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विनायक हॉस्पिटल में इलाज में लापरवाही से जच्चा और बच्चा की मौत, कंपाउंडर को पीटा

यह घटना नई गोदाम रोड़ तुतबाड़ी में स्थित विनायक हॉस्पिटल में हुई।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 29, 2018, 05:09 AM IST

  • विनायक हॉस्पिटल में इलाज में लापरवाही से जच्चा और बच्चा की मौत, कंपाउंडर को पीटा
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    प्रसूता की मौत के बाद रोती बिलखती मां।

    गया.प्रसूता की मौत की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन पुलिस की मौजूदगी में ही परिजनों ने कंपाउंडर की जमकर धुनाई की और अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ किया। मृतक गर्भवती बेलागंज थाना के वाजितपुर निवासी अशोक कुमार यादव की 32 वर्षीय पत्नी रीना देवी है। पुलिस ने हॉस्पिटल को सील कर शव को पोस्टमार्टम के लिए एएनएमएमसीएच भेज दिया है।

    गर्भवती का ऑपरेशन हॉस्पिटल संचालक और प्रैक्टिशनर विनय कुमार और कैलाश कुमार कर रहे थे। ऑपरेशन के दौरान ही मरीज की स्थिति ठीक नहीं है तो उसने एएनएमएमसीएच में काम करने वाले एक डॉक्टर को कॉल कर बुलाया। जब तक वह डॉक्टर हॉस्पिटल पहुंचता तब तक प्रसूता की मौत हाे चुकी थी।

    बोर्ड किसी और का, ऑपरेशन कर रहा कोई और
    विनायक हॉस्पिटल में जो बोर्ड लगाया गया है उसमें डॉ. आलोक कुमार और डॉ. सोनम कुमारी का नाम लिखा है। आस-पास के लोगों ने बताया कि बोर्ड में जिस डॉक्टर का नाम लिखा है वे हॉस्पिटल में कभी नहीं आते। प्रैक्टिशनर विनय ही इस हॉस्पिटल का संचालन करता है और मरीजों का ऑपरेशन भी करता है। दलालों के चंगुल में फंसकर दूर देहात के मरीज यहां आ जाते हैं। जिस समय यह घटना हुई वहां अन्य कोई और मरीज नहीं मिला।

    मृतक के देवर ने किया केस
    मृतक प्रसूता के देवर लालू कुमार के बयान पर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज किया गया है। एफआईआर में विनय कुमार और कैलाश कुमार को अभियुक्त बनाया गया है। आवेदन में मृतक प्रसूता रीना देवी को मंगलवार को भर्ती किए जाने की बात लिखी गई है।

    दलालों के चंगुल में फंसकर मरने आते हैं मरीज
    ऐसे अस्पतालों के लिए दलालों का रैकेट काम करता है जो मरीजों का फंसाकर इन अस्पतालों तक लाते हैं। दूर देहात के मरीज अपना मर्ज ठीक होने के नाम पर आते हैं और अपना पैसा व जान गंवाकर लौट जाते हैं। इन अस्पतालों में सबसे अधिक गर्भवती महिलाओं का इलाज करने वाले अस्पताल होते हैं। इस तरह के अस्पताल शहर के बड़े सरकारी अस्पतालों के आस-पास होते हैं ताकि उनके सक्रिय दलाल मरीजों को सरकारी अस्पताल से वहां ला सकें।

    पैसे वसूली के लिए रखे जाते हैं गुंडे
    दलालों के चक्कर में फंसकर जब मरीज अस्पताल में आते हैं तो उनसे मनमाफिक फीस वसूल की जाती है। फीस देने में आनाकानी ना हो इसके लिए अस्पताल संचालक गुंडे भी रखते हैं। कभी-कभी तो ऑपरेशन करने के बाद मरीज को गंभीर बताते हुए ऐसे अस्पताल प्रसूता का बच्चेदानी निकाल बड़ी राशि वसूलते हैं।

    बड़े डॉक्टर का बोर्ड लगाकर मौत का चलता है खेल
    शहर में ऐसे सैकड़ों हॉस्पिटल संचालित हैं जहां बड़े डॉक्टर का बोर्ड लगाकर प्रैक्टिशनर डॉक्टर इलाज व ऑपरेशन करते हैं। ऐसे हॉस्पिटलों पर अमूमन तो स्वास्थ्य विभाग की कोई कार्रवाई नहीं होती है। और होती भी है तो खानापूर्ति कर एक सप्ताह में बंद होने वाला हॉस्पिटल फिर से खुल जाता है। सूत्रों की मानें तो हॉस्पिटल संचालकों अपने अर्थतंत्र से प्रशासन तंत्र को प्रभावित करता है। इन संचालकों की पहुंच काफी ऊपर तक होती है और जब कभी भी कार्रवाई के बाद हॉस्पिटल को सील किया जाता है तो सील हटाने के लिए बड़े अधिकारियों की पैरवी हो जाती है।

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    मौत के बाद अस्पताल में तोड़फोड़ करते मृतक के परिजन।
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