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आज रात 9.50 से लेकर 11.39 बजे तक है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

एक वर्ष पहले
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हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात्रि ही होलिका दहन किया जाता है। यानी कि रंग वाली होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है होली में जितना महत्व रंग का है उतना ही महत्व होलिका दहन का भी है। होलिका दहन 9 मार्च को संध्या 5. 50 बजे से रात्रि 11. 39 बजे तक होलिका दहन होगा। उस दिन सुबह 6:08 मिनट से लेकर दोपहर 12:32 बजे तक भद्रा है। भद्रा को विघ्नकारक माना गया है। ज्योतिषाचार्य प्रो. महेश मोहन झा ने कहा कि ने भद्रा में होलिका दहन करने से हानि और अशुभ फल मिलते हैं। इसलिए भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है। पूजा विधि- होलिका दहन के पूर्व श्रद्धा पूर्वक होलिका के चारों ओर परिक्रमा करते हुए सूत के धागे को लपेटते हुए 3 या 7 बार परिक्रमा करें। फिर पूजन सामग्री होलिका में अर्पित कर जल से अर्घ देकर घर के सदस्यों को तिलक लगाएं। होलिका दहन के बाद जली हुई राख को घर लाना शुभ माना जाता है।

पूजा विधि : 3 या 7 बार परिक्रमा करें

पंडित महेश मोहन झा कहा कि होलिका दहन के पूर्व श्रद्धा पूर्वक होलिका के चारों ओर परिक्रमा करते हुए सूत के धागे को लपेटते हुए 3 या 7 बार परिक्रमा करें, फिर एक एक करके सारी पूजन सामग्री होलिका में अर्पित कर जल से अर्घ देकर घर के सदस्यों को तिलक लगाकर गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा होलिका में अग्नि लगाएं। मान्यता है कि होलिका दहन के बाद जली हुई राख को घर लाना शुभ माना जाता है।

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