट अशोक द्वारा बनाई गई सैंड आर्ट को देखते बच्चे।
जागरुकता }स्टेट रिसोर्स यूनिट के परिवार नियोजन की टीम ने होली पर घर आ रही महिलओं को परिवार नियोजन की जानकारी दी
सिटी रिपोर्टर| छपराजलालपुर
बिहार समाज के परिवारों ने अबू धाबी में होली मनाया। इस दौरान दिन भर रंग गुलाल और भोजपुरी गीतों पर युवक-युवतियां थिरकती रही। जो देर शाम तक चलता रहा। वहां के निवासियों तथा दूसरे देश के लोगों के लिए एक नया अनुभव रहा। बिहार समाज के तरफ से टी शर्ट पहन के लोगों के बिहार के प्रति अपना सम्मान जारी रखा। इस कार्यक्रम एक सूत्र में बांधने में छपरा के कुमार दिवाकर,अभिषेक शर्मा, राहुल कुमार ,शहाब ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिवाकर अबू धाबी में क्लाउड कम्प्यूटिंग से जुड़े हुए हैं। वहीं दाउदपुर के बरवां गांव के मुकेश सिंह तथा श्वेता सिंह ने दक्षिणी अमेरिकी देश जमैका की राजधानी किंग्सटन में भारतीय दूतावास में भारतीय लोगों के साथ होली मनाई।
होली खेलते स्कूली बच्चे।
ग्रामीण इलाकों में अबीर-गुलाल लगाकर दी होली की शुभकामना।
मकेर में होली खेलने के बाद मस्ती में डूबे युवा और बच्चे।
तरैया में होली मिलन समारोह का आयोजन।
होली पर बच्चों रंग लगाते युवा।
होली खेलने के बाद कैमरे में कैद की तस्वीर।
अबुधाबी में होली खेलते छपरा से जुड़े लोग।
होली में सभी ने एक-दूसरे को लगाए रंग गुलाल।
होली में युवतियाें ने एक-दूसरे को लगाए रंग।