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सारंगपुर डाकबंगला घाट मेला पानापुर में नौका विहार का आनंद लेने आते है हजारों युवक-युवतियां

Chhapra News - हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन सारंगपुर डाकबंगला घाट पर हजारों श्रद्धालु नारायणी नदी में डुबकी लगाने के लिए आते...

Nov 11, 2019, 09:20 AM IST
हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन सारंगपुर डाकबंगला घाट पर हजारों श्रद्धालु नारायणी नदी में डुबकी लगाने के लिए आते हैं। प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद कुव्यस्था पर आस्था भारी पड़ जाती है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि हमलोगों के जन्म से पहले से डाकबंगला घाट पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन मेला लगता आ रहा है। आधी रात को जैसे ही घड़ी की सुई 12 का कांटा पार करती है, दूर-दराज से आए श्रद्धालु नदी में डुबकी लगाने लगते हैं।

24 घण्टे के मेले में लाखों का कारोबार होता है

सारंगपुर डाकबंगला घाट मेले का इंतजार आस-पास के गांव के अलावे गोपालगंज जिले के लोगों को भी रहता है। क्योंकि इस मेले में पारंपरिक चींजे आसानी से मिल जाती है। चाहे सिलवट-लोढ़ा खरीदना हो या ओखल-मुसल। किफायती दामों में समान मिल जाते हैं। मात्र 24 घण्टे के मेले में लाखों का कारोबार होता है। लकड़ी से बने फर्नीचर इस मेले में खूब बिकते हैं। नौका विहार का आनंद लेने के वाले युवक-युवतियों के लिए सारंगपुर डाकबंगला घाट मेला सोने पर सुहागा है। चंद रुपये में लोग नौका विहार का आनंद लेते हैं। नौका विहार के दौरान युवाओं में सेल्फी लेने और वीडियो बनाने का क्रेज खूब देखने को मिलता है।

मेले में हजारों की भीड़ उमड़ने के बावजूद प्रशासनिक व्यवस्था ना के बराबर होती है : मेले में हजारों की भीड़ उमड़ने के बावजूद प्रशासनिक व्यवस्था ना के बराबर होती है। लोगों की सुरक्षा चौकीदारों के जिम्मे होती है। मेले के कुछ चक्कर लगाकर पुलिस अपने कर्तव्यों की इति श्री कर लेती है। डाकबंगला घाट पर दुकानदारों के लाईट की रोशनी में श्रद्धालुओं को डुबकी लगानी पड़ती है। सुबह के कुछ घण्टे स्थानीय गोताखोर तैनात रहते हैं। बाकी समय लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे होती है। घाट की कामचलाऊ बैरिकेटिंग यदि छठ में ग्रामीण किए रहते हैं तो वही बैरिकेटिंग कार्तिक पूर्णिमा के दिन भी काम आता है। प्रशासन अपने से बैरिकेटिंग भी नहीं कराती है। घाट पर हजारों महिलाएं-युवतियां स्नान करने के बाद साड़ी की चहारदीवारी में कपड़े बदलने के मजबूर होती हैं। लाख कुव्यस्थाओं के बावजूद लोग श्रद्धा का स्नान करने सपरिवार आते हैं। और मेले में दैनिक उपयोग के सामानों की खरीदारी करते हैं।

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