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एलएनएमयू के कुलसचिव को 5.6 करोड़ भुगतान का स्कूल गुरु ने भेजा नोटिस, विवि ने वादाखिलाफी कहा

एक वर्ष पहले
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एलएनएमयू के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के साथ हुए समझौते के दो माह बाद स्कूल गुरु के अधिवक्ता ने कुलसचिव को 30 दिनों के भीतर 5.6 करोड़ के भुगतान का नोटिस भेजा है। इसके बाद विवि प्रशासन ने इसे वादाखिलाफी मानकर कानूनी राय लेने के बाद जवाब देने की तैयारी में है। हालांकि, 15 मार्च तक विवि बंद रहने के कारण इसमें कुछ विलंब भी लग सकता है। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय एवं स्कूल गुरु के बीच 8 मार्च 2018 को आईसीटी इनेबुल कराने के नाम पर एग्रीमेंट हुआ था । दूसरी ओर सिंडिकेट सदस्य डॉ. हरि नारायण सिंह कहा है कि विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण निदेशक को हटते ही कानूनी नोटिस आना अपने आप में एक अनोखी बात है। अब भी विवि प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इस अवैध एग्रीमेंट के लिए दोषी पूर्व निदेशक पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

कानूनी कार्रवाई नहीं करने का भी किया गया था वादा


स्कूल गुरु के अधिकारियों ने एलएनएमयू के पदाधिकारियों के साथ समझौता के दौरान 21 लाख, 73 हजार, 350 से अधिक का क्लेम नहीं करने का वादा किया था। स्कूल गुरु के अधिकारी ने यह वादा किया था कि इसके बाद किसी भी तरह के भुगतान के लिए कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे। उनकी मांग थी कि विवि प्रशासन उन्हें ब्लैक लिस्टेड न करें। जिससे उन्हें अन्य विवि से भी एग्रीमेंट करने में परेशानी होगी। जिसे विवि प्रशासन ने स्वीकार कर लिया था। जबकि, जांच कमेटी ने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की बात कही थी। लेकिन, समझौते के हिसाब से एग्रीमेंट को 25 अक्टूबर 2019 की तिथि रद्द माना गया था। क्योंकि इसी तिथि को विवि की ओर से स्कूल गुरु को नोटिस भेजा गया था।

एग्रीमेंट के बाद विरोध शुरू हो गया था

मालूम हो कि आईसीटी इनेबुल कराने के नाम पर स्कूल गुरु जैसी प्राइवेट कंपनी के साथ हुए एग्रीमेंट के बाद से ही इसका विरोध शुरू हो गया था। लगातार छात्र आंदोलन के बाद विवि प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं लिया। बाद में कई सिंडिकेट सदस्यों ने इस मामले को सिंडिकेट में उठाया। इस मामले को लेकर सिंडिकेट में कुलपति की भी काफी फजीहत हुई। अंत में तीन विधायकों की एक जांच कमेटी बना दी गई। जिसमें नगर विधायक संजय सरावगी, डॉ. फैयाज अहमद एवं लक्ष्मेश्वर राय शामिल थे। तीनों विधायकों ने एग्रीमेंट की कई अवैध बिंदुओं पर विस्तार से रिपोर्ट देते हुए विवि प्रशासन से इसे शीघ्र एग्रीमेंट रद्द करने की अनुशंसा की। इस पर भी विवि प्रशासन की शिथिलता पर लगातार सिंडिकेट में हंगामा के बाद इस एग्रीमेंट रद्द करने को लेकर कानून सहित अनेक पक्षों पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित कर दी गई। विधिक राय भी लिए गए। फिर भी इस प्रक्रिया को अंतिम पायदान पर कौन पहुंचाएगा इसके लिए काफी दिनों तक जद्दोजहद चलती रही। अंत में 16 दिसंबर 2009 को स्कूल गुरु के प्रतिनिधि एवं विवि के अधिकारियों के बीच बातचीत के आधार पर आपसी समझौता हुआ। जिसकी अधिसूचना प्रशासन ने दिसंबर में ही जारी कर दी थी। स्कूल गुरु का कहना है कि विवि पर उसका 5 करोड़, 6लाख, 59 हजार 551 के बदले उन्हें केवल 20लाख, 86हजार, 415 ही भुगतान किए गए हैं।

समय लेकर रखा था पक्ष

इस मामले में विवि प्रशासन ने भी विधिक राय लेकर स्कूल गुरु के साथ एग्रीमेंट रद्द करने का नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के जवाब में स्कूल गुरु ने समझौता रद्द करने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर मांगा था। इसी क्रम में 16 दिसंबर को गांधी सदन में डीएसडब्ल्यू प्रो. रतन कुमार चौधरी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। जिसमें शामिल होकर अधिकारी ने अपना पक्ष रखा था।

लीगल नोटिस भेजना भरोसा तोड़ना है

कुलसचिव एलएनएमयू के कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय ने कहा कि स्कूल गुरु के साथ आपसी समझौते के बाद ही एग्रीमेंट रद्द किया गया था। फिर भी लीगल नोटिस भेजना भरोसा तोड़ना है। अब कानूनी सलाह के बाद ही इस पर कोई बात होगी। विवि का पक्ष काफी मजबूत है।

स्कूल गुरु ने अधिवक्ता के माध्यम से भेजा नोटिस

स्कूल गुरु की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता संदीप कुमार ने नोटिस भेजते हुए कहा है कि 30 दिनों में मामले का निपटारा आपसी बातचीत से कर लिया जाए। अगर इसके भीतर निपटारा नहीं हुआ तो यह मामला कोर्ट में जाएगा। बातचीत के लिए आर्बिट्रेशन एंड कैंसिलेशन एक्ट के तहत स्कूल गुरु की ओर से रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा को आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। विवि की ओर से भी ओर भी आर्बिट्रेटर नियुक्त करने को कहा गया है।
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