कार्तिक पूर्णिमा के दिन सरयू स्नान करने से पाप धुल जाते हैं, प्राणी मोक्ष प्राप्त करता है

Chhapra News - मनजीत नारायण सिंह |रिविलगंज मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के देवत्व की साक्षी व न्याय शास्त्र के प्रणेता...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:06 AM IST
Chhapra News - taking a saryu bath on kartik purnima eradicates sins the creature attains salvation
मनजीत नारायण सिंह |रिविलगंज

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के देवत्व की साक्षी व न्याय शास्त्र के प्रणेता महर्षि गौतम तथा वेद ऋषि श्रृंगी की तपो स्थली रही गौतम स्थान रिविलगंज की पावन धरती एक बार फिर धार्मिक आस्था वाले लोगों से पट गया है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंगलवार को मोक्षदायनी सरयू नदी में स्नान - ध्यान करने को लेकर रविवार की शाम से ही दूर-दराज के हजारों श्रदालुओं का आना बदस्तूर जारी है। धार्मिक आस्था वाले लोग मेला क्षेत्र स्थित मठ-मंदिरों, रेलवे स्टेशन, सरकारी स्कूल कॉलेजों आदि सहित अपने सगे संबंधियों के यहां शरणार्थी बने हुए हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सरयू नदी में स्नान ध्यान एवं दान करने से मिलने वाले पुण्य से संबंधित कई धार्मिक किवदंतियां जग जाहिर है।

रिविलगंज के गौतम ऋषि मंदिर प्रांगण में स्थित भगवान श्रीराम का चरण चिन्हप्

यहां पाप और पुण्य के फैसले भी होते हैं|न्याय शास्त्र के प्रणेता महर्षि गौतम ऋषि की यह वह नगरी है। जहां पुण्य एवं पाप का फैसला पल भर में होती है। झूठे एवं छलियों को सजा देने की इतिहास पौराणिक है। यही वजह है कि यहां आने वाले लोग झूठ बोलने से परहेज करते हैं। जहां गौतम ऋषि द्वारा अपने ही प|ी अहिल्या को दोषी पाये जाने पर शाप देकर पत्थर सा दृश्य बना दिया गया था। जो काफी अनुनय विनय के बाद भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से पुनः आहिल्या पत्थर से नारी बनी थी।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन सरयू नदी में स्नान करने से सारे पाप मिट जाते हैं, रामचरित मानस में वर्णित है कथा

राम चरित मानस की रचना करते हुए तुलसी दास ने सर्व प्रथम मानस नन्दनी सरयू नदी की वंदना करते हुए लिखा है “ कोटि कल्प काशी बसे मथुरा बसे हजार, एक निमित सरयू बसे तूलै न तुलसी दास “। राम चरित मानस के अनुसार संसार के समस्त जीवों द्वारा किये गये सभी प्रकार के पापों का नाश एक मात्र कार्तिक पूर्णिमा के दिन सरयू नदी में स्नान करने से हो जाते हैं। और प्राणी बैंकुठ प्राप्त करता है। कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामना पूर्ण होती है। यही वजह है कि हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन सरयू नदी तट स्थित गौतम स्थान रिविलगंज में लगभग चार किलोमीटर की परिधि में विशाल मेला लगता है। बिहार के कोने कोने सहित पड़ोसी राज्य उतर प्रदेश से भी काफी संख्या में श्रद्धालु स्नान ध्यान एवं पुजा-अर्चना के लिए यहाँ आते हैं।

मेले का विधिवत उदघाटन सोमवार को स्थानीय विधायक द्वारा किया जाएगा

सोमवार की शाम श्री नाथ बाबा मंदिर परिसर सेमरिया, रिविलगंज में छपरा विधायक डा. सीएन गुप्ता द्वारा गोदना-सेमरिया मेले का विधिवत किया जाएगा। मेला उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि व विधान पार्षद डा विरेन्दर नारायण यादव, मढौरा विधायक जीतेन्दर कुमार राय, छपरा मेयर प्रिया देवी, रिविलगंज प्रखंड प्रमुख राहुल राज, अनुमंडल पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा, रिविलगंज मुख्य पार्षद अमिता देवी, उप मुख्य पार्षद सोनी देवी आदि के अलावा रिविलगंज नगर एवं प्रखंड स्तर के सैकड़ों जन प्रतिनिधि, अधिकारी एवं हजारों श्रदालु उपस्थित रहेंगे।

भगवान श्रीराम का पद चिन्ह आज भी है मौजूद मेला का केन्द्र बिन्दु होता है

रामायण युगीन काल में भगवान श्रीराम अनुज लक्ष्मण एवं गुरु वशिष्ठ जी के साथ यहां पधारे थे। कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा दिन भगवान श्रीराम यहां मानस नन्दनी सरयू नदी में स्नान ध्यान के बाद घाट पर भोजन ग्रहण किए थे तथा रात्रि विश्राम भी किये थे। गोदना स्थित गौतम मंदिर प्रांगण में भगवान श्रीराम का चरण चिन्ह आज भी विराजमान है। जो गोदना-सेमरिया नहान मेला में आने वाले श्रदालुओं का केन्द्र बिन्दु होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रदालु सरयू नदी में स्नान ध्यान के बाद चरण चिन्ह के दर्शन एवं पुजा-अर्चना करते हैं। स्नान-ध्यान के बाद श्रदालू सरयू नदी घाट पर ही सतू एवं मूली खाते है।

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