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सेविका व आशा ने घर-घर जाकर पोषण की दी जानकारी
जिले में पोषण पखवाड़ा अभियान के तहत सभी प्रखंडों के आंगनबाड़ी सेविकाओं व आशा के द्वारा गृह भ्रमण किया गया। इस दौरान बेहतर नवजात एवं शिशु देखभाल पर माता-पिता को जानकारी दी गयी। वहीं कुपोषण दूर करने के लिए बच्चों को सही पोषण कैसे दें, इसके बारे में भी लोगों को बताया गया। साथ ही इस दौरान माध्यमिक स्कूलों में पोषण आधारित क्विज का आयोजन कर स्कूली बच्चों के साथ पोषण पर चर्चा की गयी। आईसीडीएस की डीपीओ वंदना पांडेय ने बताया गृह भ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं व आगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाले खतरे, संस्थागत प्रसव व परिवार नियोजन के बारे में जानकारी दी गयी। साथ ही गंदगी व कूड़ा-कचरा को सभी तरह के बीमारी का जड़ बताते हुए लोगों को अपने-अपने आसपास के क्षेत्र को नियमित रूप से साफ-सफाई करने को कहा गया। ताकि उनका बच्चे स्वच्छ वातावरण में रह सके।
मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
पौष्टिक आहार के बारे में सदर शहरी क्षेत्र के सीडीपीओ कुमारी उर्वशी ने बताया कि गृह भ्रमण के दौरान शिशु पोषण पर आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा जानकारी दी गयी। शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला पीला गाढ़ा दूध रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले 6 माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला एवं गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है।
साफ-सफाई व डायरिया प्रबंधन
साफ-सफाई एवं स्वच्छ भोजन डायरिया से बचाव करता है। इसको लेकर आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गृह भ्रमण के दौरान लोगों में जागरूकता बढाई। परिवारों को बताया कि शिशुओं में डायरिया शिशु मृत्यु का मुख्य कारण है। 6 माह तक के बच्चों के लिए केवल स्तनपान (ऊपर से कुछ भी नहीं) डायरिया से बचाव करता है। डायरिया होने पर लगातार ओआरएस का घोल एवं 14 दिन तक जिंक देना चाहिए।
अनीमिया प्रबंधन|गर्भवती, किशोरियां व बच्चों में एनीमिया की रोकथाम की भी जानकारी दी गयी। इसके लिए गर्भवती को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली खाने की सलाह दी गयी। वहीं 10 से 19 वर्ष की किशोरियों को सप्ताह में आयरन की एक नीली गोली के सेवन करना हाेगा।
पोषण गतिविधि का होगा मूल्यांकन
आईसीडीएस की डीपीओ वंदना पांडेय ने बताया कि पोषण पखवाड़े से समाज में व्यापक जागरुकता एवं बेहतर के लिए नयी पहल भी की की जा रही है। इस दौरान गोदभराई, अन्नप्राशन, पोषण मेला व पोषण प्रभात फेरी के मूल्यांकन के लिए लाभार्थियों की जरूरी राय व फीडबैक ली जा रही, ताकि ऐसे आयोजनों की गुणवत्ता में सुधार कर पोषण व्यवहार का अभ्यास जन समुदाय द्वारा किया जा सके।
पोषण पखवाड़ा कार्यक्रम में शामिल महिलाएं