गांधी संग्रहालय उपेक्षित हुआ,ं अब सुनने को नहीं मिलता है वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाने रे...

Darbhanga News - एलएनएमयू के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय परिसर में अवस्थित गांधी संग्रहालय आज उपेक्षित है। पहले इस निदेशालय के...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:21 AM IST
Darbhanga News - the gandhi museum was neglected now i can not hear it say it to the vaishnava people who should go to pir
एलएनएमयू के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय परिसर में अवस्थित गांधी संग्रहालय आज उपेक्षित है। पहले इस निदेशालय के कार्यों की शुुरुआत महात्मा गांधी के प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाने रे... से होती थी। आज ऐसा नहीं देखा जा रहा है। मालूम हो कि निदेशालय का वह कमरा जो गांधी संग्रहालय के नाम से प्रसिद्ध है, वहां स्वतंत्रता के दौरान में आकर बापू महाराजा दरभंगा के आतिथ्य स्वीकार करके रुके थे। उस कमरे में बापू की भव्य प्रतिमा लगी है। समय-समय पर मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक इस पर माल्यार्पण करते रहे हैं। इसलिए कहा जाता है कि मिथिलांचल और महात्मा का संबंध बहुत गहरा था। इस इतिहास को पीढ़ियों तक समेटने के लिए 2012 के बाद विवि में पहल शुरू हुई। इसे शोध संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया। तत्कालीन निदेशक डॉ. एससी मिश्रा को गांधी संग्रहालय के रूप में इसे विकसित करने को कहा गया। उन्होंने बापू से जुड़े कई महत्वपूर्ण फोटोग्राफी सहित अन्य पाठकीय सामग्री संग्रहालय में संकलित कराई। संस्थान में नामांकित प्रति छात्र सौ रुपए संग्रह होने लगा। इस हिसाब से प्रति वर्ष 3 से 4 लाख रुपए की आमदनी भी संग्रहालय के नाम पर होने लगी।

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सपना टूटा |उद्देश्य गांधी संग्रहालय को शोध संस्थान के रूप में विकसित करना था। लेकिन, गांधी संग्रहालय को शोध संस्थान के रूप में विकसित करने का सपना यहां चकनाचूर हो चुका है। कभी संग्रहालय को शोध संस्थान के रूप में विकसित करने की इच्छाशक्ति रखने वाले इस निदेशालय का दिनचर्या ही बदल गया है।

ऐसे हुई शुरुआत|2 अक्टूबर 2012 को विवि ने गांधी सदन को संग्रहालय के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को इसका भार सौंपा गया । 2 अक्टूबर 2013 को संग्रहालय को स्कूली बच्चों के लिए खोलने का निर्णय लिया गया। उसी दिन से मुख्यमंत्री शैक्षणिक परिभ्रमण के तहत पहुंचने लगे छात्र- छात्राएं।

महात्मा- मिथिला- महाराज का संबंध| गांधीजी ने दरभंगा आने पर नेशनल स्कूल की बुनियाद रखी। 1920 से यहां पढ़ाई हुई। 1927 में पुन: दरभंगा आने पर गांधी ने अनाथालय की आधारशिला रखी। 1934 में भूकंप के समय आकर लोगों को संबल दिया। उन्होंने महाराज सर कामेश्वर सिंह को कांग्रेस की सदस्यता लेने का आग्रह किया। कई वर्षों तक राज्य परिवार से पत्राचार होता रहा। 1947 में बिहार आने पर गांधी ने कहा था कि महाराजा उन्हें अपने पुत्र के समान मानते थे।

बोले छात्र नेता|िश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव उत्सव पराशर का कहना है कि उन्होंने गांधी संग्रहालय की दयनीय स्थिति को देखते हुए कुलपति को एक ज्ञापन दिया है। साथ ही विवि के पहले की सोच के मुताबिक इसे शोध संस्थान के रूप में विकसित करने का आग्रह किया है। साथ ही इस पर अमल नहीं होने पर आंदोलन की भी बात कही है।

बोले निदेशक|इस संबंध में आज कुलपति से प्रो. विनय कुमार चौधरी की बात हुई है। शायद उन्हें व्यवस्था को ठीक करने को कहा गया है। डॉ. सरदार अरविंद कुमार सिंह, निदेशक, डीडीई।

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