कोरोना के डर से मुर्गी पालन उद्योग प्रभावित ~20 किलो खरीदने में भी हिचक रहे लोग
चीन सहित 80 देशों मे फैला कोरोना वायरस के खौफ का असर अब इमामगंज में भी देखने को मिल रहा है। चिकन खाने के शौकीन लोग डर गए हैं। हालत ऐसी रही कि होली के त्योहार मे भी इमामगंज में 110 रुपए किलो बिकने वाले मुर्गे को लोग बीस रुपए किलो भी नहीं खरीद रहें हैं। फलतः इसका सीधा असर पोल्ट्री फॉर्म व्यवसाय पर पड़ा है। कुल मिलाकर कहा जाए तो कोरोना वायरस के कारण इमामगंज विधान सभा क्षेत्र में मुर्गे का व्यवसाय अभिशाप बनकर रह गया है। इमामगंज, गंगटी, बन्दोहरी, दुबहल सहित आधा दर्जन जगहों पर पोल्ट्री फॉर्म और लेयर फॉर्म संचालक धर्मेन्द्र प्रसाद ने बताया कि सोशल मीडिया पर मुर्गे को लेकर चलाई गई अफवाह के कारण स्वस्थ मुर्गे के मीट खाने से भी लोग परहेज कर रहें हैं। उन्हें डर सता रहा है कि कहीं कोरोना वायरस का शिकार न हो जाएं। जिसका परिणाम है कि पोल्ट्री फॉर्म व्यवसाय सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।
सोशल मीडिया बना अफवाह का कारण, फैलाया जा रहा है भ्रम
चीन मे जैसे ही कोरोना वायरस फैलने से लोगो को संक्रमित होने और मौत की खबर सोशल मीडिया पर फैला और इसका कारण मुर्गे को बताया गया। इस तरह की अफवाह फैलते ही लोग मांसाहार भोजन से परहेज करने लगे। फलतः इसका सीधा असर पोल्ट्री फार्म पर पड़ा । वर्तमान में स्थिति ऐसी हो गई है कि संचालक मुर्गे के फीड और मजदूरों की मजदूरी नहीं दे पा रहें हैं। हालांकि अखबार में विज्ञापनों के माध्यम से बताया है कि कोरोना वायरस का मुर्गे का मीट से कोई लेना देना नहीं है।
मुर्गे से कोरोना का कोई लेना देना नहीं
इमामगंज के एमबीबीएस डाॅक्टर दिग्विजय प्रसाद ने बताया कि मुर्गे के मीट और कोरोना वायरस का एक दूसरे से कुछ लेना देना नहीं है। मुर्गे का मीट खाने से कोरोना वायरस नहीं फैलता है। सोशल मीडिया पर लोगों को भ्रमित करने के लिए अफवाएं फैलाई जा रही हैं। अफवाहों से दूर रह की जरूरत है। उन्होंने बताया कि 25 डिग्री तापमान में वायरस समाप्त हो जाता है जबकि मुर्गे का मीट 100 डिग्री तापमान में पकाया जाता है। इस लिए मुर्गे खाने वाले लोग बेहिचक खाएं, डरने की कोई जरूरत नहीं है।
एक किलो का मुर्गा तैयार करने में लागत आता है 90रु
पोल्ट्री फार्म संचालक श्री प्रसाद ने बताया कि चूजा से लेकर एक किलोग्राम तक मुर्गा तैयार करने मे 90 रुपए खर्च आता है। उन्होंने बताया कि होली के त्योहार के कारण सभी फार्म संचालकों ने ज्यादा चूजे डाला था, लेकिन मुर्गे को लेकर सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस के खौफ का ऐसा अफवाह फैला कि लोग मुर्गे खरीदना तो दूर की बात, पोल्ट्री फार्म मे आने से हिचकने लगे। ऐसी हालत देखकर मजबूरीवश बीस रुपए किलो मुर्गे को बेचना पड़ा। बावजूद खरीदार नहीं पहुंचे। इके दुके लोग ही पहुंचे और मुर्गे को खरीदा। उन्होंने बताया कि होली में बीस प्रतिशत मुर्गे की बिक्री हुई। 80 प्रतिशत मुर्गे फार्म मे बचे हुए हैं।
एक मुर्गे पर प्रति किलो 80 से 90 रुपए पड़ रही है लागत, लाखों का नुकसान
मुर्गी फार्म की फाइल फोटो।