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डीडीई में प्रवेश कर चुके स्कूल गुरु के वायरस से विवि की रक्षा करें वीसी, शीघ्र करेें कार्रवाई

एक वर्ष पहले
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एलएनएमयू में स्कूल गुरु के वकील की ओर से 3 पेज का आवेदन देकर 5.6 करोड़ की मांग पर हायतौबा मच गया है। सिंडिकेट सदस्य डॉ. हरिनारायण सिंह व विवि के छात्र संघ अध्यक्ष आलोक कुमार ने अलग-अलग सुझाव देकर मामले को सुलझाने का आग्रह किया है। डॉ. सिंह का कहना है कि डीडीई में प्रवेश कर चुके स्कूल गुरु के वायरस से विवि की रक्षा वीसी शीघ्र करें। उनका कहना है कि 5.6 करोड़ भुगतान का नोटिस देने के लिए प्रत्यक्ष रूप से वीसी, तत्कालीन निदेशक व कुलसचिव जवाबदेह हैं। सिंडिकेट के निर्णय के अनुसार इन तीनों को यह पैसा देना है। जांच कमेटी की अनुशंसा व सिंडिकेट में स्वीकार करने के बावजूद स्कूल गुरू को मदद करते हुए नोटिस देने की तिथि से उसे रद्द कराकर एग्रीमेंट की धाराओं को मान्यता प्रदान कर दी। ऊपर से केस खर्च के लिए 21.73 लाख भी दे दिया। निदेशक डॉ. सरदार अरविंद सिंह गये और वीसी भी जाने वाले हैं। ऐसे में इनके दोष को बेवजह विवि को ढोना पड़ेगा। कमेटी की अनुशंसा के बाद कानूनी कार्रवाई नहीं होने दी गई और न ही उसे काली सूची में डालने दिया। अपने निकट संबंधी सुरेन्द्र प्रसाद को स्कूल गुरु में बहाल कराने वाले उसके हितैषी डाॅ. शंभू प्रसाद को लीगल ओपिनियन में देकर मदद का रास्ता खोल दिया। स्कूल गुरु में काम करने वाले सुरेन्द्र प्रसाद तथा गणेश पासवान को आउट सोर्स पर बहाल कर स्कूल गुरू के प्रति अपनी सक्रिय साझीदारी स्थापित कर दी। विवि के सभी पदाधिकारियों को इस पर विचार करना चाहिए। कुलपति के भय या मुंह देखकर अगर नहीं विचार करेंगे तो समय उनका भी इतिहास लिखेगा।

विवि पदाधिकारियों की मिलीभगत से हो रही 5.6 करोड़ रुपए की मांग : आलोक कुमार

एलएनएमयू के छात्र संघ अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि सिंडीकेट सदस्यों की जांच कमेटी ने स्कूल गुरु के एग्रीमेंट को रद्द करने के प्रस्ताव को जानबूझकर षड्यंत्र के तहत लटका कर रखा गया। जिससे दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में कोई सेवा नहीं देने वाली कंपनी स्कूल गुरु को मौका मिल सके। उनका कहना है कि पूर्व निदेशक सरदार अरविंद सिंह, उप निदेशक डॉ. शंभू प्रसाद, सहायक कुलसचिव डॉ. केएन श्रीवास्तव एवं कुलपति का स्कूल गुरु से मिलीभगत होने के कारण 5.6 करोड़ रुपए की मांग की गई है। किसी भी कीमत पर छात्रों के पैसे को लूटने का स्वतंत्रता किसी को नहीं है। अगर विश्वविद्यालय अपनी मनमानी कर पैसे की बंदरबांट करेगा तो इसका अंजाम भ्रष्ट एवं तानाशाह पदाधिकारियों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कुलाधिपति एवं बिहार सरकार से भ्रष्ट अधिकारी पर अंकुश लगाने की मांग की है।

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