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विधान परिषद में गूंजा पूअर होम में अनाथों के पुनर्वास का मामला
हाइकोर्ट द्वारा अनाथों के हक में मानित पक्षकार प्रो. जयशंकर झा के कड़े संघर्ष के फलस्वरूप बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग से लेकर उच्च न्यायालय पटना तक के आदेश के बावजूद अनाथों के पुनर्वास में हो रहे बिलंब पर विधान परिषद में ध्यानाकर्षण के माध्यम से विधान परिषद सदस्य रीना यादव ने आवाज बुलंद की। विधान परिषद सदस्य श्रीमती रीना यादव ने तीखे लहजे में कहा कि एक तरफ तो बिहार सरकार प्रत्येक जिले में शेल्टर होम स्थापित करना चाहती हैं दूसरी ओर दरभंगा महाराजा द्वारा स्थापित 1962 ई. तक एशिया के दूसरे तथा देश के सबसे समृद्ध अनाथालय को बचाने प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट के स्पष्ट न्यायादेश के आलोक में जिसे राट्रीय स्तर पर अब तक मॉडल शेल्टर होम के रूप में विकसित होना चाहिए था वह सरकारी फाइलों में उलझ के रह गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक शेल्टर होम का ही मुद्दा नही हैं यह एक ऐतिहासिक धरोहर को समेटकर रखने की बात हैं। प्रेम की निशानी के रूप में हमलोग ताजमहल की बात करते हैं किंतु दांपत्य प्रेम की अमर स्मारक के रूप में महाराजा ने मानवता के जिस मंदिर को बनाया जहां से हजारों अनाथों एवं असहायों को सम्मानजनक जिंदगी जीवन जीने का मौका मिला । उन्होंनें सवालिया लहजे में पूछा कि अनाथों के विगत 04 दशकों से भय,भूख एवं भटकाव के दोषियों पर अभी तक दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई हैं। जबाब देते हुए समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह ने स्वीकार किया कि अनाथों के कल्याण का कार्य विगत चार दशक से ठप हैं एवं हाइकोर्ट के निर्देश के आलोक में प्रमंडलीय आयुक्त ने इसे अपने पर्यवेक्षण में रखा हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि इसके
संपति के हस्तांतरण के बाद विभाग यहां अन्य लोकोपकारी कार्य करेगा। विदित हो कि एपेक्स फाउंडेशन के सचिव सह सामाजिक सरोकार से जुड़े युवा उज्ज्वल कुमार ने विधान परिषद सदस्य श्रीमती रीना यादव को उनके दरभंगा आगमन पर ज्ञापन के माध्यम से संज्ञान में दिया था।
दरभंगा स्थित शेल्टर होम।