डॉक्टरों और कर्मियों की लापरवाही से आयुष्मान योजना बना जी का जंजाल

Gaya News - प्रधानमंत्री की गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक की स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली महत्वाकांक्षी आयुष्मान...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:30 AM IST
Gaya News - due to the negligence of doctors and personnel ayushman plans his life
प्रधानमंत्री की गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक की स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना जिले के लाभुकों के लिए जी का जंजाल बन गया है।

मगध प्रमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में भी योजना के लाभुक मरीजों का ख्याल नहीं रखा जाता है। कई दिन भर्ती रहने के बाद भी जब उन्हें सेवाएं नहीं दी जाती हैं, तो बेबस मरीज या तो बिना इलाज के घर लौट जा रहे हैं या निजी क्लिनिक में जाकर अपना इलाज पैसे खर्च कर करवा रहे हैं।

लाभार्थियों को सही स्वास्थ्य सेवाएं डॉक्टरों व कर्मियों की लापरवाही के कारण नहीं मिल रही है जबकि सरकारी अस्पतालों में भी किसी मरीज का इलाज करने पर केन्द्र सरकार की ओर से प्रति मरीज पैकेज भी दिया जा रहा है। एएनएमएमसीएच में आयुष्मान भारत योजना के इन दो मरीजों की स्थिति जिले में योजना की स्थिति बयान कर रही है

मगध के सबसे बड़े अस्पताल एएनएमएमसीएच में भी मरीजों का नहीं रखा जाता ख्याल

एएनएमएमसीएच की फाइल फोटो।

अस्पताल में भर्ती करने के लिए मरीज को लगानी पड़ रही है अधिकारियों को गुहार, डॉक्टर करते हैं टाल-मटोल

गया सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत डोमनबिगहा गांव निवासी 36 साल के सुधीर कुमार को भर्ती करने के लिए अधिकारियों की गुहार लगानी पड़ रही है। सुधीर आयुष्मान भारत योजना का लाभार्थी है और सर में लगी पूर्व की चोट में दर्द होने पर इलाज करवाना चाह रहा है। सुधीर को पहले ऑर्थो विभाग के ओपीडी में भेजा गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने इसे सर्जरी का केस मानते हुए उसे सर्जरी ओपीडी में भेज दिया। सर्जरी के डॉक्टर ने देखने के बाद उसे सिटी स्केन कराने की सलाह दी। सिटी स्कैन जो पीपीपी मोड पर संचालित है उसने यह कहकर सिटी स्केन से इंकार कर दिया कि मुफ्त स्केन के लिए उसे पदाधिकारियों से लिखवाकर लाना होगा। थक हारकर सुधीर अस्पताल के उपाधीक्षक व आयुष्मान भारत योजना के नोडल पदाधिकारी डॉ. पी के अग्रवाल के पास पहुंचा। डॉ. अग्रवाल ने भी उसे यह कहकर चलता कर दिया कि मुफ्त सिटी स्कैन कराने के लिए उसे पहले अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा। तब तक ढ़ाई बजे का समय हो गया था और उसे इमरजेंसी में ही भर्ती होने की गुंजाइश बची थी। इमरजेंसी में जाने पर उसे यह कहकर भगा दिया कि पहले सिटी स्कैन करवाकर लाओ। मीडिया की पहल पर उसे इमरजेंसी में भर्ती किया गया।

सुधीर कुमार

भर्ती होने के 14 दिन बाद मिला ऑपरेशन का डेट लेकिन फिर डॉक्टर ने भगा दिया

औरंगाबाद जिले के मुफ्फसिल थानांतर्गत मुंशीबिगहा निवासी 45 साल की शांति देवी को 25 सितंबर को एएनएमएमसीएच में भर्ती कराया गया। शांति देवी के बायें हाथ की हड्डी टूटी है जिसके लिए उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है। शांति देवी को ऑर्थो विभाग में डॉ. शैलेन्द्र कुमार के यूनिट में भर्ती किया गया। सभी कागजी प्रक्रिया व जांच पूरी होने के बाद भी कई दिनों तक उनका ऑपरेशन नहीं किया गया। काफी मन्नतें-आरजू करने के बाद 11 अक्टूबर को आखिरकार 14 दिनों के बाद ऑपरेशन की तिथि दी गई। 11 अक्टूबर को जब मरीज के परिजन ऑपरेशन थियेटर लेकर गए तो उन्हें भगा दिया गया। शांति देवी की बेटी बबीता देवी ने बताया कि डॉक्टर ने यह कहकर भगा दिया कि ऑपरेशन नहीं होगा। जब हमने उनसे कहा कि वे पिछले 14 दिनों से भर्ती हैं तो डॉक्टर का जवाब था कि हम आपको बुलाने गए थे। जहां जाना है जाओ।

शांति देवी


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