हरिशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू

Gaya News - हरिशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास 12 जुलाई से शुरू हो गया है। जगत के पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले गए है।...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:25 AM IST
Gaya News - chaturmas begins with harishayani ekadashi
हरिशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास 12 जुलाई से शुरू हो गया है। जगत के पालनहार भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले गए है। सभी तरह के शुभ कार्यो पर ब्रेक लग गया है। ऐसी मान्यता है कि शंखासुर के वध करने के बाद अपनी प्रिय एकादशी आषाढ़ शुक्ल में चार मास के लिए भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते है जिसे चातुर्मास के नाम से हम सभी जानते है। चातुर्मास का अपना ही महत्व है। आचार्य की माने तो वैवाहिक कार्य निषेध हो जाता है लेकिन वाराणसी पंचांग श्रावण मास में भी वैवाहिक लग्न देते है जिसका क्षेत्रवाद में विशेष स्थान है।

चातुर्मास में सन्यासी, महात्मा चार मास तक फलाकर करते हुए एक जगह वास करते है तो गृहस्थ के लिए चार मासों में शाक, दही, दूध, द्विदल (दाल) त्याग व्रत रखना उत्तम होगा। आचार्य ने बताया कि 17 जुलाई से भगवान सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे इस दिन से वे दक्षिणायन सूर्यदेव हो जाएगें। इसका भी काफी महत्व है।

आया चातुर्मास लाया व्रतोपवास...

चातुर्मास में भले ही शुभ कार्य न हो, लेकिन पर्व-त्योहार की होड़ रहेगी। अाषाढ़ पूर्णिमा को गुरु महोत्सव का पर्व मनाया जाएगा। 17 जुलाई से बाबा भोले की आराधना का महीना शुरू होगा। श्रावण में श्रद्धालु शिवलिंग पर प्रतिदिन विल्वपत्रार्चन, अभिषेक, सोमवारी व्रत, हरियाली अमावस्या, नागपंचमी व गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाएगें। वहीं भादों में हरितालिका व्रत तीज, श्रीगणेश जयंती, आश्विन में पितराें का महापर्व पितृपक्ष, जीउतिया, शारदीय नवरात्र, शरद पूर्णिमा और कार्तिक में राधाष्टमी, दीपावली, छठ का पर्व मनाया जाएगा।

कालसर्प योग वाले जातक बाबा भोले की अवश्य करें अाराधना

पवित्र श्रावण मास में बाबा भोले की पूजा सभी श्रद्धालुओं के अलावे जन्मकुंडली में कालसर्प योग वाले जातक को अवश्य करना चाहिए। यह उनके लिए विशेष लाभप्रद होगा। कालसर्प योग के निवारण के साथ-साथ भगवान शिव की विशेष कृपा मिलेगी। वहीं संतान प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत करें। इससे सुनी गोद अवश्य भरेगी। बता दें कि श्रावण मास में पूर्णिमा को धर्म के सुरक्षार्थ बंधन में बांधने वाला उत्सव रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

क्या कहते हैं आचार्य


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