बायोफ्लाॅक तकनीक से अब कम जगह में कर सकते हैं अधिक मत्स्य उत्पादन

Gaya News - सुधींद्र कुमार वर्मा|शेरघाटी जिन किसानों के पास कम जमीन है, वह बायोफ्लाॅक के माध्यम से मछली पालन कर लाखों रुपए...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:40 AM IST
Imamganj News - bioflake technology can now produce more fish in less space
सुधींद्र कुमार वर्मा|शेरघाटी

जिन किसानों के पास कम जमीन है, वह बायोफ्लाॅक के माध्यम से मछली पालन कर लाखों रुपए की आमदनी कर सकते हैं। बायोफ्लाॅक एक नई तकनीक है, जिसमें कम जगह में ज्यादा मछली का उत्पादन होता है। शेरघाटी के हमजापुर में इस तकनीक से मछली का उत्पादन किया जा रहा है और यह सब कुछ किया है आईपीसीएल में महाप्रबंधक के पद पर तैनात इंजीनियर आलोक दांगी ने। जाॅब करते हुए उन्होंने इमामगंज प्रखंड के सलैया के निकट भी डेढ़ एकड़ जमीन में तालाब खोदवाकर मछली पालन शुरू किया है व आसनसोल के निकट रघुनाथपुर में भी बायोफ्लाॅक के माध्यम से मछली पालन करवा रहे हैं। वे कहते हैं कि गांव के युवा अपने सपने को सच कर सकते हैं बस जरूरत है मेहनत करने की। नई तकनीक से मछली पालन या कृषि से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। उनकी तकनीक को देखने पटना से इंजीनियर राजू सिंह व राजद प्रवक्ता विपुल यादव भी पहुंचे।

सिंघिल और तिलाफिया मछली का कर सकते हैं उत्पादन

वर्तमान में हमजापुर में बायोफ्लाॅक के माध्यम से सिंघिल और तिलाफिया मछली का उत्पादन कर रहे हैं। आनेवाले दिनों में फंगेशियस, मांगूर, पाबड़ा, कतला आदि मछली का पालन शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि बायोफ्लाॅक के जरिए छोटी सी जगह में भी मछली पालन किया जाता है, जबकि पारंपरिक तरीके से बहुत जमीन की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि बायोफ्लाॅक से मछली उत्पादन के लिए टैंक की जरूरत पड़ती है। चार मीटर रेंज के टैंक में पांच क्विंटल तक मछली का उत्पादन किया सकता है। एक बार बीज डालने के बाद यदि ठीक ढंग से देखभाल किया जाए, तो चार पांच महीने में मछली बिक्री के लिए तैयार हो जाता है। उन्होंने कहा कि टैंक में ऑक्सीजन न मिलने पर मछली की मौत हो सकती है, इसलिए बिजली की जरूरत पड़ती है।

हमजापुर में आईपीसीएल के महाप्रबंधक कर रहें इस तकनीक का इस्तेमाल

बायोफ्लॉक पद्धति से मछली पालन की जानकारी देते आलोक।

क्या है बायोफ्लॉक सिस्टम:जलीय पशु उत्पादन पर पर्यावरण नियंत्रण में सुधार के लिए बायोफ्लॉक प्रणाली विकसित की गई है। जलीय जानवरों के उच्च संग्रहण घनत्व और पालन के लिए अपशिष्ट जल उपचार की आवश्यकता होती है। बायोफ्लॉक सिस्टम एक अपशिष्ट उपचार है, जिसे एक्वाकल्चर में महत्वपूर्ण महत्व प्राप्त है। उत्तेजक हेट्रोट्रोफिक माइक्रोबियल विकास के माध्यम से नाइट्रोजन अपशिष्ट को आत्मसात करता है।

मछली पालन करना काफी लाभदायक

आईपीसीएल महाप्रबंधक, इंजीनियर आलोक दांगी बताते है कि बायोफ्लाॅक के माध्यम से मछली पालन करना काफी लाभदायक होता है, लेकिन दक्षिण बिहार में न के बराबर है। वहीं उत्तर बिहार के कुछ जिलों में किसानों ने शुरू हुआ है जबकि पश्चिम बंगाल में तो बड़े पैमाने पर बायोफ्लाॅक के जरिए मछली का उत्पादन किया जा रहा है। वे कहते हैं कि यहां 60 प्रतिशत लोग मछली खाना पसंद करते हैं।

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