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- Hanumannagar News For Years People Have Been Demanding To Build A Bridge Over The Kareh River But Did Not Make It Today Only The Boat Supports
सालों से करेह नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं लाेग, लेकिन अाज तक नहीं बना, नाव ही सहारा
दरभंगा एवं समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के साथ-साथ हायाघाट एवं हनुमाननगर दो विधानसभा को जोड़ने वाले घरारी गांव एवं आसपास के दर्जनों गांवाें के लाेग आजादी के 70 वर्षों बाद भी अपने हालातों पर आज भी शर्मिंदा हैं। कहने को तो हर लोकसभा , विधानसभा एवं पंचायती चुनाव में यहां के लोग मतदान करते हैं। मगर करेह नदी पर पुल नहीं रहने के कारण यहां के लाेगाें को अावागमन के लिए नाव की नसीब नहीं है। हाल ऐसा है कि चारों तरफ से नदियों से घिरे इस क्षेत्र को बाढ़ बरसात में सिर्फ और सिर्फ नाव ही एकमात्र सहारा बनता है। यहां तक कि गंभीर बीमारी, आग लगी जैसी घटना के बाद भी लोगों को एंबुलेंस एवं अग्निशमन वाहन तक नसीब नहीं होता है। यही कारण है कि हर चुनाव में नेता वोट से पहले वादा कर जाते हैं। शायद ही कभी चुनाव जीतने के बाद अपने वादा निभाने इस गांव की तरफ मुखातिब होते हैं।
अाज भी गांव का टापू जैसा है हाल
यह गांव आज भी टापू जैसा ही है। चारों तरफ से करेह नदी से घिरे घरारी गांव के अलावा बहपत्ति, गोढाड़ी, छतौना, नियाम, इखौली, साराहमीद अादि दर्जनों गांवाें की भी कुछ ऐसा ही मिलती जुलती समस्या है। गांव के सीताराम यादव ने कहा कि घरारी एक ऐसा गांव है, जहां दशकों से प्रलयकारी बाढ़ ने यहां की भौगोलिक स्थिति को तहस-नहस करके आवागमन की सारी सुविधाओं को नेस्तनाबूद कर दिया था।
पुल बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी : विधायक
वहीं मल्हीपट्टी उत्तरी पंचायत के मुखिया मोहम्मद लालबाबू ने बताया कि बड़े नेता से लेकर सभी को यह बात पता है कि घरारी गांव के लोगों को पुल की जरूरत है लेकिन अभी तक यह बात सभी दबी जुबान को दबाए रखे हुए रखे हैं। हायाघाट विधानसभा के विधायक अमरनाथ गामी ने बताया कि विधानसभा में मामल उठाया जा चुका है। घरारी गांव के आगमन को लेकर करेह नदी पर जल्द ही पुल बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।
नाव के सहारे राेजमर्रा के सामान लाते हैं लाेग
उक्त गांव के ग्रामीण मोहम्मद यूसुफ, अब्दुल मजीद, नूरजहां, भुट्टा यादव, रामाश्रय यादव, हीरालाल यादव, राम प्रसाद यादव, अर्जुन यादव, जितेंद्र यादव, रामसकल यादव, राम सेवक यादव, सुमन यादव, रामबाबू यादव, बेचन यादव आदि ने बताया कि नाव के सहारे रोजमर्रा की सामग्री लाते हैं । छात्र छात्राओं को रोज हाईस्कूल या कोचिंग करने नाव पर सवार होकर नाव नाविक को 5 या 10 रुपए देने पड़ते हैं। सिरनिया पूर्वी रुस्तमपुर पंचायत के मुखिया सफीर रहमान उर्फ बौआ मियां ने बताया कि सरकार के आला अधिकारी को पुल निर्माण कराने को लेकर जिला के प्रभारी मंत्री महेश्वर हजारी को इस संबंध में कहा गया था, लेकिन अभी तक इस बाबत कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
हायाघाट के घरारी गांव में नाव से अपने घर को जाते ग्रामीण।
प्रसव पीड़ा से कराहती महिलाअाें अाैर बीमार काे भी नाव का करना पड़ता है इंतजार
पिछड़ेपन के चलते शादी करने से कतराते हैं लोग
अनिरुद्ध यादव ने बताया कि आज भी घरारी गांव में कोई दूसरे गांव के लोग अपने बेटे या बेटियों की शादी करने से कतराते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि इम्तियाज अहमद बादल ने कहा कि लोग निजी नाव के सहारे अावागमन करते हैं। रात होने पर परेशानी बढ़ जाती है। इसके चलते इमरजेंसी में महिला प्रसव पीड़ा एवं कोई बीमार तड़पती रहती है। खटिया या अन्य किसी सहारे लादकर नदी किनारे लाना पड़ता है। फिर नाव मालिक को सूचना देकर उसे नाव चलाने के लिए अधिक पैसे देना पड़ता है। तब तक मरीज की स्थिति और अधिक नाजुक हो जाती है। मो .रजा ने बताया कि कई बार बाढ़ के दिनों में नाव से अन्य उच्च स्थानों पर जाने पर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि इससे सबक नहीं ले रहे हैं। घरारी गांव में की अाबादी 3 हजार है। हर वर्ष बाढ़ तांडव मचाती है। गांव में प्राथमिक विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं । 4 महीने पूरा गांव बाढ़ से घिरा रहता है।