आर्थिक विषमता ही है सामाजिक विषमता का आधार, पर अब बदलाव

Gaya News - मगध विश्वविद्यालय परिसर स्थित डॉ. राधाकृष्ण सभागार में 21वीं सदी में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रासंगिकता’ पर एक...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 03:16 AM IST
Gaya News - economic inequality is the basis of social inequality but changes are now
मगध विश्वविद्यालय परिसर स्थित डॉ. राधाकृष्ण सभागार में 21वीं सदी में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रासंगिकता’ पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन समाजशास्त्र विभाग के द्वारा किया गया। इस सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रभारी कुलपति प्रो. कार्यानंद पासवान, विशिष्ट अतिथि बिहार के अपर पुलिस महानिदेशक (सिविल डिफेंस) एके अंबेडकर, विषय विशेषज्ञ पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) अनिल किशोर यादव, पटना के जीएसटी आयुक्त रंजीत कुमार, सामाजिक विज्ञान संकाय के अध्यक्ष प्रो. उमापति सिंह एवं डॉ. प्रेम रंजन भारती ने की। कार्यक्रम की शुरुआत सेमिनार की संयोजक एवं समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. चौधरी की स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने अतिथियों का परिचय देते हुए सेमिनार की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। आर्थिक विषमता ही सामाजिक विषमता का आधार है, परंतु इस सोच में अब धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। भारत चिंतकों की भूमि रही है और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के चिंतन द्वारा 21वीं सदी में समानता लाई जा सकती है। उक्त बातें मविवि के प्रभारी कुलपति प्रो. कार्यानंद पासवान ने शनिवार को विवि के समाजशास्त्र विभाग द्वारा 21वीं सदी में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रासंगिकता’ पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि यह सदी ज्ञान एवं तकनीक का युग है, जिसके आधार पर हर तरह के शोषण को समाप्त किया जा सकता है। मुख्य वक्ता के रूप में अपर पुलिस महानिदेशक एके अंबेडकर ने कहा कि बाबा साहब ने दलित एवं समाज के कमजोर वर्गों के लिए उद्धार के लिए ‘एक व्यक्ति एक मत’ का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि सर्वाधिक दलित उत्पीड़न बिहार में ही हुए हैं और यहीं से उनकी उद्धार के लिए सामाजिक क्रांति तथा प्रतिरोध भी शुरू हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बहुत से संगठन अस्तित्व में आए तथा जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करते हुए बिहार में पहला भूमि सुधार कानून लागू हुआ। उन्होंने कहा कि बेहतर विधि व्यवस्था से इस सामाजिक क्रांति में बदलाव आया है। कार्यक्रम में मौजूद पुलिस महानिरीक्षक(प्रशिक्षण) अनिल किशोर यादव ने कहा कि बाबा साहब सामाजिक क्रांति के अग्रदूत एवं सच्चे राष्ट्र निर्माता थे। 21वीं सदी में उनके विचारों से आर्थिक समानता प्राप्त कर नए समाज की नींव डाली जा सकती है। आज बाबा साहब को भारत से ज्यादा विदेशों में सम्मान प्राप्त हो रहा है। वर्ण व्यवस्था के उन्मूलन करने हेतु अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। कार्यशाला को संबोधित करते हुए पटना के जीएसटी आयुक्त रंजीत कुमार ने विभिन्न सर्वे का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होने के बावजूद आर्थिक विषमता में भी बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आज 21वीं सदी में सामाजिक समता के लिए यही आर्थिक असमानता सबसे बड़ी चुनौती है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के डॉ. ओपी भारती ने कहा कि किसी का शोषण तभी होता है जब आप उसको सहन करते हैं। बेहतर यह है कि खुद को इतना शिक्षित एवं जागरूक करें कि कोई आपका शोषण ना कर सके।

कार्यक्रम में डॉ. पीयूष कमल सिन्हा, डॉ. मनोज सिन्हा, प्रो. एसएस गुप्ता, डॉ. प्रेम रंजन भारती, शंकर कुमार चौधरी, नीतू कुमारी, सुनीता रजक, विनेश कुमार इत्यादि ने भी अपने शोध पत्र पढ़े। मंच संचालन डॉ. पिंटू कुमार एवं दीपा रानी तथा धन्यवाद ज्ञापन गया कॉलेज के डॉ. दीपक कुमार ने किया।

सेमिनार में प्रभारी कुलपति ने कहा- 21वीं सदी ज्ञान और तकनीक का युग

कार्यशाला को संबोधित करते प्रभारी कुलपति व उपस्थित अतिथि।

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