बाढ़ नियंत्रण और विकास के नाम पर नदियों की हो रही क्षति

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Nov 11, 2019, 07:11 AM IST
जलाशयों के अतिक्रमण से क्षेत्र में जल संकट

भास्कर न्यूज|दरभंगा

मिथिला क्षेत्र में जलसंकट बागमती और कमला नदी की वास्तविक धारा को अवरुद्ध करने के कारण हो रहा है। बाढ़ नियंत्रण और विकास के नाम पर नदियों की हत्या कर दी गई है। लोगों की जलाशयाें काे तेजी से समाप्त करने की प्रवृति ने जलसंकट को और बढ़ा दिया है। इस समस्या को दूर करने के लिए पारंपरिक और वैज्ञानिक दोनों पद्धति पर निदान किया जा सकता है। ये बातें पद्मश्री मानस बिहारी वर्मा ने तालाब बचाओ अभियान के सदस्यों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहीं। दिग्घी पश्चिम स्थित खादी ग्रामाेद्योग संघ परिसर में आयोजित बैठक में बढ़ते जल संकट से निपटने के लिए भावी कार्य योजना बनाने, प्रशासन से तालाबों व जलाशयों से अतिक्रमण मुक्त करवाने का प्रयास करने के साथ ही संगठन का स्वरूप और विस्तार करने पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि जल संकट से निपटने के लिए साामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। तालाब बचाओ अभियान के संयोजक नारायण जी चौधरी ने बैठक का संचालन करते हुए कहा कि समस्यएं बहुत हैं वास्तविक समाधान की तलाश होनी चाहिए। हराही पोखर को अतिक्रमण मुक्त कराने पर प्रशासन की सराहना की। गंगासागर अौर दिग्घी तालााब को भी अतिक्रमण मुक्त करा कर सौंदर्यीकरण कराने का आग्रह किया। तालाब बचाआे अभियान के सदस्य अजित मिश्रा और पशुपति कुमार राजू को स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन से होने वाले कार्यों की पहल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बैठक में रामबाग जलाशय, नाहर, बलभद्रपुर के मोईन पोखर, पीएचईडी कार्यालय के पास वाले पोखर, कोर्थू गांव गुणसागर पोखर आदि पर तेजी से किये जा रहे अतिक्रमण को रोकने का प्रयास करने का आह्वान किया। मौके पर प्रो. टुनटुन झा, हृदय नारायण चौधरी, प्रो. विश्वनाथ झा, सुरभि कुमारी, विश्व राज, शुभ्रा वैदेही आदि ने विचार व्यक्त किया।

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