गया / एडीसी की ओर से ड्रग लाइसेंस सस्पेंशन आदेश बना वसूली का साधन



A Drug License Suspension Order Made by ADC
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A Drug License Suspension Order Made by ADC

  • मिलीभगत अधिकांश दुकानों को फार्मासिस्ट नहीं रहने के कारण किया गया है सस्पेंड 
  • कई दुकानदार बोर्ड के साथ तो कई बोर्ड हटाकर बेच रहे हैं दवा

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 11:51 AM IST

गया. असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर की ओर से दवा दुकानों का लाइसेंस सस्पेंशन जिले में अवैध वसूली का साधन बन गया है। यही कारण है कि सस्पेंशन अवधि के दौरान भी दवा दुकानदार अपनी दुकानें खोलकर दवा बेच रहे हैं। दैनिक भास्कर की ओर से की गई पड़ताल में यह बात सामने आई है कि सस्पेंशन के बाद ये दवा दुकानदार पदाधिकारियों व स्थानीय थाना से सेटिंग कर अपनी दुकानें खुली रखते हैं। 

 

यहां तक कि जिला मुख्यालय में जहां ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी का कार्यालय है, वहां भी दुकानें खुली मिली। कई दुकानदार अपने दुकान के बोर्ड लगाकर दवा बेच रहे हैं तो कई बोर्ड हटाकर। भास्कर पड़ताल में गया शहर की मुरारपुर स्थित मां मंगला मेडिकल हॉल की दुकान खुली मिली जिसे ज्ञापांक 471 दिनांक-28 मई 2019 से आगामी 60 दिन और उसके बाद फार्मासिस्ट उपलब्ध कराए जाने तक सस्पेंड किया गया। इसी तरह गया शहर के जी बी रोड नई गोदाम स्थित लाल मेडिकल भी खुली है जिसे ज्ञापांक 500 दिनांक 30 मई 2019 से 60 दिन व उसके बाद फार्मासिस्ट उपलब्ध कराए जाने तक सस्पेंड किया गया है। 

 

प्रखंडों में भी खुली मिलीं सस्पेंडेड दुकानें
इसी तरह जिले के विभिन्न प्रखंडों में सस्पेंड दुकानें खुली पाई गई। गुरुआ बाजार में पूजा मेडिकल हॉल व विजय मेडिकल हॉल खुली मिली जिसे क्रमश: 28 मई से 90 दिन व 30 मई से 60 दिन के लिए सस्पेंड किया गया है। टिकारी का न्यू भगवान मेडिकल हॉल, खिजरसराय का अनुग्रह मेडिकल हॉल, गुरारू का मीरा मेडिकल हॉल और अग्रवाल मेडिकल हॉल भी खुली मिली। 

 

एसएसपी व संबंधित थाने का दी जाती है सूचना
सिंह ने बताया कि दुकान को सस्पेंड करने के बाद इसकी सूचना एसएसपी और संबंधित थाने को दी जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसा विधि व्यवस्था के ख्याल से किया जाता है और पुलिस प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा की जाती है।

 

सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता ने जताई नाराजगी
इस संबंध में रालोसपा के प्रदेश महासचिव विनय कुशवाहा ने कहा पुलिस प्रशासन व ड्रग विभाग की ओर से अवैध वसूली के लिए सस्पेंशन का खेल खेला जा रहा है। लाईसेंस सस्पेंड करने के बाद दुकान खुली है या बंद इसका निरीक्षण भी होना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता बृजनंदन पाठक ने कहा कि दवा दुकानों में विभाग की मिलीभगत से कई दवा दुकानों में अवैध दवा का कारोबार किया जा रहा है। लाईसेंस सस्पेंड की कार्रवाई कर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। 

 

सस्पेंशन अवधि में दुकान खुली रखने पर होती है कड़ी कार्रवाई
एडीसी आरके सिंह ने बताया यदि सस्पेंशन अवधि में दुकान खुली पाई जाती है तो उसपर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। पकड़े जाने पर दुकान का लाईसेंस रद्द होगा व दुकानदार पर एफआईआर कर उसे गिरफ्तार किया जाएगा। इसके अलावा दुकान में मिलने वाली सारी दवाएं सीज की जाएंगी। यह बात अलग है कि अबतक जिले में ऐसी एक भी कार्रवाई नहीं हुई है। 

 

दुकानदार बोला- ड्रग विभाग के अधिकारी व थाना से सेंटिंग कर खोली जाती हैं दुकानें
एक दवा दुकानदार ने अपना नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया कि सस्पेंशन के बाद ड्रग विभाग के अधिकारी व थाना से सेंटिंग कर दुकानें खोली जाती है। संबंधित अधिकारी की सलाह पर ही बोर्ड को हटाकर दुकानों का संचालन होता है। सेंटिंग में हजारों रुपए का लेन-देन होता है और दुकान खुली रखने के नाम पर दुकानदार पैसे देते हैं।

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