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- Chhapra News Police Could Not Arrest The Accused Of Dowry Harassment And Domestic Violence In 7 Months The Victim Is Circling The Offices For Justice
दहेज उत्पीड़न व घरेलू हिंसा के आरोपी को 7 माह में गिरफ्तार नहीं कर सकी पुलिस, न्याय के लिए दफ्तरों का चक्कर लगा रही पीड़िता
कानून की नजर में तो दहेज उत्पीड़न एवं घरेलू हिंसा गैर जमानती धारा होता है, जिसके तहत केस दर्ज होने के बाद आरोपी को जेल जाना तय माना जाता है। उसी कानून रखवाले का उन आरोपियों को कभी-कभी संरक्षण भी प्राप्त हो जाता है। जिससे न्याय की उम्मीद रखने वाले पीड़ित न्याय के लिए सरकार बाबूओं के दफ्तर का चक्कर लगाते है। फिर उनको सही समय पर न्याय नहीं मिल पाता है। जिसके कारण आरोपी को कोर्ट से बेल मिल जाता है। तब मामला कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित हो जाता है। ऐसे में पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा ही यक्ष प्रश्न उठने लगता है। एक ऐसा ही मामला दिघवारा थाना क्षेत्र का सैदपुर गांव का है। जहां मोहम्मद अली के पुत्र शमशाद अली ने गांव के ही युवती से प्रेम प्रसंग कर दोनों अपने-अपने परिवार की सहमति से शादी किया। शादी के कुछ माह तक तो सब कुछ ठिक-ठाक चला, इसके बाद से युवती के पति शमशाद अली द्वारा मायके से रुपए एवं बाइक मांगने यानी दहेज को लेकर मार-पीटकर प्रताड़ित करने लगा। साथ ही परिवार के अन्य लोग भी मारपीट करने लगे। जिसकी सूचना मायके को मिलने पर समझा-बुझाकर मामले को शांत करा दिया गया। फिर भी मामला शांत नहीं हुआ तो पीड़िता ने इसकी सूचना दिघवारा पुलिस को दी। परंतु पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं किया। जिस पर पीड़िता ने सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष परिवाद पत्र दाखिल किया। जिस पर कोर्ट ने दिघवारा पुलिस को मामले की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इस पर दिघवारा थाने में 266/2019 एफआईआर दर्ज किया गया। जिसमें मोहम्मद अली के पुत्र शमशाद अली, गुड्डू आलम, फिरोज आलम, राजू आलम, मो. सलीम उर्फ सोनु, मोहम्मद अली एवं इनकी प|ी शहर बानो को आरोपी बनाया। पीड़िता ने दर्ज परिवाद में कहा है कि शादी के कुछ माह बाद से ही ससुराल वाले दहेज में दो लाख रुपए एवं बाइक की मांग कर मार-पीट करने लगे। मारपीट से जख्मी होने पर मायके वाले दिघवारा पीएचसी पर इलाज भी करवाये। जबरन दवा खिलाकर गर्भपात भी करवाया गया है। दिनांक 24 जुलाई 2019 को बुरी तरह से मारपीट की। जिसकी शिकायत दिघवारा पुलिस से करने पर कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद सीजेएम कोर्ट में परिवाद दर्ज किया, तब पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया। परंतु एफआईआर दर्ज करने के सात माह बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अभी तक आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं किये है। जिससे आरोपी केस उठाने एवं बर्बाद करने को लेकर धमकी भी दे रहे है।