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डांसर कांड: लोकल पुलिस पर उठ रहे कई सवाल, अब बदली जाएगी जांच एजेंसी

Gaya News - बोधगया के बहुचर्चित डांसर कांड में लोकल पुलिस की अब भारी किरकिरी हो रही है। अब तक की पुलिसिया कार्रवाई और...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:30 AM IST
Gaya News - dancer scandal many questions arising on local police now investigation agency will be changed
बोधगया के बहुचर्चित डांसर कांड में लोकल पुलिस की अब भारी किरकिरी हो रही है। अब तक की पुलिसिया कार्रवाई और कार्यशैली को दुर्भावना से ग्रसित माना जा रहा है। पूरी प्रक्रिया में साफ झलक रही है कि पुलिस इस मामले में विशेष अभिरूचि ले रही है और जरूरत से ज्यादा कानूनी पेचीदगी खड़ा करने में स्वयं ही सवालों के घेरे में आ गई है। चारों पीड़ित लड़कियों ने शपथ पत्र के माध्यम से साफ तौर पर इनकार किया है कि उसके साथ कोई दुष्कर्म हुआ है। इन नर्तकियों को अनैतिक देह व्यापार का धंधेबाज साबित करने की कोशिश में पुलिस ने इस एफआईआर के बयान के विपरीत धाराएं जड़ दी। चारों लड़कियों ने न्यायालय में हुए धारा- 164 के बयान में भी दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की गई है। दर्ज एफआईआर में भी ऐसा नहीं है। पीड़ित डांसरों ने इस बाबत राज्य पुलिस मुख्यालय में लिखित शिकायत की है। शिकायती पत्र में कहा गया है कि बोधगया पुलिस ने दो दिनों तक थाना में नजरबंद रखा। लिखित शिकायत को फाड़ दिया और पुलिस द्वारा टाइप कराए गए बयान पर जबरिया दस्तखत कराया गया। यही नहीं दो दिनों तक टार्चर किया गया और धमकाया गया कि कोर्ट में बयान के क्रम में चार लोगों का नाम लेना है। इन नामों को रटाया भी गया। चेतावनी दी गई कि ऐसा नहीं करने पर सेक्स वर्कर साबित कर जेल भेज देंगे।

छिनेगी जांच की जवाबदेही

इस प्रकरण की विस्तृत जानकारी मिलने के बाद राज्य पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लिया है। नर्तकियों की शिकायत को भी गंभीरता से लिया गया है। यह माना गया कि लोकल पुलिस कुछ प्रतिष्ठित लोगों को जान बूझकर टारगेट कर रही है। ऐसे में इस प्रकरण की जांच अब लोकल पुलिस के बजाए पुलिस की दूसरी जांच एजेंसी से कराने का निर्देश दिया गया है।

नर्तकियों को दो दिन तक नजरबंद रखने पर भी उठे सवाल

इस प्रकरण में लोकल पुलिस पर कई सवाल उठ रहे हैं। घटना 22 सितंबर की देर रात की है। एफआईआर 23 सितंबर को सुबह 8:40 बजे की है। आखिर लिखित बयान को फाड़कर टंकित बयान कैसे आया? एफआईआर को टंकित किसने कराया? 23 सितंबर को कोर्ट खुला रहने के बावजूद 24 को धारा 164 का बयान क्यों कराया? 23 सितंबर को दिन भर थाना में नजरबंद रखने के बजाए इसी रोज मेडिकल जांच क्यों नहीं कराया गया?

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