बागमती नदी का सिरनिया तटबंध जर्जर, बाढ़ की आशंका से दहशत में दर्जनों गांवों के लोग

Darbhanga News - प्रखंड में सात दिनों से हो रही बारिश से करेह व बागमती नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा हैं। इससे सिरनिया...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:35 AM IST
Jale News - people from dozens of villages in panini panic in the flood of jhansi
प्रखंड में सात दिनों से हो रही बारिश से करेह व बागमती नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा हैं। इससे सिरनिया तटबंध जगह-जगह से जर्जर होती जा रही हैं। चूहे के सेंध करने से तटबंध पर गड्ढा हो गया हैं। अगर बाढ़ आएगी तो पलभर में पानी प्रलय का रूप ले सकता हैं। समय रहते इस तटबंध की मरम्मत का कार्य नहीं शुरू किया गया तो, दो से ढ़ाई लाख की आबादी इस बाढ़ के पानी में समा सकता हैं। बता दे कि इस क्षेत्र में 2004 व 2007 में तटबंध टूटने से बड़ी तबाही मची थी। हालांकि, साल दर साल मानसून की नरमी के चलते इलाके में बाढ़ की गंभीर चुनौती सामने नहीं आई हैं। पर तटबंध की जर्जर स्थित दहशत का कारण बनी हुई हैं।

स्थानीय लोगों ने की तटबंध की मरम्मत की मांग | साथ ही प्रखंड प्रमुख बेबी देवी, लोजपा नेता रणधीर झा, सिरनिया पूर्वी रुस्तमपुर के मुखिया संतोष पासवान,मल्हिपट्टी दक्षिणी के मुखिया मो. लालबाबू आदि जनप्रतिनिधियों ने तटबंध संबंधित अधिकारियों को बांध की मरम्मती के लिए कुछ दिन पूर्व ही अवगत किए हुए थे।

वरीय अधिकारियों को स्थिति से कराया गया है अवगत : अंचलाधिकारी | अंचलाधिकारी कमल प्रसाद साह ने बताया कि वरीय अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया है कटाव व जर्जर तटबंध को रोकने के लिए जल्द ही ठोस उपाय किए जाएंगे।

वर्ष 2004 और 2007 में सिरनिया तटबंध टूटने से गावों में मची थी तबाही

बांध पर जगह-जगह बना है रेन कट।

तटबंध के नीचे बसे गांव बसे है दर्जनों गांव

सिरनिया बांया तटबंध के नीचे बसे गांव आसपास के इलाकों में बसे लोग बाढ़ की आशंका से दहशत में हैं। तटबंध के निकट अकराहा, सिरनिया, बलहा, चिकनी, बरमोतरा, शोभेपट्टी, हिछैल, अम्माडीह, घराड़ी, नावकाटोल, इंद्रानगर, खिखराहीटोल, गिरधरपुर, दिघरा, हवासा, मनोरथा, खड्डा, विशनपुर आदि गांव आते हैं। साथ ही नीचे बसे गांव से नजदीक तटबंध पर रेन कट की स्थिति बनी हुई है। हालांकि वरीय अधिकारियों के आदेश पर बाढ़ की स्थिति को देखते हुए समय-समय पर तटबंध पर मरम्मती का कार्य किया जाता है। सूत्रों की माने तो करीब 20 वर्ष पूर्व इस बांध पर मिट्टी डाली गई थी। उसमें से अधिकांश रेन कट का रूप लेकर मिट्टी बह चुकी हैं। इसमें चूहे आदि जानवरों ने सुरंग बनाकर अपना डेरा बनाएं हुए है। मालूम है कि इस तटबंध की ऊंचाई नहीं की गई हैं। कुछ दिनों पूर्व भास्कर टीम की खबर की असर को देखते हुए पटना के विकास आयुक्त सुभाष शर्मा ने तटबंध पर निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए तटबंध को ऊंची करने की बात कही थी।

बांध पर कई जगहों पर हो गया है सेंध ।

अतरबेल-जाले पथ पर बढ़ा पानी का दबाव

सिंहवाड़ा | कटासा बाजार के पास स्टेट हाईवे अतरबेल-जाले पथ पर बुढ़नद नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटाव शुरू हो गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ गया है। जैसे-जैसे नदी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे नदी किनारे बसे अग्यासपुर, कटासा, सिंहवाड़ा, रघवा, पकरिहार, गोगौल, हसनचक, हरिहरपुर पश्चिमी, अरई बिरदीपुर, सढ़वाड़ा आदि गांव के ग्रामीणों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है। कटासा के सरपंच मो नबीजान, राशिद मुश्ताक, मुखिया रमेश कुमार, मो. इस्लाम, जयप्रकाश साह, सुशील साह, कपिलेश्वर साह आदि ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व सड़क किनारे रेत से भरी बोरी रखी गई थी। लेकिन 2017 में आई बाढ़ के बाद डाली गई बोरी जलमग्न हो गई। पूर्व में आई बाढ़ के कारण सड़क किनारे कटाव से रामवृक्ष साह की दुकान धराशायी होकर नदी में बह गई थी। जिसका अवशेष आज भी नदी में लटका हुआ है। जब भी बाढ़ आती है तो कटासा बाजार के पास एक से दो फीट पानी सड़क पर चढ़ जाता है। जिसके कारण क्षेत्र की लाइफलाइन कही जाने वाली अतरबेल-जाले पथ पर यातायात ठप हो जाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि समय रहते प्रशासन कटाव को रोकने का उपाय करे। सीओ सुशील उपाध्याय ने बताया कि बताए गए स्थल का निरीक्षण कर जल्द ही कटाव रोकने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

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