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श्री नारायण पृथ्वी पर अनेक रूपों में आए

एक वर्ष पहले
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प्रखंड क्षेत्र के धवोलिया गांव में श्री श्री 108 श्री विष्णु महायज्ञ में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक प्राची देवी ने कहा है कि यज्ञ से बड़ा कोई रक्षक नहीं है और त्रुटि होने पर यज्ञ से बड़ा भक्षक नहीं है। भगवान श्री नारायण ही पृथ्वी पर अनेक रूप धारण करके अपने भक्तों पर कृपा कर उनका कल्याण करते हैं। लोभ और अहंकार के चलते महाभारत हुआ। युद्ध में हारने वाला अपना सर्वस्व खो देता है लेकिन जितने वालों को भी बहुत कुछ खोना पड़ता है। महाभारत के बाद अवस्थामा ने द्रोपदी के पांच पुत्रों का सोते में बध कर दिया। लेकिन द्रोपदी ने ऐसे आताताई को भी क्षमा कर दिया। माता कुंती ने भगवान से जो प्रार्थना किया और जो मांगा उसे कोई कभी नहीं मांगेगा। कुंती ने कहा हे भगवान हमारे जीवन में दुःख और विपत्ति आती रहे जिससे हमें आपकी भक्ति करने का अवसर निरंतर प्राप्त होता रहे।

स्वार्थ में समय बर्बाद कर देता है मनुष्य


उन्होंने कहा कि गर्भस्थ शिशु भगवान से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु हमें इस मलमूत्र की कोठरी से बाहर निकाल दो। बाहर आकर हम आपका ही भजन करेंगे। लेकिन जन्म लेने के बाद सब भूल जाता है। और पूरे जीवन भर माया के अधीन हाय हाय करके अपना जीवन समाप्त कर लेता है। मनुष्य जीवन प्राप्त कर के हमें भगवान के शरणागत होकर भक्ति में लीन होकर जन्म मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए श्री हरि के चरणों मे अपने आप को समर्पण कर देना चाहिए। तभी मनुष्य का जीवन सार्थक होगा। लेकिन कलयुग में मानव स्वार्थ और भोग विलास के चक्कर में अपनी कीमती समय बर्बाद कर देता है और उसे जीवन भर पछताने के सिवा कुछ नहीं मिलता है।
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